जनता की करोड़ों की गाढ़ी कमाई डकार रहा आरआर विभाग

  • करोड़ों का डीजल घोटाला कर नहीं दे रहा हिसाब-किताब
  • नगर निगम व आरआर विभाग के अधिकारियों से आ रही भ्रष्टïाचार की बू

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
Capture 9लखनऊ। नगर निगम के आरआर विभाग में भ्रष्टïाचार इस कदर व्याप्त है कि यहां के अधिकारी किसी भी सवाल का जवाब देना जरूरी नहीं समझते। विभाग में सालों से जनता की गाढ़ी कमाई की लूट-घसोट की जा रही है और इसका हिसाब लेने वाला कोई नहीं है। हिसाब लेने वाले ही जब लूट घसोट में बराबर के भागीदार हैं, तो कार्रवाई सिर्फ भगवान भरोसे ही होगी। विभाग पर करोड़ों रुपये का डीजल घोटाले का आरोप लग रहा है। विभाग ने पिछले पांच सालों से सालाना खर्च होने वाले 72 करोड़ रुपये का हिसाब किताब नगर निगम को नहीं दिया है। इस पर सवाल उठने तो लाजमी है।

‘आप’ कर रही मांग

आम आदमी पार्टी के जिला संयोजक गौरव माहेश्वरी ने बताया कि महापौर और नगर आयुक्त को पत्र लिखकर कहा गया है कि ऐसी क्या मजबूरी है, जिसके चलते नगर निगम के मुख्य नगर लेखा परीक्षक द्वारा ऑडिट हेतु पत्रावलियां बार-बार मांगी जा रही हैं, जिसको आपके अधिकारी देने में डर रहे हैं। यह बड़ी हैरत की बात है कि सालाना लगभग 72 करोड़ रुपये का भुगतान डीजल और गाडिय़ों के रख-रखाव में खर्च हो रहा है, जिसका हिसाब जनता के सामने लाने की जगह नगर निगम अधिकारी इसको छुपाने में लगे हुए हैं।
उधर शहर की जनता इस 72 करोड़ रुपये के खर्च का हिसाब किताब एवं पिछले पांच सालों की बैलेंस सीट देखना चाहती है, जिसको नगर निगम द्वारा सार्वजनिक कर देना चाहिए। अफसोस इस बात का है कि 72 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी शहर नर्क बना हुआ है। इसको छुपाने में यह साफ-साफ प्रतीत हो रहा है कि इस 72 करोड़ के भुगतान में आप सब मिलकर लूटपाट कर रहे हैं। अगर आप लोगों की मंशा साफ होती तो इस मनमाने तरह से खर्च किए जा रहे रुपयों को आप लोग नहीं छिपाते। पत्र में यह भी कहा गया है कि अगर जरा भी शंका है तो पिछले 5 साल की बैलेंस शीट के साथ महापौर और नगर आयुक्त हिसाब-किताब मिलाने आम आदमी पार्टी के सामने बैठ जाएं। उन्होंने पत्र में यह भी कहा कि यह 72 करोड़ रुपये के भुगतान से संबंधित पत्रावलियां जिस दिन आप लोग सार्वजनिक कर देंगे, उस दिन आप लोगों के भ्रष्टïाचार की पोल खुल जाएगी। यह रुपया जनता के द्वारा भरे गए टैक्स से खर्च हो रहा है, जिसकी लूटपाट का विरोध हर स्तर पर आम आदमी पार्टी पिछले कई महीनों से लगातार कर रही है और भविष्य में करती रहेगी।

क्या है मामला

नगर निगम अपने आरआर विभाग को हर महीने लगभग छह करोड़ रुपये का भुगतान कर रहा है, जिसमें पचास फीसदी से ज्यादा डीजल और बाकी गाडिय़ों का रख-रखाव शामिल है। पिछले कई महीनों से नगर निगम के मुख्य नगर लेखा परीक्षक द्वारा आरआर विभाग से गाडिय़ों की सूची, सत्यापित लॉग बुक एवं डीजल और गाडिय़ों के रख-रखाव के भुगतान से संबंधित पत्रावलियों को ऑडिट हेतु लगातार मंाग की जा रही है। ताकि इसके पीछे के हो रहे भ्रष्टïाचार को उजागर किया जा सके, परंतु जानबूझ कर मुख्य नगर लेखा परीक्षक को भुगतान संबंधित पत्रावलियों का ब्यौरा उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है।

पांच वर्षों से नहीं बन पा रही बैलेंस शीट

जानकारों की माने तो नगर निगम की ओर से आरआर विभाग को सालाना 72 करोड़ रुपये दिये जाते हैं और हर वर्ष आरआर विभाग को इन रुपयों का हिसाब-किताब नगर निगम को देना होता है। पर बीते पांच वर्ष में आर आर विभाग ने नगर निगम को कोई भी ब्योरा नहीं दिया है। इसी के चलते नगर निगम की ऑडिट रिपोर्ट नहीं बन पा रही है। नगर निगम आर आर विभाग को डीजल व गाडिय़ों के रख-रखाव के लिए यह पैसा मुहैया कराता है। लेकिन आर आर विभाग द्वारा इस खर्च का ब्योरा नहीं देना भ्रष्टïाचार को उजागर कर रहा है।

“नगर निगम द्वारा सभी वर्षों की बैलेंस शीट तैयार है, कभी-कभी रिपोर्ट ऑडिट होने में समय लगता है। रही बात आम आदमी पार्टी की ओर से डीजल घोटाले का आरोप लगाए जाने और नगर निगम से लिखित में जवाब मांगे जाने के मामले की, तो यह कोई नई बात नहीं है। आम आदमी पार्टी के लोग तो हमेशा आरोप ही लगाते हैं।”
-उदयराज सिंह
नगर आयुक्त, नगर निगम

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