जन सुविधा केंद्र में लापरवाह हैं जिम्मेदार

विभागीय हेल्पलाइन पर शिकायतों के प्रति उदासीन होने लगे हैं जिम्मेदार अधिकारी
शिकायत करने पर जेएसके में फोन करने की दी जा रही है सलाह

Capture4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। राजधानी में जनसुविधा केन्द्र खुलने की वजह से विभागीय हेल्पलाइन नंबर पर आम जनता को मिलने वाली सुविधा प्रभावित होने लगी है। विभागीय हेल्पलाइन में जन शिकायतों की सुनवाई के लिए तैनात कर्मचारी शिकायतों को गंभीरता से नहीं सुनते हैं। यहां फोन करने पर अक्सर जन सुविधा केन्द्र में फोन करने की सलाह दी जाती है। इससे न केवल जन सुविधा केन्द्र में आने वाली शिकायतों का लोड बढ़ता है बल्कि विभागीय अधिकारी समस्या का निदान करने में पूरा वक्त लेते हैं। ऐसे में शिकायतों का त्वरित निस्तारण करवाने के मकसद से खोली गई विभागीय हेल्पलाइन डायवर्जन सेंटर बनती जा रही हैं। जो सरकार की मंशा को पलीता लगाने का काम
कर रही है।
जन सुविधा केन्द्र से शिकायतों के निस्तारण को गति मिली है। आम जनता को समस्याओं का समय से समाधान और शिकायतों के निस्तारण में फिसड्डी विभागों की पोल खोलने का मौका मिला है। इसके साथ ही आम जनता को मोबाइल फोन, ई-मेल, व्हाट्सऐप और एसएमएस के माध्यम से भी अपनी शिकायत करने की सुविधा प्रदान की गई है। लेकिन यह सुविधा विभागीय हेल्पलाइन नंबर पर आने वाली शिकायतों को गंभीरता से नहीं लेने वाले कर्मचारियों के लिए वरदान साबित हुई है। जन सुविधा केन्द्र के कर्मचारियों की मानें तो जिले में कई महीनों से नगर निगम, बिजली विभाग, आपूर्ति विभाग, निर्वाचन विभाग, जल-कल विभाग और मार्ग प्रकाश विभाग के हेल्पलाइन नंबर पर फोन करने पर शिकायतकर्ता को जन सुविधा केन्द्र में फोन करने की सलाह दी जा रही है। ऐसा विभागीय हेल्पलाइन नंबर पर आने वाली शिकायतों का आंकड़ा कम करने के मकसद से किया जा रहा है। जो चिन्ता का विषय है लेकिन जिम्मेदार अधिकारी चुप्पी साधे हैं।
दरअसल जन सुविधा केन्द्र और सोशल मीडिया सेल खुलने की वजह से शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों से मोबाइल पर संदेश, फोटोग्राफ और आडियो एवं वीडियो के साथ शिकायतें आने लगी हैं। इनका जन सुविधा केन्द्र से जुड़े संबंधित विभागों में भेजकर निराकरण करवाया जाता है। अब आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र और खतौनी के लिए लोगों को कार्यालयों का चक्कर लगाने से मुक्ति मिल गई है। लेकिन नगर निगम, बिजली विभाग, ग्राम पंचायत विभाग और आपूर्ति विभाग से जुड़ी समस्याओं का समाधान मिलने में विलंब होता है। इसकी बड़ी वजह जन सुविधा केन्द्र में इन विभागों से जुड़ी समस्याओं का अधिक से अधिक आना है। ऐसे में विभागीय अधिकारियों को शिकायतों का निस्तारण करने के लिए काफी समय मिल जाता है लेकिन त्वरित निस्तारण की आस में फोन करने वालों को निराश होना पड़ता है।

जन सुविधा केन्द्र खोलने का मकसद
उत्तर प्रदेश में ई-डिस्ट्रिक्ट परियोजना के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए गौतम बुद्घ नगर, गाजियाबाद, गोरखपुर, सीतापुर, रायबरेली और सुल्तानपुर को चिन्हित किया गया था। राज्य सरकार ने इन सभी जिलो में एक जिला स्तरीय जन सुविधा केन्द्र खोलकर आम जनता से जुड़े विभागों की समस्याओं का समाधान करने की सुविधा प्रदान करना था। दरअसल ई-डिस्ट्रिक्ट परियोजना ई-गवर्नेन्स योजना के अन्र्तगत चलने वाली स्टेट मिशन मोड परियोजना है, जिसका मुख्य उद्देश्य जन केन्द्रित सेवाओं का कम्प्यूटरीकरण करना है। इस परियोजना में सम्पूर्ण व्यवस्था क्रम को कम्प्यूटराइज किया गया है । ई-डिस्ट्रिक्ट परियोजना भारत सरकार द्वारा पोषित परियोजना है, जिसमें प्रमाण पत्र, शिकायत, जन वितरण प्रणाली, पेन्शन, विनमय, खतौनी, राजस्व वाद एवं रोजगार केन्द्रों मे पंजीकरण संबंधी सेवाओं को सम्मिलित किया गया है। इन सभी सेवाओं का हस्तान्तरण जन सुविधा केन्द्र के माघ्यम से किया जाता है। लखनऊ में जन सुविधा केन्द्र के अलावा सोशल मीडिया सेल का भी गठन किया गया है, जिसमें आम जनता अपनी शिकायतों को व्हाट्सएप और ई-मेल के माध्यम से पहुंचा सकती है। इन सभी समस्याओं को कलेक्ट्रेट स्थित जनसुविधा केन्द्र के माध्यम से निस्तारित किया जाता है। लेकिन जनता से जुड़े कुछ विभाग समय से समस्याओं का समाधान नहीं करते हैं। इसमें नगर निगम सबसे फिसड्डी विभाग घोषित है। इसके अलावा बिजली विभाग, आपूर्ति और निर्वाचन विभाग से जुड़ी शिकायतों के निस्तारण को लेकर लोग संतुष्ट नहीं हैं।

ई-डिस्ट्रिक में मिलने वाली सुविधा
ई-डिस्ट्रिक के अंतर्गत आम जनता को विभिन्न प्रमाण पत्रों और विभागों से जुड़ी सुविधाओं के बारे में ऑन-लाइन जानकारी हासिल करने और विभागों से जुड़ी शिकायतों और उनके निस्तारण की सुविधा मिलती है। जिले में जाति प्रमाण पत्र, जन्म प्रमाण पत्र, मृत्यु प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र और विकलांग प्रमाण पत्र के लिए कार्यालयों का चक्कर लगाने की जरूरत नहीं है। अब घर बैठे इंटरनेट के माध्यम से आनलाइन आवेदन पत्र भर सकते हैं। इसके बाद एक निश्चित अवधि के अंदर आपको प्रमाण पत्र उपलब्ध करा दिया जाता है। इसके अलावा वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन, विकलांग पेंशन, राशन कार्ड वितरण, राशन कार्ड समर्पण और राशन कार्ड प्रतिलिपि के बारे मेें ऑन-लाइन जानकारी प्राप्त करने की भी सुविधा है।

शिकायतों के निस्तारण की स्थिति
कलेक्ट्रेट कार्यालय स्थित जन सुविधा केन्द्र में आने वाली शिकायतों का 87 प्रतिशत निस्तारण किया जा रहा है। जबकि जन सुविधा केन्द्र खुलने से पूर्व जनता से जुड़े महत्वपूर्ण विभागों में लंबित शिकायतों का अंबार लगा रहता था। आंकड़ों पर गौर करें तो जन सुविधा केन्द्र में नगर निगम से जुड़ी 53.7 प्रतिशत, जलकल संबंधी 20.6 प्रतिशत, बिजली विभाग संबंधी 4.6 प्रतिशत, जल निगम संबंधी 1.7 प्रतिशत, एलडीए संबंधी 1.6 प्रतिशत और अन्य 17.8 प्रतिशत शिकायतें आई हैं। इसमें 87 प्रतिशत शिकायतों का निस्तारण किया जा चुका है। अंतरिम प्रक्रिया वाली शिकायतों का प्रतिशत 0.4 और डिफाल्टर का प्रतिशत 11.5 है। ऐसे में यदि संबंधित विभागों में शिकायतों का समय से निस्तारण हो जाये, तो आम जनता को जन सुविधा केन्द्र में फोन करने की जरूरत ही न पड़े।

जन शिकायतों की कैटेगरी
जन सुविधा केन्द्र में आने वाली शिकायतों की कैटेगरी निर्धारित की गई है। इसमें ए, बी, सी, डी और ई कैटेगरी की शिकायतों को स्वीकार किया जाता है। ए- कैटेगरी के अंतर्गत आग लगना, बाढ़ आना, लड़ाई-झगड़ा होना, इमरजेंसी मरीज के लिए डाक्टर न होना, बिजली का तार टूटकर गिर जाना, गैस सिलेंडर लीक होना शामिल है। बी-कैटेगरी के अंतर्गत जान से मारने की धमकी, रसोई गैस नहीं मिलना, लाइट खराब होने समेत आवश्यक शिकायतें। सी-कैटेगरी नल खराब होना, सफाई कर्मी नहीं आना, खडंजा नहीं पड़ा, चिकित्सालय में चिकित्सक नहीं आना, आय, जाति निवास प्रमाण पत्र समय से नहीं मिलने, खेतों पर कब्जा, बोल्टेड कम आना, सरकारी विद्यालयों में शिक्षक नहीं आने संबंधी सामान्य शिकायतें हैं। डी-कैटगरी में घोटाले तथा रिश्वत, सरकारी व्यक्ति और कर्मचारी की तरफ से की जाने वाली शिकायतें शपथ पत्र के माध्यम से ली जाती हैं। ई-कैटेगरी के अंतर्गत प्रधान नेताओं और सांसदो व विधायकों के खिलाफ शिकायतें शपथ पत्र के साथ ली जाती हैं।

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