छात्रों के लिये मुसीबत बनी सेंट्रल मेस की अधूरी बिल्डिंग

घोटाला करने वाले जिम्मेदारों को नहीं मिली सजा
सेंट्रल मेस बनने से छात्रों को मिलेगी राहत

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय में कई साल पहले कुछ भवनों के निर्माण के लिए प्रोजेक्ट तैयार किया गया था, जिसके लिLUए सरकार ने फंड भी दिया था। इन भवनों में छात्रों के लिए सेंट्रल मेस बनाने की योजना तैयार की गई थी लेकिन आज वहीं अधूरी बिल्डिंग विद्यार्थियों की मुसीबत बढ़ा रही है। हॉस्टल में आए दिन मेस में खाने को लेकर विद्यार्थियों व मेस संचालक में जंग होती है। वन डाइट वन पे की मांग विद्यार्थी कई बार कर चुके हैं मगर यहां पर विद्यार्थियों से 33 रुपये न्यूनतम लिए जाते हैं। अगर सेंट्रल मेस बनकर तैयार हो जाए तो विद्यार्थियों को काफी राहत मिल सकती है। दरअसल इसके निर्माण में धांधली की शिकायत मिलने पर काम रुकवा दिया गया था, तब से भवन का काम शुरू नहीं हुआ। अब यह बिल्डिंग जुआरियों का अड्डा बन चुकी है।
लखनऊ विश्वविद्यालय प्रशासन इन अधूरी बिल्डिंग को पूरा करवाने के लिए बीच का रास्ता निकालने की तैयारी कर रहा है। वहीं विवि प्रशासन ने परीक्षा विभाग के अधूरे भवन को अपनी सूझबूझ से पूरा भी करवाया है। मगर इनमें गड़बडिय़ों का पेच अधिक होने के कारण उसे ज्यादा मेहनत करनी पड़ रही है।

दोषियों के खिलाफ नहीं हुई कार्रवाई
विवि में कई भवनों के निर्माण कार्य जांच के लिए बीच में ही रोका गया था। उस वक्त कहा गया था कि जांच के बाद ही निर्माण कार्य शुरू होगी। लेकिन रिपोर्ट आने के बाद भी न तो भवन निर्माण का काम शुरू हुआ और न ही धांधली करने वालों के वाले दोषियों के खिलाफ ही कोई कार्रवाई की जा सकी है। करीब पांच साल से सेंट्रल मेस के साथ ही कॉमर्स विभाग में निर्माणाधीन कमरे व अन्य निर्माण कार्य जो टेक्निकल आडिट सेल, (टीएसी) जांच के कारण रोके गए थे, वह अब विवि के गले की हड्ïडी बन चुकी है।

करोड़ों का प्रोजेक्ट, काम पेपर पर
इन सभी भवन के लिए अलग-अलग बजट पास किए गए थे। सेंट्रल मेस के निर्माण में करीब पौने तीन करोड़ रुपये खर्च होने हैं। राज्य सरकार की ओर से इसके निर्माण में पहली किश्त के तौर पर 75 लाख दिए जाने थे और उसमें से दस प्रतिशत काटकर 68 लाख रुपये का भुगतान हुआ था। वहीं सूत्रों की मानें तो इस भवन के लिए जितने पैसों का भुगतान किया गया है, उसका आधा पैसा भी निर्माण में नहीं लगा है। इसको लेकर कर्मचारियों ने विरोध भी किया था। कई बार आरटीआई डालकर कर्मचारियों ने इसके जांच की प्रगति की डिटेल भी मांगी।

विद्यार्थियों को मिलेगी सहूलियत
अभी हॉस्टल में जो मेस चल रही हैं वहां आए दिन विद्यार्थियों व मेस संचालकों के बीच लड़ाई होती रहती है। विद्यार्थी भोजन की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हैं तो मेस संचालक अधिक विद्यार्थियों के जबरन खाना खिलाने का आरोप लगाते हैं। लेकिन सेंट्रल मेंस के बनने से छात्रों और मेस संचालकों के बीच का विवाद खत्म हो जाएगा। साथ ही खाने की गुणवत्ता का भी ध्यान रखा जा सकेगा। यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रहेगी। वहीं बिल्डिंग में जुआरियों की सक्रियता पर प्रॉक्टोरियल बोर्ड का कहना है कि ऐसी बिल्डिंग के आस-पास जल्द ही गार्ड तैनात किए जाएंगे। यदि अधूरे भवन में इस प्रकार का कार्य करने वाला कोई व्यक्ति मिलता है तो उन पर कार्रवाई की जाएगी।

जल्द ही होगा सुधार

इस संबंध में विवि के कार्य अधीक्षक निर्माण प्रो. जेके शर्मा का कहना है कि इस प्रकरण को पूरी गंभीरता से लिया जा रहा है। जो कुछ खामियां निर्माण में पाई गई हैं उन्हें ठीक कर आगे का निर्माण करवाने के लिए हम राज्य सरकार से अपील कर रहे हैं। प्रो.जेके शर्मा कहते हैं कि भाऊराव देवरस द्वार के पास दोनों तरफ परीक्षा विभाग के अधूरे निर्माण में जो गड़बड़ी इंगित की गई थी उन्हें ठीक करवाकर काम पूरा करवा लिया गया है। इसी तर्ज पर हम आगे उम्मीद करते हैं कि बाकी अधूरी पड़ी बिल्डिंग का निर्माण कार्य भी पूरा हो जाएगा। सेंट्रल मेस अगर बनकर तैयार हो जाती है तो यहां पर एक बार में कम से कम ढाई सौ विद्यार्थी खाना खा सकेंगे।

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