जनता के खून पसीने की कमाई से सजाए गए बंगले होंगे खाली यूपी के छह पूर्व सीएम होंगे बेघर

  • सुप्रीम कोर्ट ने आज दिया फैसला, दो महीने में खाली करें बंगले पूर्व मुख्यमंत्री
  • अदालत के फैसले से राजनैतिक गलियारों में खलबली
  • सभी प्रमुख पार्टियों के पूर्व सीएम को दिया गया है आलीशान बंगला

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
001लखनऊ। सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले ने राजनेताओं की नींदे उड़ा दी है। देश की सबसे बड़ी अदालत ने लोक प्रहरी संस्था की याचिका पर आदेश दिया है कि पूर्व सीएम अपने आलीशान बंगले दो महीनों में खाली करें। विक्रमादित्य मार्ग और माल एवेन्यु में बने इन आलीशान बंगलों को तैयार करने में जनता के खून पसीने की कमाई के अरबों रुपए लगा दिए गए हैं। अब दो महीनों में इन बंगलों को खाली किया जायेगा। न्यायालय के इस फैसले से सोशल मीडिया में जबरदस्त चर्चा शुरू हो गई और सभी ने इस फैसलों को बेहद सराहा है।
पूर्व मुख्यमंत्रियों के लिए यह खबर बेहद आहत करने वाली है। वह यूपी में रहें या फिर यूपी से बाहर। शहर के सबसे पॉश इलाके में आलीशान बंगला जिंदगी भर उनके लिए तैयार रहता है। इन बंगलों में नेताजी रहें या न रहें, मगर उनके सेवकों और कार्यकर्ताओं की लंबी फौज यहां जरूर तैनात रहती है।
जो पूर्व मुख्यमंत्री इस आदेश की चपेट में आएंगे उनमें देश के गृहमंत्री राजनाथ सिंह, मुलायम सिंह यादव, मायावती, एनडी तिवारी और राज्यपाल राम नरेश यादव तथा कल्याण सिंह शामिल हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला भले ही अभी दिया हो, मगर मायावती का बंगला बहुत पहले से विवाद का विषय बना हुआ है। इस मामले में हाईकोर्ट में एक याचिका भी चल रही है, जिसमें प्रदेश सरकार से पूछा भी गया है कि मायावती का बंगला कितने बंगलों को तोडक़र बनाया गया।
उल्लेखनीय है यूपी की मुख्यमंत्री रहते मायावती ने अपने इस बंगले के आस-पास के कई बंगलों और सरकारी दफ्तरों को ध्वस्त कराके अपना आलीशान बंगला बनवाया था। अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर यह बंगला खाली करना होगा।
गरीबी से जूझते इस प्रदेश में इन पूर्व मुख्यमंत्रियों के लिए अरबों रुपए की साज सज्जा कराई गई। किस बंगले पर कितना रुपया खर्च हुआ यह बताने को राज्य सम्पत्ति के अधिकारी कभी तैयार नहीं होते, जाहिर है वे यह नहीं चाहते कि जनता को कभी यह पता चले कि उनकी कमाई पर राजनेता किस तरह मौज करते हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब यह नेता क्या करेंगे, इस पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के ऊपर टिप्पणी करने का कोई औचित्य नहीं बनता लेकिन लंबे समय तक सार्वजनिक जीवन व्यतीत किया, वही मुख्यमत्री रहे हैं। इसी सदाशयता की वजह से उनको आवास दिया गया। इसके बावजूद सुप्रीम कोर्ट का जो भी निर्णय आया है, उसे स्वीकार किया जाना चाहिए।
अशोक वाजपेयी,
एमएलसी, समाजवादी पार्टी

पूर्व सीएम को बंगला जनता से संवाद रखने के लिए मिलता है। उन्हें भी यह सोचना चाहिए कि इस बंगले में ऐसा कोई धन अपव्यय न करें, जिससे जनता में गलत संदेश जाए।
कमाल खान,
स्थानीय संपादक, एनडीटीवी

भाजपा कानून का पालन करती है। अभी हमने सुप्रीम कोर्ट का फैसला देखा नहीं है। मगर कोर्ट का जो भी फैसला होगा हम उसका सम्मान करेंगे।
मनीष शुक्ला, मीडिया प्रभारी, भाजपा

इस देश के राजनेताओं को खुद ये एहसास करना चाहिए कि यह पैसा गरीब जनता का है और इसे सोच समझ कर खर्च करें। सुप्रीम कोर्ट के आदेश से साफ हो गया कि यह नेता जनता के पैसे पर कैसे ऐश करते हैं।
वैभव माहेश्वरी, प्रवक्ता
आम आदमी पार्टी

सुप्रीम कोर्ट का आदेश स्वागतयोग्य है। जिस तरह से ट्रस्ट बनाकर लोगों ने माल एवेन्यु जैसी जगह पर कब्जा किया है, वह गलत है। इसलिए पूर्व मुख्यमंत्रियों को सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार तय समय में आवास खाली कर देना चाहिए।
अशोक सिंह, प्रवक्ता कांग्रेस

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