छोटे कर्मचारी को फंसाकर बड़े मोहरे को बचाने की कोशिशड्ढ

पांच लाख की दवा चोरी के मामले में केजीएमयू ने वार्डब्वाय पर दर्ज कराई थी एफआईआर

Capture4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। केजीएमयू के रेडियोलॉजी विभाग में दावा चोरी के मामले में विभाग में तैनात वार्डब्वाय अशोक मिश्रा पर केस दर्ज कर लिया गया है। केजीएमयू प्रशासन ने पांच लाख रुपये की दवा चोरी के मामले में रेडियोथेरेपी विभाग के वार्डब्वॉय अशोक मिश्रा के खिलाफ स्थानीय चौकी में एफआईआर दर्ज कराई है। सूत्रों की मानें तो ऐसा करके छोटे कर्मचारी को फंसाया गया है और बड़े मोहरे को बचाने का प्रयास किया गया है।
केजीएमयू के उप चिकित्सा अधीक्षक डॉ.वेद प्रकाश सिंह ने बताया कि तीन सदस्यीय जांच कमेटी ने इस पूरे मामले में जांच की थी, जिसमें वार्ड ब्वाय का नाम आया था। सीसीटीवी कैमरे में चोरी की घटना को आधार मानकर उसके खिलाफ कार्रवाई की गई है। बताते चले कि रेडियोथेरेपी विभाग में बीते दिनों पांच लाख रुपये का दवा चोरी का मामला सुरक्षा गार्डों की मदद से पकड़ा गया था। इस मामले में एक चिकित्सक, एक सिस्टर और एक वार्ड ब्वाय का भी नाम आया था, जिसके बाद से चिकित्सक को नोटिस देकर सिस्टर को सस्पेंड और वार्ड ब्वाय को हटा दिया गया। इस मामले में एक अन्य वार्ड ब्वाय घटना के दिन से ही गायब था। केजीएमयू प्रशासन को शक है कि दवा चोरी में उसने भी संभवत मदद की होगी। उसकी तलाश चल रही है।

असली मास्टरमाइंट का नहीं लगा सुराग
बताते चले के केजीएमयू के रेडियोलोजी विभाग से काफी दिनों से कैंसर की दवाइयांं चुराकर बाहर बाजार में बेचीं जाती थी। केजीएमयू ने जांच रिपोर्ट के बाद वार्डब्वाय पर चोरी का मुकदमा दर्ज करा दिया लेकिन असली मास्टरमाइंड कौन था ये बताने में जांच रिपोर्ट असफल रही। केजीएमयू के कई चिकित्सकों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि बिना डॉक्टर या अन्य स्टाफ की भागीदारी के बगैर इतनी ज्यादा रकम की दवाइयां निकालकर बाहर मार्केट में बेचना बहुत मुश्किल है। क्या रेडियोलॉजी में तैनात किसी डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ को इतनी दवा चोरी की कोई जानकारी ही नहीं हुई। सूत्रों के अनुसार छोटे कर्मचारी को फंसाकर बड़े मोहरों को बचाने की कोशिश की जा रही है। यदि सही जांच हो तो इस मामले में कई डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ भी फंस सकता है।

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