चुनावी शिकस्त

सपा हो या बसपा, भाजपा हो या कांग्रेस, सभी राजनीतिक पार्टियों के दिग्गजों के क्षेत्र में उनके प्रत्याशी कुछ खास नहीं कर पाए। आलम यह है कि अमेठी और रायबरेली में कांग्रेस समर्थित प्रत्याशियों को बुरी तरह हार का मुंह देखना पड़ा।

sanjay sharma editor5उत्तर प्रदेश में जिला पंचायत व क्षेत्र पंचायत सदस्यों के चुनाव के नतीजे चौकाने वाले रहे हैं। जिला पंचायत व क्षेत्र पंचायत सदस्यों के चुनाव ने प्रदेश के सभी राजनीतिक दलों को आईना दिखाया है। विधानसभा के 2017 में होने वाले चुनाव के लिए सभी राजनीतिक दलों ने इस पंचायत चुनाव को ‘सेमी फाइनल’ की तरह लड़ा था। इस चुनाव में पूरी तैयारी से सभी दल उतरे थे। बस, फर्क यह रहा कि भाजपा सहित कई दलों ने अपने प्रत्याशी घोषित किए थे तो सपा, बसपा ने प्रत्याशियों को समर्थन दिया था। सभी दलों ने खूब प्रचार भी किया था, लेकिन चुनावी नतीजों ने सपा, बसपा, भाजपा और कांग्रेस के दिग्गजों की प्रतिष्ठा धूल में मिला दी। जिनके प्रत्याशी विजयी हुए उनकी इज्ज्त बच गई और जिनके हार गए वह क्या बोलें समझ में नहीं आ रहा। चुनावी नतीजों में सबसे रोचक यह दिखा कि बड़े-बड़े दिग्गजों के प्रत्याशियों को हार मिली। भले ही यह हार प्रत्याशी की हो लेकिन जिनके नाम के सहारे वह चुनाव मैदान में थे, प्रतिष्ठïा उनकी धूमिल हुई है।
सपा हो या बसपा, भाजपा हो या कांग्रेस, सभी राजनीतिक पार्टियों के दिग्गजों के क्षेत्र में उनके प्रत्याशी कुछ खास नहीं कर पाए। आलम यह है कि अमेठी और रायबरेली में कांग्रेस समर्थित प्रत्याशियों को बुरी तरह हार का मुंह देखना पड़ा। सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी के कई मौजूदा मंत्रियों के रिश्तेदारों को भी करारी हार का सामना करना पड़ा जबकि सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव के निर्वाचन क्षेत्र आजमगढ़ में ओवैसी की पार्टी ने खाता खोल लिया है। यह सपा के लिए खतरे की घंटी है, क्योंकि यूपी में वह सपा के मुस्लिम वोट बैंक पर निगाह गड़ाए है।
इस चुनाव में सबसे ज्यादा नुकसान भाजपा को हुआ है। पंचायत चुनाव लडऩे का फैसला भाजपा के लिए ठीक नहीं रहा। जिस उम्मीद और उत्साह के साथ भाजपा कार्यकर्ता और वरिष्ठï नेता चुनाव की तैयारी में लगे थे, उन्हें इसकी कतई उम्मीद नहीं थी। निश्चित ही आने वाले समय में पार्टी इस पर मंथन जरूर करेगी कि आखिर पासा कैसे पलट गया। फिर एक चर्चा जरूर होगी कि क्या मोदी का जादू खत्म हो गया? चर्चा होना जरूरी भी है क्योंकि प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में बीजेपी को तगड़ा झटका लगा है। यहां बीजेपी समर्थित सिर्फ 8 प्रत्याशी ही विजयी हुए हैं। और तो और पीएम मोदी के गोद लिए गांव जयापुर में ही बीजेपी समर्थित जिला पंचायत सदस्य का प्रत्याशी तक चुनाव हार गया। इसके अलावा भाजपा के कई दिग्गज नेताओं के निर्वाचन क्षेत्रों में पार्टी ढेर हो गयी है। आगरा, कानपुर, वाराणसी, इलाहाबाद, लखनऊ, मेरठ, मुरादाबाद, बरेली सहित तमाम गढ़ों में भाजपा के प्रत्याशी चुनाव हार गए हैं। खामोशी से चुनाव लड़ी बसपा के प्रत्याशी कई जिलों में जीते हैं। इस चुनाव ने नेताओं को आइना दिखाया है कि सिर्फ जुबानी बयानबाजी से वोट नहीं मिलते, वोट काम करने पर मिलते हैं।

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