छात्राओं को ढाल बना रही प्रोवोस्ट शीला मिश्रा

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय में कैलाश हॉस्टल में सोमवार को दिन से लेकर देर रात तक जबरदस्त फिल्मी ड्रामा चला। कुलपति प्रो. एसबी निमसे ने हॉस्टल की प्रोवोस्ट प्रो.शीला मिश्र को जांच पूरी होने तक पद से हटाते हुए उनके हॉस्टल में प्रवेश को प्रतिबंधित करने के बाद भी वह गल्र्स हॉस्टल में जमी हुईं हैं। प्रोवोस्ट ने अब तक हॉस्टल खाली नहीं किया हैं। प्रोवोस्ट का कहना है कि उन्होंने अपना पूरा सामान पैक करके कार में रख लिया है और वह रविवार की रात ग्यारह बजे से अभी तक तीन बार बाहर निकलने की कोशिश कर चुकी हैं, लेकिन हॉस्टल की लड़कियां उन्हें बाहर निकलने नहीं दे रहीं। वहीं छात्राओं ने शाम को फिर से बवाल काटने की कोशिश की लेकिन मौके पर पहुंची प्रॉक्टोरियल टीम ने उन्हें किसी तरह से रोका। हॉस्टल का गेट बंद करने वाले कर्मचारियों से भी छात्राओं ने हाथापाई की।
सूत्रों की माने तो इस बीच एक छात्रा ने आरोप लगाया है कि उन्हें कुछ छात्राएं प्रोवोस्ट के पक्ष में बोलने को धमका रही हैं। इसकी लिखित शिकायत दर्ज करवा दी गई है। सूत्रों का कहना है कि जिस प्रोवोस्ट का अपनी छात्राओं पर कोई कमांड न हो उसे तो ऐसे ही अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। इनके इस ड्रामा के कारण जांच बाधित हो रही है। फिलहाल कुछ छात्राओं ने किसी तरह अपने बयान दर्ज करवाए हैं। दूसरी तरफ एक छात्रा ने आरोप लगाया कि उसे हॉस्टल में कुछ अन्य छात्राएं प्रोवोस्ट पद से हटाई गईं प्रो. शीला मिश्रा के पक्ष में खड़े होने के लिए लगातार परेशान कर रही हैं।
छात्र संगठनों ने राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन
आज समाजवादी छात्र सभा और आल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन(आइसा) के साथ अन्य संगठनों के कार्यकर्ताओं ने कैलाश छात्रावास मामले से संबंधित संयुक्त ज्ञापन राज्यपाल को सौंपा। ज्ञापन में राज्यपाल से मांग की गयी कि कैलाश छात्रावास मामले की जांच राज्यपाल खुद अपने स्तर पर एक स्वतंत्र जांच कमेटी से करवाएं ताकि निष्पक्ष जांच हो सके। साथ ही कैलाश छात्रावास के पूरे स्टाफ को बदलने, आरोपियों पर अतिशीघ्र कार्रवाई और सभी छात्रावासों के वार्डेन का कार्यकाल 6 माह या 1 वर्ष करने की भी मांग की।
दोहराया जा रहा इतिहास
2005 में शीला मिश्रा को जब मैनेजमेंट छात्रावास से मिलने वाली शिकायतों से प्रोवोस्ट पद से हटाया गया था। उस समय इन्होंने खुद ही हंगामा किया और अपने आवास में ताला लगा दिया था। जिसे मजबूरन प्रॉक्टोरियल टीम को तोडऩा पड़ा था।

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