छोटे निवेशकों का शेयर बाजार से मोहभंग

पहले सस्ता निर्यात करना और फिर महंगा मंगाना, यह कोई पहली बार नहीं होगा। दाल की कीमत बढऩे की प्रमुख वजह इसकी कम पैदावार बताई जाती है। बेशक दाल की खेती का रकबा बढ़ाने पर सरकार को विशेष ध्यान देना होगा, पर एक साल में इसके दाम में चालीस फीसद की बढ़ोतरी के पीछे बाजार का खेल भी हो सकता है।

sanjay sharma editor5शेयर बाजार में भारी गिरावट से निवेशकों के करोड़ों रुपए डूब गए। 2008 के बाद यह सबसे बड़ी गिरावट थी। शेयर बाजार की गिरावट को देखकर छोटे निवेशकों का एक बार फिर बाजार से मोहभंग हुआ है। निवेशकों के डूबे पैसे की भरपाई हो पाना मुश्किल है। पिछले दिनों वित्तमंत्री से लेकर आर्थिक सलाहकार तक लगातार यह बात कहते रहे है कि देश की अर्थव्यवस्था को लेकर चिंता करने की कोई वजह नहीं है। चीन की मुद्रा में हुए अवमूल्यन का भारत पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। प्रभाव पड़ेगा तो भी बहुत नगण्य। लेकिन सोमवार को शेयर बाजार की जो हालत हुई वह इन बयानों पर सवालिया निशान लगाती है। शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव तो लगा रहता है लेकिन अभी शेयर बाजार में जो गिरावट आयी वह असामान्य थी।

बाजार में गिरावट की वजह से भारत को भी खासा नुकसान हुआ। भारतीय शेयर बाजार एक दिन में 1,700 अंक नीचे आ गया और सेंसेक्स लगभग 25,000 अंक तक आ गया। निफ्टी में भी 468 अंकों की गिरावट दर्ज की गई और रुपये की कीमत तेजी से गिरकर 66.49 प्रति डॉलर तक आ गई। इस गिरावट का संबंध भारतीय अर्थव्यवस्था से नहीं है, बल्कि इसके अंतरराष्टï्रीय कारण हैं। चीन की अर्थव्यवस्था में गिरावट और चीनी मुद्रा युआन के अवमूल्यन से अंतरराष्टï्रीय बाजार में जो हडक़ंप मचा है, उसका यह नतीजा है। ऐसा कम ही देखने में आया है कि एक दिन में शेयर बाजार इस कदर गिरा हो। रुपया कमजोर हो गया है, इसका संभावित नतीजा साफ है कि आयात महंगा होगा। भारत को कच्चा तेल खरीदने के लिए ज्यादा खर्च करना होगा जिससे फिर र्इंधन के दाम बढ़ सकते हैं और इसके फलस्वरूप अन्य सामग्रियों का महंगा होना भी तय माना जा रहा है।

पहले सस्ता निर्यात करना और फिर महंगा मंगाना, यह कोई पहली बार नहीं होगा। दाल की कीमत बढऩे की प्रमुख वजह इसकी कम पैदावार बताई जाती है। बेशक दाल की खेती का रकबा बढ़ाने पर सरकार को विशेष ध्यान देना होगा, पर एक साल में इसके दाम में चालीस फीसद की बढ़ोतरी के पीछे बाजार का खेल भी हो सकता है। इस पर अंकुश लगाना होगा। प्याज की तरह दाल की समस्या को भी सरकार आयात के जरिए सुलझाना चाहती है पर डॉलर के मुकाबले रुपए की कमजोरी ने आयात को महंगा बना दिया है। निर्यात में कई महीनों से लगातार गिरावट का क्रम रहा है। जाहिर है, महंगाई और घरेलू बाजार से लेकर विदेश व्यापार तक, सबकुछ ठीकठाक नहीं है। हालांकि मंगलवार को बाजार थोड़ा संभला लेकिन सोमवार को बाजार में आयी गिरावट की भरपाई हो पाना बहुत मुश्किल है।

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