जटिल कानूनी प्रक्रिया

न्यायाधीश ने अपने फैसले में महत्वपूर्ण बात कही कि वह जानते हैं कि आम जनमानस में इस मामले को लेकर क्या सोचा जा रहा है, लेकिन अदालत का फैसला ठोस सुबूतों और गवाहों के आधार पर होता है। न्यायाधीश ने जांच प्रक्रिया पर भी कई सवाल उठाए।

sanjay sharma editor5आखिर सलमान खान हाईकोर्ट से बाइज्जत बरी हो गए। सलमान खान के हक में फैसला आने के बाद से देश में सोशल मीडिया पर इस बात की खूब चर्चा रही है कि पैसे में बहुत ताकत होती है। 13 साल की लंबी लड़ाई के बाद भी पीडि़त पक्ष को न्याय नहीं मिला। सरकारी पक्ष का कहना है कि वह इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करेगा। सुप्रीम कोर्ट का फैसला जो भी हो, लेकिन उसमें भी वक्त लगेगा। दरअसल सलमान खान पर आरोप यह था कि उन्होंने सितंबर 2002 में शराब पीकर गाड़ी चलाते हुए पांच लोगों को कुचल दिया था। पिछले दिनों एक निचली अदालत ने सलमान को पांच साल की सजा सुनाई थी, जिस फैसले को हाईकोर्ट ने पलट दिया है।
न्यायाधीश ने अपने फैसले में महत्वपूर्ण बात कही कि वह जानते हैं कि आम जनमानस में इस मामले को लेकर क्या सोचा जा रहा है, लेकिन अदालत का फैसला ठोस सुबूतों और गवाहोंं के आधार पर होता है। न्यायाधीश ने जांच प्रक्रिया पर भी कई सवाल उठाए। यह अजीब विडंबना है कि इस मामले में कई गवाह होने के बावजूद सरकारी पक्ष यह साबित नहीं कर पाया कि सलमान खान शराब पीकर गाड़ी चला रहे थे। इस दुर्घटना में घायलों के अलावा सलमान खान के एक दोस्त ने भी कुछ महीनों पहले मीडिया में इस बात को स्वीकार किया था कि गाड़ी सलमान ही चला रहे थे। 2002 में जब यह घटना हुई थी तो उस वक्त सडक़ पर सो रहे कई लोगों ने मीडिया में बताया था कि सलमान नशे में थे और गाड़ी चला रहा थे। इतने गवाहों के बावजूद सरकारी पक्ष साबित नहीं कर पाया कि सलमान गाड़ी चला रहे थे कुछ कहना बेमानी है। इस मामले में एक सबसे महत्वपूर्ण गवाह सलमान खान के निजी सुरक्षाकर्मी रवींद्र पाटिल थे, जिनकी 2007 में लंबी बीमारी के बाद मौत हो गई। पाटिल तक ने यह गवाही दी थी कि गाड़ी सलमान चला रहे थे और वह शराब भी पिये हुए थे। हाईकोर्ट ने पाटिल की गवाही को विश्वसनीय नहीं माना। यहां सवाल उठता है कि अगर इस मुकदमे की सुनवाई तेजी से हुई होती तो निश्चित ही पाटिल की गवाही के लिए कोर्ट जवाब-तलब करता। हमारे देश में यह बहुत बड़ी समस्या है कि न्याय प्रक्रिया में देरी से अक्सर अपराधी को सजा मिलने या निर्दोष के छूटने में बड़ी बाधा खड़ी हो जाती है। मामले की सुनवाई और फैसला आते-आते लंबा वक्त गुजर जाता है। कई ऐसे बड़े मामले रहे है जिनमें दो दशक से ज्यादा का समय लगा है और कई ऐसे मामले है जिसमें एक दशक बाद भी फैसला नहीं आ पाया है। इस कारण से न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह लग रहा है। सलमान खान के मामले में फैसले का मुख्य मुद्दा आरोप साबित करने की विफलता और तफ्तीश की कमियां हैं। ये कमियां सिर्फ इस मामले में नहीं, समूची व्यवस्था में हैं, इनको सुधारना हमारी न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता के लिए जरूरी है।

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