चुनाव से पहले कई बार मरेगा अखलाक

इस बात का जवाब किसी के पास नहीं है कि अगर घर में बीफ मिला भी था तो क्या किसी को इस बात की इजाजत दी जा सकती है कि मंदिर के लाउडस्पीकर से उस व्यक्ति की हत्या का आवाह्न किया जाय। भीड़ इकट्ठी की जाए और बेरहमी से उस व्यक्ति का कत्ल कर दिया जाए, मगर उन्मादी लोग इस हत्या को भी जायज ठहराने में लगे हुए हैं।

sanjay sharma editor5चुनाव में कुछ महीने बचे हैं। नेता अपने रंग में आ गए। हमने कई बार पहले ही लिखा था कि चुनाव से पहले साजिशों के जाल बिछाए जायेंगे। राजनीति के चुनाव की शतरंज पर आम आदमी की जिन्दगी की बोली लगेगी। नकारा राजनेता धर्म और जाति का घिनौना कार्ड खेलेंगे। पांच सालों में देश और प्रदेश की सरकारों ने आपको क्या दिया इससे वास्ता नहीं रहेगा। सामने रहेगा तो सिर्फ और सिर्फ धर्म का जुनून और घिनौनी सियासत के चलते मरते बेगुनाह लोग। दादरी के अखलाक की मौत के बहाने एक बार फिर इस घिनौनी राजनीति की शुरुआत हो चुकी है। चुनाव तक यह सिलसिला और तेज होगा और हम सब बेबस देखते रहेंगे लाशों के इस कारोबार को।
फॅारेंसिक जांच की रिपोर्ट में आया कि दादरी के बिसाहड़ा गांव में मिला मांस का टुकड़ा बीफ का था। मतलब गाय या बछड़ा का था। यह खबर आते ही धर्म का कारोबार करने वालो की बांछे खिल गई। भगवा कपड़े पहने सांसद योगी तुरंत अपनी फॉम में आए और अखलाक के परिजनों को मिली सहायता राशि वापस लेने की मांग करते हुए मीडिया पर भी हमला बोला। सोशल मीडिया पर भी खुद को हिन्दुओं का ठेकेदार साबित करने वालो की बाढ़ आ गई।
इस बात का जवाब किसी के पास नहीं है कि अगर घर में बीफ मिला भी था तो क्या किसी को इस बात की इजाजत दी जा सकती है कि मंदिर के लाउडस्पीकर से उस व्यक्ति की हत्या का आवाह्नï किया जाय। भीड़ इकट्ठी की जाए और बेरहमी से उस व्यक्ति का कत्ल कर दिया जाए, मगर उन्मादी लोग इस हत्या को भी जायज ठहराने में लगे हुए हैं।
यह पहला मौका नहीं है। बिहार चुनाव से पहले गाय के नाम पर इसी तरह का खेल करने की कोशिश की गई। कभी मंदिर के नाम पर तो कभी गाय के नाम पर कारोबार करना कुछ लोगों को बेहद भाता है। वह जानते हैं कि देश के कुछ लोग धर्म के नाम पर सब कुछ कुर्बान करने को तैयार रहते हैं। चुनाव से पहले वोटों की फसल ऐसे ही काटी जाती है। नेताओं को धर्म से अच्छा मुद्दा कोई दूसरा नहीं लगता।
उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव से पहले ऐसे कई खेल खेले जायेंगे। राजनेता बड़ी सफाई से धर्म के नाम पर हमारी और आपकी बलि चढ़ाएंगे। हमे और आपको ऐसे चेहरों को ध्यान में रखना है बल्कि अब जरुरत ऐसे लोगों को उनकी औकात बताने की है, जिससे वह हमारे सामाजिक ताने-बाने को खत्म न कर सकें।

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