चुनाव की तैयारी में जुटी बीएसपी

पंचायत चुनाव के माध्यम से संगठन की कमियां ढूंढने की बनायी रणनीति
ग्रामीण क्षेत्रों में दलितों को आकर्षित करने के लिये जुटे कार्यकर्ता

प्रीति सिंह
Captureलखनऊ। बीते लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद आगामी उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव को फतह कर सत्ता में वापसी के लिए बहुजन समाज पार्टी अभी से चुनावी तैयारियों में जुट गयी है। पार्टी सुप्रीमों मायावती संगठन के कील कांटे दुरूस्त करने में लगी हुई हैं। इसी क्रम में सितम्बर अक्टूबर में होने वाले पंचायत चुनाव में पंचायत अध्यक्ष पद का चुनाव, बसपा चुनाव चिन्ह पर लडऩे का भी फैसला लिया गया है। इसके पीछे मकसद यह है कि विधान सभा चुनाव के मद्देनजर संगठन में रह गई खामियां उजागर हों ताकि विधान सभा चुनाव के पूर्व उसे ठीक किया जा सके।
लोकसभा चुनाव के बाद दूसरे राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में भी मिली हार के बाद बीएसपी का फोकस अब 2017 में होने वाले यूपी के विधानसभा चुनाव पर है। 2017 के लिए बीएसपी प्रमुख मायावती ने अभी से ही कील कांटे दुरुस्त करना शुरू कर दिया है। काडर वोट को सहेजने के लिए गावों में बाकायदा दलितों के लिए स्कूली बच्चों की तरह क्लास लगाई जा रही है, जिसमें उन्हें बीएसपी मूवमेंट से जुड़ी जानकारियां और मायावती की पिछली सरकार में दलितों के हित में किए गए कार्यों के बारे में बताया जा रहा है। विधानसभा प्रभारी बनाने का मामला हो, चाहे बूथ स्तर तक कमेटी बनाने का, बीएसपी अभी से ही चुनाव के लिए जमीन तैयार करने में जुट गई है। बीएसपी ने आगामी विधानसभा चुनाव में बीजेपी की सक्रियता को देखते हुए रणनीति में थोड़ा परिवर्तन किया है। पार्टी के एक कोआर्डिनेटर कहते हैं कि खिचड़ी भोज जैसे आयोजन बीजेपी दलितों के बीच में पहले भी करती रही है। बीजेपी ही नहीं कांग्रेस ने भी दलितों को अपने पाले में लाने के लिए पहले कई जतन किए थे लेकिन कोई सफलता उसे नहीं मिली थी। बीएसपी में जिनके जिम्मे काडर वोट सहेजने का जिम्मा है, वह इस तरह की बातें भले ही कर रहे हों लेकिन दलितों व सवर्णों को संभाल कर रखना पार्टी के लिए चुनौती साबित हो रही है। काडर को सहेजने के लिए मायावती ने इस बार बूथ स्तर को मजबूत करने का निर्देश दिया है।
मायावती जुलाई से चलाएंगी अभियान

जून के अंत तक बूथ स्तर का काम पूरा होने के बाद जुलाई से पंचायत चुनाव के लिए मायावती पूरे प्रदेश में अभियान चलाएंगी। पार्टी के जानकार बताते हैं कि जुलाई के पहले हफ्ते में मायावती पार्टी व संगठन के लोगों की बैठक कर पंचायत चुनाव की रणनीति तैयार करेंगी। अप्रैल में हुई बैठक में मायावती ने साफ कर दिया है कि पंचायत चुनाव में भी युवाओं को वरीयता दी जाएगी। पंचायत की तैयारियों को देखते हुए पार्टी निष्क्रिय कार्यकर्ताओं व नेताओं को 30 जून तक पार्टी से बाहर करने का काम करेगी। निष्क्रिय कार्यकर्ताओं व नेताओं के बदले युवाओं व सक्रिय लोगों को शामिल किया जाएगा। पार्टी पंचायत चुनाव पूरे दमखम से लड़ेगी। इसके लिए पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती की ओर से निर्देश मिल चुका है। जून तक संगठन का काम होगा। उसके बाद पंचायत चुनाव की पूरी रणनीति तैयार की जाएगी।
राम अचल राजभरप्रदेश अध्यक्ष, बीएसपी

पंचायत चुनाव में उतरेगा हाथी

पंचायत चुनाव से पहले बीएसपी अपने बूथ स्तर को मजबूत करना चाहती है। बीएसपी नेताओं का मानना है कि अगर बूथ स्तर पर काम मजबूत होगा तो इसका फायदा विधानसभा चुनाव में भी पार्टी को मिलेगा। पार्टी के नेताओं का कहना है कि अधिकतर जिलों में बूथ स्तर का काम लगभग पूरा हो गया है। जिन जिलों में बूथ स्तर पर कमिटियां बनाने का काम बाकी है, वहां जून के अंत तक काम पूरा कर लिया जाएगा। इसी साल सितंबर अक्टूबर में होने वाले पंचायत चुनाव में जिला पंचायत अध्यक्षों को बीएसपी अपने सिंबल पर लड़ाएगी। वहीं बाकी पदों के प्रत्याशियों का समर्थन करेगी। पार्टी के जानकार बताते हैं कि बीएसपी के लिए पंचायत चुनाव विधानसभा चुनाव का रिहर्सल होगा। बीएसपी पंचायत चुनाव के बहाने अपनी विधानसभा चुनाव की तैयारियों का आंकलन भी करना चाहती है। संगठन के स्तर पर पंचायत चुनाव को लेकर तैयारियों का दौर भी गांवों में शुरू हो गया है।

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