छात्रों को पहचान देने में महती भूमिका निभा रहा विवि

दीक्षांत समारोह की तैयारियों में जुटा विवि प्रशासन

 4Captureपीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। विकलांग बच्चों के जन्म लेते ही परिवार वालों को बच्चे के भविष्य को लेकर चिंता सताने लगती है। उनके अभिभावक सोचते हैं कि आगे चलकर इस बच्चे का भविष्य कैसा होगा। कुछ लोग तो इन्हें समाज पर बोझ समझते हैं। ऐसे बच्चों के लिए डॉ. शकुन्तला मिश्रा राष्टï्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय किसी वरदान से कम नहीं है। इस विवि की बनावट ऐसे छात्रों को ध्यान में रखकर ही की गई है। साथ ही इस वर्ष होने वाले दीक्षांत समारोह की तैयारी भी ऐसे छात्रों को ध्यान में रखकर की गई है। इस दीक्षांत में बैरियर फ्री ऑडिटोरियम अपने यहां के विकलांग छात्रों को देखते हुए बनाया गया है।
विश्वविद्यालय को पहले भी विकलांग छात्रों के लिये उत्कृष्ट पुनर्वास सेवाएं प्रदान करने को लेकर राष्टï्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। वहीं ऐसे छात्रों की शिक्षा के लिए विवि के कुलपति ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से नि:शक्तजन को पूरी सुविधा देने व इनकी शिक्षा मुफ्त कराने का आग्रह किया था। इसके बाद मुख्यमंत्री ने ऐसे छात्रों की शिक्षा मुफ्त कर दी है। दीक्षांत समारोह के लिये एक बड़ा ऑडिटोरियम बनाया गया है जिससे विकलांग छात्रों को किसी भी प्रकार की कोई कठिनाई न हो। केवल ऑडिटोरियम ही नहीं वरन्ï पूरा विवि ही इन छात्रों को ध्यान में रख कर बनाया गया है।
छात्रों के लिए लगाई गई अलग तरह की टाइल्स
विवि के निर्माण के लिए फर्श पर लगाई जाने वाली टाइल्स की बनावट इस प्रकार से कराई गई है। जिससे छात्र उसकी गिनती कर फ्लोर का पता लगाते है कि वह किस फ्लोर पर है। विवि में 50 प्रतिशत नि:शक्त हैं। ऐसी सुविधा के कारण छात्र बिना किसी का सहारा लिए विवि में अपना काम आसानी से करते हैं।
मिल रहे कृतिम अंग
विश्वविद्यालय में कृत्रिम अंग प्रदान करने के लिए सेन्टर बनाया गया है। जिसमें विकलांग छात्रों को मुफ्त सर्जरी के जरीए कृतिम अंग प्रदान किया जा रहा है। विवि प्रशासन की इस पहल से विकलांग जन को पुनर्वासन में मदद मिलेगी और उनकी कार्य क्षमता में भी बढ़ोत्तरी होगी। विवि की इस शुरूआत से लोगों को समय और धन दोनों की बचत हो रही है। यह व्यवस्था छात्रों के लिए खास कर है लेकिन यहां अन्य जगहों से लोग ऑनलाइन सर्जरी के लिए आवेदन कर रहे हैं।
जल्द ही नि:शक्त छात्रों के लिए विवि परिसर में विद्यालय खोलने की तैयारी
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. निशीथ राय ने बताया कि ऐसे बच्चों की शुरुआत की पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान देने की अवश्यकता होती है। ऐसे छात्रों को यदि सही दिशा मिल जाती है तो उनका भविष्य उज्ज्वल होता है। इन्ही बातों को ध्यान में रख कर विवि परिसर में ऐसे एक विद्यालय का निर्माण किया जा रहा है जिसमें छात्र कक्षा छह में यहां प्रवेश लेगें और यहां से स्नातक से लेकर परास्नातक व रिसर्च तक कर सकेंगे। उन्हें अच्छी शिक्षा के लिए यहां वहां भटकना नहीं पड़ेगा।
कई विषयों की होगी शुरुआत
विवि में बीए, बीकॉम और बीएससी बीएड विशेष शिक्षा, चार वर्षीय इंटीग्रेटेड कोर्स संचालित किया जाएगा। उनकी योजनाओं में बैरियर फ्री स्टेडियम, फूड एंड ड्रग टेस्टिंग सेंटर और बधिर विद्यार्थियों को रोजगारपरक शिक्षा व प्रशिक्षण देने के लिए डेफ कॉलेज खोला जाएगा। इसी संस्थान में मीडिया केंद्र, केंद्रीय पुस्तकालय और सेंटर यूनिकेशन और ब्रेल प्रेस की स्थापना करेंगे। सेंटर फार बिहेवीरियल एंड कॉग्नेटिव साइंसेज की स्थापना होगी, यह एसजीपीजीआई में ही है।
दिव्यांग बच्चों के लिए नि:शुल्क शिक्षा, रहना व खाना
निर्माण के बाद यहां ऐसे बच्चों की संख्या बहुत कम थी, जो शारीरिक रूप से अक्षम थे। जैसे-जैसे लोगों को इस विवि के बारे में जानकारी मिलती गई, यहां पर ऐसे छात्रों की संख्या बढ़ गई। इन छात्रों को ध्यान में रखकर विवि में आधारभूत सुविधायें बढ़ाई गईं। ऐसे बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षकों में विशेष योग्यता और पैसा दोनों बहुत जरूरी होता है। यह दोनों ही स्थिति अन्य स्कूलों में विचार करने योग्य हैं। कुछ लोग अपने बच्चों को अधिक फीस के कारण पढ़ा नहीं पाते हैं। ऐसे बच्चों के अभीभावकों को जल्द राहत मिलेगी।

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