जनता परिवार का भविष्य

अगर समाजवादी पार्टी के नजरिये से देखा जाये तो उसे जनता परिवार के प्रस्तावित विलय की कोई खास राजनीतिक जरूरत नहीं है। यूपी में तकरीबन दो साल बाद विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं। यहां सूबे की अखिलेश सरकार बेहतर तरीके से काम कर रही है। उत्तर प्रदेश में जदयू और राजद का कोई जनाधार नहीं है। नयी पार्टी का गठन होता है तो जदयू और राजद के कई नेताओं को एडजस्ट करना होगा।

 

SANJAY SHARMA - EDITOR

संजय शर्मा – संपादक

समाजवादी विचारधारा से जुड़े तमाम दलों के बीच एकता और नये दल के गठन का भविष्य अधर में लटका नजर आ रहा है। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठï नेता रामगोपाल यादव ने हाल में एक बयान दिया है कि नये दल का गठन डेथ वारंट पर दस्तखत करना है। दरअसल रामगोपाल यादव शुरू से ही इस विलय के खिलाफ रहे हैं लेकिन उन्होंने कभी भी खुलकर अपनी भावनाओं का इजहार नहीं किया। जनता परिवार के प्रस्तावित विलय पर पहली बार उनका इतना तीखा बयान आया है। यह अपने आप में इसलिये और महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि इस नये दल का मुखिया मुलायम सिंह यादव को बनाया गया है जो न सिर्फ यादव परिवार के वरिष्ठïतम सदस्य हैं बल्कि समाजवादी पार्टी के भी राष्टï्रीय अध्यक्ष हैं।
जनता परिवार के गठन से सबसे ज्यादा नुकसान सपा नेताओं को हो सकता है। इसे भांपते हुए उत्तर प्रदेश के कई सपा नेताओं ने अपनी नाराजगी जाहिर की थी। चूंकि यह मामला सीधे नेताजी से जुड़ा है इसलिये किसी ने सामने आकर बयान देने की हिमाकत नहीं की। अगर समाजवादी पार्टी के नजरिये से देखा जाये तो उसे जनता परिवार के प्रस्तावित विलय की कोई खास राजनीतिक जरूरत नहीं है। उत्तर प्रदेश में तकरीबन दो साल बाद विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं। यहां सूबे की अखिलेश सरकार बेहतर तरीके से काम कर रही है। उत्तर प्रदेश में जदयू और राजद का कोई जनाधार नहीं है। अगर जल्द ही नयी पार्टी का गठन होता है तो जदयू और राजद के कई ऐसे नेताओं को एडजस्ट करना होगा। ऐसे में सपा के कई नेताओं को लखनऊ और दिल्ली में अपने नये साथियों के लिये जगह बनानी होगी। इस प्रक्रिया में कुछ लोगों को अपनी कुर्सी भी गंवानी पड़ सकती है। समाजवादी पार्टी के नेताओं की नाराजगी और आपत्ति की यही असल वजह है।
रामगोपाल यादव ने यह भी सुझाव दिया है कि बिहार के चुनाव के बाद नये दल के गठन पर विचार हो। बिहार में जल्द ही विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। उत्तर प्रदेश में अपना मुख्य जनाधार और राजनीतिक भविष्य सुनिश्चित करने वाली समाजवादी पार्टी के लिये बिहार उतना महत्वपूर्ण नहीं है। जनता परिवार का राजनीतिक भविष्य फिलहाल अंधेरे में नजर आ रहा है। बिहार चुनाव के नतीजों पर जनता परिवार का भविष्य टिका हुआ नजर आ रहा है। अगर बिहार में लालू और नीतीश को सत्ता मिली तो बात आगे बढ़ सकती है। यदि बिहार में सत्ता परिवर्तन हुआ तो नये राजनीतिक समीकरण सामने आयेंगे।

Pin It