चीफ सेक्रेटरी ने पीएमओ के अफसरों से कहा तुरन्त दिलवाएं यूपी का पैसा

  • पीएम के प्रमुख सचिव नृपेन्द्र मिश्रा को सौंपी बुकलेट, जिसमें यूपी के सीएम और सरकार की तरफ से लिखे खतों में कहा गया था कि यूपी का 18 हजार करोड़ बकाया दिलवाया जा
  • आज स्वच्छता अभियान की बैठक में प्रमुख सचिवों के साथ गए अफसरों को बैठक से निकाला, मुख्य सचिव ने कहा क्या खुद नहीं है जानकारी जो साथ लेकर आते हैं अधीनस्थ

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
001लखनऊ। यूपी के तेज तर्रार मुख्य सचिव दीपक सिंघल ने इस बार साक्ष्यों के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रमुख सचिव नृपेन्द्र मिश्रा और कैबिनट सचिव पीके सिन्हा से मुलाकात करके एक बुकलेट सौंप कर मांग की है कि यूपी के हिस्से का 18 हजार करोड़ रुपया यूपी को दिलवाया जाए। मौजूदा परिस्थितियों में जब मुख्य सचिव ने यह सारे खत पीएमओ को सौंप दिए तो अब पीएमओ पर भी दबाव बढ़ गया है कि वह यूपी के हिस्से का 18 हजार करोड़ रुपया यूपी को दिलवाएं। मुख्य सचिव के इस कदम से अगर यूपी को उसके हिस्से का पैसा मिल गया तो सरकार के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि होगी।
दीपक सिंघल को अभी मुख्य सचिव बने एक महीना ही हुआ है, मगर उन्होंने इस एक महीने में ही केन्द्र पर यूपी का हिस्सा देने का दबाव बढ़ा दिया है। पीएमओ के अफसरों से मिलकर दीपक सिंघल ने विश्वास व्यक्त किया कि केन्द्र यूपी की 28 योजनाओं के 18 हजार करोड़ रुपये जल्दी ही जारी कर देगा। उन्होंने कहा कि यूपी ने कई योजनाओं पर केन्द्र के हिस्से की राशि भी खर्च कर दी है। श्री सिंघल ने छोटी हवाई यात्राओं को शुरू करने के लिए उड्डयन विभाग के अफसरों से भी मुलाकात कर यूपी के बड़े शहरों में हवाई यात्रा शुरू करने के लिए अनुरोध किया।
उधर आज सुबह मुख्य सचिव ने योजना भवन में स्वच्छ भारत मिशन के तहत समस्त कमिश्नर, नगर आयुक्त और विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्षों के साथ बैठक की। बैठक में श्री सिंघल विभिन्न शहरों में सफाई न किए जाने से बेहद नाराज दिखाई दिए। श्री सिंघल ने प्रदेश के सभी मंडलायुक्त और जिलाधिकारियों को निर्देशित किया कि एक महीने के अंदर सफाई के साथ नजर आने चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इस काम में अफसरों ने लापरवाही बरती तो उन्हें इसके गंभीर नतीजे भुगतने होंगे। अधिकारियों को अपनी मानसिकता बदलनी होगी। विकास कार्य को प्राथमिकता देनी होगी और जनता की समस्यााअें को दूर करना होगा, जो अफसर काम में लापरवाही बरतेंगे, उन्हें इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे।

राज्य कर्मचारियों की हड़ताल, सरकारी विभागों से लेकर अस्पतालों तक में सन्नाटा

  • हजरतगंज में लगातार तीसरे दिन भी हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर हुए इकठ्ठा 
  • धारा 144 लागू होने के बावजूद प्रदर्शनकारियों को गंज पहुंचने से नहीं रोक पा रहा प्रशासन
  • प्रशासन की लापरवाही का खामियाजा भुगतने को मजबूर आम जनता व स्कूली बच्चे

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद एकीकृत और उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के बैनल तले राज्य कर्मचारी और टीचर अपनी आठ सूत्रीय मांगों को लेकर तीन दिन की महाहड़ताल पर हैं। इसमें 250 कर्मचारी और शिक्षक संगठनों के करीब 16 लाख से अधिक कर्मचारी शामिल हैं। साथ ही 40 हजार सफाई कर्मचारियों की भर्ती में आरक्षण का विरोध कर रहे हैं। यूपी के सफाई कर्मचारी विधानसभा पर डेरा डाले हुए हैं। उनकी कोशिश सीएम हाउस का घेराव करने की हैं। जबकि हजारों की संख्या में जुटे प्रदर्शनकारियों की वजह से गंज में भीषण जाम लगा है। राहगीरों को जाम की समस्या से दो-चार होना पड़ रहा है। वहीं महाहड़ताल से करीब 400 करोड़ का नुकसान होने की आश्ंाका जताई गई है।
हजरतगंज इलाके में राज्यकर्मचारियों की हड़ताल, होमगार्ड्स के प्रदर्शन और बीएसएनएल कर्मचारियों के मार्च की वजह से भीषण जाम लगा हुआ है। जबकि हजरतगंज में धरना, प्रदर्शन, जुलूस, जनसभा और रैली पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसके बावजूद हजारों की संख्या में राज्य कर्मचारियों की भीड़ जीपीओ और विधानसभा पर इकट्ठा हो गई है। इसके अलावा हजारों की संख्या में होमगार्ड्स तीन दिन से जीपीओ पार्क में डेरा डाले हुए हैं। इस कारण राजधानी की ट्रैफिक व्यवस्था, सफाई-व्यवस्था और अन्य सारी व्यवस्थाएं बुरी तरह चरमरा गई हैं। पुलिस और प्रशासन के अधिकारी लाख कोशिशों के बावजूद हजरतगंज पहुंचने वाली भीड़ को नियंत्रित नहीं कर पा रहे हैं।
चिकित्सा व्यवस्था बुरी तरह चरमराई
राजधानी के सरकारी अस्पतालों में चिकित्सा व्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई है। वायरल बुखार और डेंगू के प्रकोप की वजह से मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसे में राज्य कर्मचारियों की हड़ताल में शामिल सरकारी अस्पताल के पैरामेडिकल स्टाफ की वजह से मरीजों की जान पर आफत बन आई है। डॉ. राम मनोहर लोहिया संयुक्त चिकित्सालय से लेकर बलरामपुर अस्पताल व सिविल अस्पताल में मरीज चिकित्सकीय कर्मचारियों के कार्यबहिष्कार के चलते धक्के खाने को मजबूर हैं। इन सरकारी अस्पतालों मे सुबह 8 बजे इलाज के लिए पहुंचे मरीजों को न दवायें मिली और न खून की जांच ही हो पायी। इस दौरान अस्पताल कर्मचारियों का तीन घंटे का कार्यबहिष्कार पूरे दिन का कार्यबहिष्कार साबित हुआ। सबसे ज्यादा समस्या खून की जांच कराने आये मरीजों को हुयी। बताते चलें कि डॉ. राम मनोहर लोहिया संयुक्त चिकित्सालय में खून की जांच के लिए 11 बजे तक ही रजिस्ट्रेशन किया जाता है। रजिस्टे्रशन के बगैर खून की जांच नहीं की जाती है। जबकि आज न तो किसी मरीज का रजिस्ट्रेशन हुआ और न ही खून की जांच। इस दौरान 40 से ज्यादा मरीजों को वैगर जांच लौटना पड़ा। इन्दिरा नगर निवासी अनुराधा सिंह खून की जांच कराने आज सुबह 10 बजे लोहिया अस्पताल पहुंची। तब उनको पता चला कि कर्मचारी हड़ताल पर हैं। खून की जांच आज नहीं हो पायेगी।

वार्डों में भर्ती मरीजों के लिए आफत
डॉ. राम मनोहर लोहिया संयुक्त चिकित्सालय के पुरुष वार्ड में भर्ती मरीजों के तीमारदारों को ग्लूकोज बदलने के लिए नर्सों की मनौव्वल करनी पड़ी। इसके बाद भी वहां मौजूद नर्सों का दिल नहीं पसीजा। उन्होंने आज हड़ताल बताकर काम करने से मना कर दिया। वहीं महिला वार्ड में भी स्थिति पुरुष वार्ड जैसी ही बनी हुयी थी।
अनदेखी कर रही सरकार

फार्मेसी काउंसिल के अध्यक्ष सुनील यादव ने बताया कि आज मरीजों के हितों को ध्यान में रखते हुए सांकेतिक हड़ताल कर रहे हैं। यदि हमारी मांगें नहीं मानी गयीं तो शुक्रवार को पूर्ण रूप से कार्य बहिष्कार करेंगे। वहीं लैब टेक्नीशियन एसोसिएशन के प्रवक्ता सुनील कुमार ने बताया कि प्रदेश सरकार वेतन विसंगति, प्रोन्नति समेत दूसरी मांगों को लगातार अनदेखा कर रही है। इसके लिए दर्जनों बार शासन प्रशासन के सामने कर्मचारियों ने अपनी समस्या रखी लेकिन सुनवाई न होने पर हमने यह कदम उठाया है।

250 संगठनों का समर्थन, 10 लाख कर्मचारी हड़ताल पर

राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रदेश अध्यक्ष हरि किशोर तिवारी के मुताबिक महाहड़ताल को प्रदेश के करीब 250 कर्मचारी और शिक्षक संगठनों का समर्थन है। इस हड़ताल में 16 लाख से अधिक कर्मचारियों के शामिल होने की उम्मीद है। इस हड़ताल और प्रदर्शन में प्रदेश भर से लोग इकट्ठा हो रहे हैं। वहीं उत्तर प्रदेश सफाई कर्मचारी संघ के नेता जगदीश बाल्मीकि ने बताया कि प्रदेश में करीब 65 हजार सफाई कर्मचारी हैं। वह भी विरोध प्रदर्शन में शामिल हैं। ये कर्मचारी सुबह दस बजे से ही नगर निगम कार्यालय के सामने इकट्ठा हैं।

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