चुनाव आयोग ने सपा नेताओं से कहा दिखाओ सबूत, किसके पास कितना समर्थन

आयोग को सबूत देने के लिए सपा मुखिया मुलायम सिंह शिवपाल यादव के साथ दिल्ली रवाना
सांसदों और विधायकों के हस्ताक्षर और शपथ पत्र सहित अखिलेश की टीम भी जाएगी दिल्ली
आयोग ने अखिलेश और मुलायम खेमे से 9 जनवरी तक विधायकों-सांसदों के समर्थन का मांगा हलफनामा

5-jan-page1-final14पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों में चुनाव की तारीखों का ऐलान हो चुका है लेकिन सपा में चल रहा घमासान थमता नहीं दिख रहा है। पार्टी और चुनाव चिन्ह को लेकर चुनाव आयोग में मुलायम सिंह यादव और मुख्यमंत्री अखिलेश ने अपना-अपना दावा किया है। आयोग ने दोनों पक्षों से विधायकों-सांसदों के समर्थन का हलफनामा पेश करने को कहा है। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि कोई भी पीछे हटने को तैयार नहीं है। मुलायम सिंह यादव, शिवपाल के साथ चुनाव आयोग में हलफनामा दाखिल करने दिल्ली रवाना हो गए हैं। वहीं, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का खेमा भी आयोग में हलफनामा पेश करने की तैयारी में है।
चुनाव आयोग ने जारी अपने पत्र में मुलायम सिंह यादव और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से पूछा है कि वे बताएं कि कितने विधायक, कितने एमएलसी और कितने एमपी का समर्थन उन्हें हासिल है। आयोग ने इस मामले में दोनों पक्षों से 9 जनवरी तक जवाब मांगा है। इसके अलावा आयोग ने दोनों पक्षों को एक दूसरे के वो दस्तावेज भी भेजे हैं जो उन्होंने आयोग को दिए थे। गौरतलब है कि पिछले दिनों दोनों खेमों ने चुनाव आयोग से मुलाकात कर ‘साइकिल’ चुनाव निशान पर दावा किया था। मुलायम सिंह , शिवपाल यादव, अमर सिंह और जया प्रदा के साथ आयोग पहुंचे थे। वहीं अखिलेश की ओर से रामगोपाल यादव ने चुनाव आयोग के सामने अपना पक्ष पेश किया था। रामगोपाल का दावा है कि अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली पार्टी ही असली सपा है और 90 फीसदी विधायक उनके साथ हैं। चूंकि विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो चुका है। ऐसे में आयोग इस मसले को जल्द सुलझाना चाहता है। हालांकि दोनों पक्षों के दावे की जांच में आयोग को कई महीने लग सकते हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद नरेश अग्रवाल ने कहा कि अखिलेश की यादव के नेतृत्व में ही असली समाजवादी पार्टी है। चुनाव आयोग अखिलेश की सपा को ही सिंबल सौंपेगा। 90 प्रतिशत नेता हमारे साथ हैं, हम सभी कानूनी प्रक्रिया को पूरा कर रहे हैं। यूपी में समाजवादी पार्टी में सुलह की तमाम कोशिशें नाकाम होती दिख रही हैं। मुलायम सिंह यादव और वरिष्ठ नेता आजम खान के बीच बुधवार को करीब पांच घंटे तक चली बातचीत के बाद कोई बात नहीं बनी।

अखिलेश ने बुलाई विधायकों की मीटिंग
चुनाव तारीखों का ऐलान होते ही मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने चुनाव मैदान में उतरने की तैयारियां शुरू कर दी हैं। सपा में जारी घमासान के बीच आज मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने आवास पांच केडी पर पार्टी विधायकों की बैठक बुलाई। बैठक में चुनाव रणनीति पर चर्चा की गई। सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री ने चुनाव के दौरान जनता के बीच कैसे बेहतर काम किया जाए, इस पर मंथन किया। माना जा रहा है कि अखिलेश विधायकों से समर्थन पत्र पर हस्ताक्षर करवा सकते हैं। इस बैठक में 200 से अधिक विधायक और मंत्री पहुंचे हैं। अखिलेश की टीम भी दिल्ली जाने की तैयारी में हैं। बताया जा रहा है कि यह टीम चुनाव आयोग को विधायकों, सांसदों के हस्ताक्षर की सूची सौंपेगी। समर्थक अब इस पर जोर दे रहे हैं कि सीएम सुलह का इंतजार किए बगैर अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर दें।

विपक्ष ने आयोग से कहा, रोकें सरकार को बजट पेश करने से

केन्द्र सरकार पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव से पूर्व पेश करना चाहती है आम बजट

नई दिल्ली। भारत के पांच राज्यों में होने वाले चुनावों की तारीखों की घोषणा के ठीक एक दिन बाद विपक्षी पार्टियां एकजुट होकर चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाने पहुंच गई हैं। ऐसा करने के पीछे की वजह केन्द्र सरकार का 1 फरवरी को पेश होने वाला बजट है, जो कि चुनाव से ठीक पहले पेश करने की तैयारी है। इसलिए विपक्षी पार्टियां चाहती हैं कि यह तारीख आगे सरका दी जाए। ऐसे में आज सुबह कांग्रेस, तृणमूल, समाजवादी पार्टी, बसपा, जनता दल युनाइटेड और लालू यादव की पार्टी आरजेडी के नेताओं ने चुनाव आयोग पहुंचकर अपनी मांग रखी है। तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन ने ट्वीट करके मुलाकात का मुद्दा बताया है, जिसमें लिखा है कि बजट की तारीख मतदान के काफी करीब है। इसलिए तारीख में परिवर्तन किया जाना चाहिए। 

निर्वाचन आयोग की घोषणा के मुताबिक 4 फरवरी से यूपी, पंजाब, गोवा, उत्तराखंड और मणिपुर में चुनाव होने हैं। मतदान के नतीजे 11 मार्च को घोषित किए जाएंगे जबकि केन्द्र सरकार 1 फरवरी को बजट पेश करने जा रही है। विपक्ष का कहना है कि बजट को चुनावी परिणामों के बाद पेश किया जाना चाहिए और अगर ऐसा पहले किया गया तो सरकार आसानी से लोक-लुभावन घोषणाओं से मतदाताओं को अपनी ओर खींच सकती है जबकि चुनाव आयोग के प्रमुख नसीम जैदी ने बुधवार को ही प्रेस कांफ्रेंस में स्पष्ट कर दिया था कि सरकार को चुनाव से पहले बजट पेश करने के लिए रोका जाएगा। 2012 में जब इन्हीं राज्यों में चुनाव हुए थे, तब भी फरवरी में पेश होने वाला बजट, मार्च के मध्य में मतदान पूरा होने के बाद साझा किया गया था। इसलिए आम बजट पेश होने की तिथि को लेकर सरकार और विपक्ष आमने-सामने है। कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने कहा कि चुनाव आयोग यह देखता है कि ऐसी कोई परिस्थिति पैदा न हो जिससे निष्पक्ष चुनाव का आयोजन विफल हो जाए। हालांकि बीजेपी का कहना है कि बजट की तारीख को आगे बढ़ाने की कोई वजह नहीं है, क्योंकि हर साल, कोई न कोई चुनाव जरूर होता है। वित्तमंत्री अरुण जेटली ने बुधवार को कहा था कि 2014 में भी बजट चुनाव से पहले ही पेश किया गया था। वहीं सपा के नरेश अग्रवाल ने कहा कि हम राष्ट्रपति से मिलने जा रहे हैं, हम मांग करेंगे कि चुनाव की तारीखों का ऐलान हो चुका है, लिहाजा इस दौरान बजट पेश न किया जाये। यह मतदान को प्रभावित कर सकता है।

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