छुट्टी के दिन इलाज की छुट्टी, एक यूनिट प्लेटलेट्स की कीमत 15 हजार

  • बडे अस्पतालों में आईसीयू के अलावा क्रिटिकल केयर के नाम पर चल रही है वेंटिलेटर यूनिट
  • यूनिट में मरीज के भर्ती होते ही बढ़ जाता है अस्पताल का शुल्क का मीटर

6 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। राजधानी में मच्छर जनित बीमारियों से बचने के लिए लोग सारे उपाय कर रहे हैं । इसके बावजूद डेंगू से बचाव नहीं हो पा रहा है। रोजाना इस बीमारी से ग्रसित लोगों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। कई ऐसे मरीज है जों इस बीमारी से जंग हार चुके हैं। वहीं कई मरीज जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ रहे हैं। ऐसे में निजी अस्पताल डेंगू के मरीजों के इलाज तथा जीवन रक्षक उपकरण यानी वेंटिलेटर से बचाने के नाम पर मनमाना शुल्क वसूल कर रहे हैं। अगर मरीज प्लेटलेट्स चढ़ाने के साथ ही तीन चार दिन आईसीयू में रुक जाता है दो लाख रूपये तक खर्च हो रहे हैं। साथ ही एक यूनिट प्लेटï्लेट्स 15 हजार में चढ़ाया जा रहा है। साथ ही छुट्टïी पड़ जाने की सूरत में निजी चिकित्सालयों में मनमाना पैसा वसूलने के बाद भी चिकित्सक छुट्टïी मना रहे हैं। सोमवार को अलीगंज स्थित कपूरथला चौराहे पर स्थित एक ट्रस्ट के अस्पताल में भी मनमानी चल रही है। यहां भर्ती मरीजों से मनमाना शुल्क वसूला जा रहा है। लेकिन इलाज के नाम पर छुट्टïी मनायी जा रही है। अलीगंज निवासी संदीप पेशे से पत्रकार हैं। चार दिन पहले अचानक तेज बुखार आया। उन्होंने चिकित्सक को दिखाया जहां जांच कराने के बाद डेंगू की पुष्टिï हुयी । सोमवार की शाम करायी गयी जांच में प्लेटलेट्स मरीज के 15000 बतायी गयीं। जिसके बाद परिजनों ने निजी अस्पताल में भर्ती कराया। जहां पर एक यूनिट प्लेटलेट्स चढ़ाने के लिए 15 हजार रुपये जमा कराने के बाद प्लेटलेट्स चढ़ाया गया। लेकिन मंगलवार को बकरीद की छुट्टïी होने पर एक भी चिकित्सक मरीज को देखने नहीं आया। ऐसे में संदीप के परिजन उसको किसी सरकारी अस्पताल में भर्ती कराने की जुगत में लग गये।
सबसे ज्यादा दिक्कत छोटे शहरों में हो रही है। जहां गरीब व किसान सब कुछ बेच कर जान बचाने में जुटा है। मच्छर जनित बीमारियों के कारण निजी पैथालाजी सेंटर पहले से कमाई कर रहे है। अब बड़े अस्पतालों की तर्ज पर छोटे अस्पतालों ने पैथालाजी जांच शुरू कर दी है या निजी पैथालाजी का कलेक्शन सेंटर शुरू कर दिया है। हालात यह हैं कि अब हर गली मोहल्ले में चलने वाला निजी अस्पताल आईसीयू चलाने की जिम्मदारी ले लेता है। उनके आईसीयू में पल्समीटर के अलावा आक्सीजन सिलेंडर ही होता है।
सबसे बड़ी समस्या अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सक भी नहीं होते हैं। लेकिन चार्ज मनमाना होता है। आजकल बडे अस्पतालों में आईसीयू के अलावा क्रिटिकल केयर के नाम पर वेंटिलेटर यूनिट चल रही है। इस यूनिट में मरीज के जाते शुल्क का मीटर इतनी तेज भागता है कि तीमारदार बेहाल हो जाता है। यहां पर वेंटिलेटर चार्ज के अलावा विशेषज्ञ डाक्टर फीस विजिट के अनुसार ली जाती है। ऑक्सीजन चार्ज, ड्यूटी डॉक्टर चार्ज, नर्सिग चार्ज, यूनिट एडमिशन चार्ज, मेडिसिन चार्ज आदि इतना हो जाता है कि एक दिन का शुल्क पचास हजार से एक लाख तक पहुंच जाता है। अब आपके मरीज का प्लेटलेट्स 10 हजार तक पहुंच गया और हालत गंभीर हुई तो फिर दुआ के अलावा रुपए का भरपूर इंतजाम करना पड़ता है।

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