जनता परिवार बिखराव की ओर

महागठबंधन में सीट बंटवारे में सपा को पांच सीटें दी गई थीं, जिसे लेकर सपा की बिहार इकाई नाराज थी। समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव ने एक बार फिर साबित कर दिया कि उनमें सियासी धुरी को काबू में रखने का पूरा माद्दा है। अब sanjay sharma editor5सीट बंटवारे पर उन्हें किनारे किए जाने से वह नाराज होकर महागठबंधन से अलग हो गए हैं।

जनता परिवार में बिखराव की स्थिति दिख रही है। इस बिखराब से निश्चित ही केन्द्र सरकार से लेकर बिहार तक भाजपा ने राहत की सांस ली होगी। समाजवादी पार्टी ने बिहार विधानसभा चुनाव अकेले लडऩे की घोषणा कर दी है। बिहार विधान सभा चुनाव में सपा के अकेले चुनाव लडऩे की वजह से अब जनता परिवार पर ग्रहण लगता दिख रहा है। जनता परिवार के गठन में मुलायम सिंह की महती भूमिका थी। लालू और नितीश को एक मंच पर लाने का श्रेय मुलायम को ही जाता है। लालू और नितीश गले मिले तो इसके पीछे मुलायम ही थे। शायद इसीलिए जनता परिवार का अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव को बनाया गया। लेकिन कल जिस तरीके से समाजवादी पार्टी के राष्टï्रीय महासचिव प्रो. राम गोपाल यादव ने कहा कि बिहार में समाजवादी पार्टी अकेले चुनाव लड़ेगी, उससे तो अब यही दिख रहा है कि जनता परिवार में गतिरोध बढ़ गया है।
सीटों के बंटवारे को लेकर यह मतभेद शुरू हुआ है। प्रो. रामगोपाल यादव ने कहा कि सपा को जितनी सीटें दी जा रही हैं उससे ज्यादा सीटें सपा जीतकर दिखाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि सीटों के बंटवारे से समाजवादी पार्टी अपमानित महसूस कर रही है। उन्होंने महागठबंधन पर बहुत कुछ कहा। फिलहाल इस गठबंधन के टूटने से निश्चित ही भाजपा को फायदा होगा। भाजपा के कई नेताओं ने इस पर चुटकी भी ली है।
आगामी बिहार विधानसभा चुनाव के लिए राष्टï्रीय जनता दल (राजद), जदयू, कांग्रेस और सपा में गठबंधन हुआ था, जिसे ‘महागठबंधन’ नाम दिया गया था। जनता परिवार के गठन की तैयारी के बीच देश के दो बड़े राजनीतिक परिवार के बीच रिश्तेदारी भी जुड़ गई। मुलायम और लालू समधी बन गए। दोनों परिवारों में रिश्तेदारी होने से महागठबंधन को मजबूती मिली थी। लेकिन जिस तरीके से सपा ने अपनी राह बदली उससे तो तय हो गया कि राजनीति के कोई रिश्ते-नाते नहीं होते। महागठबंधन में सीट बंटवारे में सपा को पांच सीटें दी गई, जिसे लेकर सपा की बिहार इकाई नाराज थी। समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव ने एक बार फिर साबित कर दिया कि उनमें सियासी धुरी को काबू में रखने का पूरा माद्दा है। अब सीट बंटवारे पर उन्हें किनारे किए जाने से वह नाराज होकर महागठबंधन से अलग हो गए हैं। महागठबंधन के तौर पर उन्हें मात्र 5 सीटें दी गईं थीं वो भी राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने अपने कोटे से दी।
महागठबंधन का भविष्य तो समय बताएगा लेकिन इससे नितीश और लालू की स्थित थोड़ी असहज हो गई है। बिहार चुनाव करीब है। बिहार विधानसभा चुनाव देश की राजनीति की दिशा और दशा दोनों तय करेगी। सबकी प्रतिष्ठïा दांव पर लगी है।

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