चुनाव से पहले लगी बिहारी मतदाता को लुभाने की होड़

 नीरज कुमार दुबे
बिहार में विधानसभा चुनाव अगले महीने के शुरू में घोषित होने की संभावना है इसलिए इससे पहले कि आदर्श चुनाव आचार संहिता प्रभावी हो, सत्ता की दौड़ में लगे सभी दल मतदाताओं को लुभाने के लिए हर दांव आजमा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने बिहार के लिए भारी भरकम पैकेज की घोषणा कर राजग के पक्ष में माहौल बनाने का प्रयास किया तो नीतीश कुमार ‘बिहार गौरव’ पर जोर देकर मतदाताओं को लुभाना चाहते हैं। महागठबंधन के दलों के बीच सीट बंटवारे से नाराज राकांपा ने अलग होकर वामदलों के साथ मिलने और तीसरा विकल्प खड़ा करने का निर्णय किया है तो राजग के घटक दलों में सीट बंटवारा होना अभी बाकी है। महागठबंधन इस मायने में आगे है कि उसके यहां मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार को लेकर फिलहाल कोई विवाद नहीं है जबकि राजग खेमे के लिए यही मुद्दा सबसे बड़ा सिरदर्द बना हुआ है।

राज्य में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के पक्ष में रैलियां शुरू करने के बाद से राजनीतिक माहौल काफी गरमा गया है। प्रधानमंत्री जहां मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर हमला करने में कोई कसर बाकी नहीं रख रहे तो वहीं नीतीश कुमार प्रधानमंत्री के संबोधन के तत्काल बाद जवाबी पलटवार कर रहे हैं। यहां प्रचार कुछ कुछ दिल्ली विधानसभा चुनावों की राह पर चलता दिखाई पड़ रहा है जहां अरविंद केजरीवाल भाजपा के हर प्रहार का तत्काल सटीक जवाब देते थे। अभी का चुनावी माहौल किसके पक्ष में है, इस पर चर्चा करना बेमानी होगा लेकिन इतना तो दिख ही रहा है कि सभी दल एड़ी चोटी का जोर लगाये हुए हैं।
पिछले सप्ताह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य में एक रैली को संबोधित करते हुए बिहार के लिए केंद्र की ओर से सवा लाख करोड़ रुपए की पैकेज की घोषणा की। इसे राजग का मास्टर स्ट्रोक कहा गया तो महागठबंधन के दलों ने इसे चुनावी रिश्वत करार दिया। केंद्र की ओर से राज्य में सडक़ों का जाल बिछाने और 12 रेलवे फ्लाईओवर बनाने की योजना भी बतायी गयी है। साथ ही केंद्र ने उन आलोचनाओं को भी खारिज किया है जिनमें कहा गया है कि बिहार के लिये घोषित 1.25 लाख करोड़ रुपये का पैकेज कुछ और नहीं बल्कि मौजूदा योजनाओं की ही फिर से पैकेजिंग है। केंद्र सरकार ने जोर देकर कहा कि पैकेज और कार्यों की विस्तृत सूची पूरी तरह स्पष्ट है। ‘प्रत्येक तत्व और लागत को चिन्हित किया गया है।’ भाजपा की ओर से कहा गया है कि इस पैकेज से बिहार के तीन लोगों- नीतीश कुमार, लालू प्रसाद और केसी त्यागी को ही नाखुशी है जबकि समूची जनता इसे लेकर खुश है।
इसके जवाब में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा है भाजपा जुमला पार्टी है जोकि झूठ बोलती है। उन्होंने कहा कि भाजपा नेता झूठे झूठे वादे करके कोरा आश्वासन देकर बिहार की जनता को गुमराह कर रहे हैं। नीतीश ने आरोप लगाया कि देश के प्रधानमंत्री सरकारी मंच से विशेष पैकेज की घोषणा करते हैं, बोली लगाते हैं, वो बिहार के स्वाभिमान को ठेस पहुंचाने का काम कर रहे हैं। महागठबंधन में शामिल राजद नेता लालू प्रसाद ने भी पैकेज की घोषणा को छलावा बताया है तो कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा है कि पहले प्रधानमंत्री ने ‘वन रैंक वन पेंशन’ के मुद्दे पर पूर्व सैनिकों से झूठा वादा किया और अब बिहार में लोगों को गुमराह कर रहे हैं।
नीतीश जनता को लुभाने के लिए ‘बिहार गौरव’ का मुद्दा उठा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्री के राजनीतिक डीएनए पर कथित टिप्पणी की तो नीतीश कुमार ने ‘शब्द वापसी’ अभियान छेड़ दिया और राज्य के पचास लाख लोगों का डीएनए टेस्ट करवाने के लिए नमूने एकत्र कर दिल्ली भेजने का काम शुरू किया। ‘बिहार गौरव’ अभियान बिलकुल नरेंद्र मोदी के ‘गुजरात गौरव’ अभियान की तर्ज पर छेड़ा गया है। इस अभियान को शुरू में तो अच्छा प्रतिसाद मिला लेकिन फिलहाल यदि यह लक्षित आंकड़े को छू ले तो बड़ी बात होगी। नीतीश ने साथ ही राज्य की आधी आबादी को लुभाने के लिए अगली बार सरकार बनने पर पूर्ण शराबबंदी लागू करने की बात भी कही है लेकिन वह यह बात भूल गये कि यह उनकी ही सरकार थी जिसने आबकारी नीति में बदलाव कर राज्य में शराब की दुकानों की संख्या बढ़ा दी।
यकीनन मुख्यमंत्री उम्मीदवार के रूप में नीतीश कुमार फिलहाल सब पर भारी हैं लेकिन उनका राजद के साथ उनका गठबंधन ज्यादातर लोगों को रास नहीं आ रहा है क्योंकि वह राजद के कथित जंगल राज की खिलाफत करते करते ही मुख्यमंत्री पद की कुर्सी तक पहुंचे थे। हालांकि विधानसभा उपचुनाव परिणाम दर्शाते हैं कि महागठबंधन दलों को भारी विजय मिली थी। दूसरी ओर, राजग के बारे में माना जा रहा है कि चुनाव बिना मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किये लड़े जाएंगे क्योंकि भाजपा में ही आधा दर्जन से ज्यादा नाम मुख्यमंत्री पद की दौड़ में हैं। फिलहाल भाजपा के पक्ष में यह बात है कि पार्टी नेताओं खासकर गिरिराज सिंह की ओर से विवादित बयान नहीं आ रहे हैं। सांसद शत्रुघ्न सिन्हा की ओर से जो बयान आ रहे हैं वह पार्टी का कम और उनका खुद का नुकसान ज्यादा करा रहे हैं। राजग के पक्ष में एक बात यह भी है कि भाजपा के साथ लोजपा, रालोसपा और जीतन राम मांझी की पार्टी मजबूती से खड़ी नजर आ रही हैं। और यदि सीट बंटवारे में इनके हाथ कुछ कम भी लगा तो ज्यादा बवाल नहीं होगा क्योंकि सहयोगी दल अभी भी पूरी तरह भाजपा पर ही निर्भर हैं। जबकि महागठबंधन में राकांपा अलग हो गयी है और वामदलों तथा पप्पू यादव की पार्टी के साथ नया मोर्चा बनाने की तैयारी में है।

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