चीफ सेके्रटरी ने दिए ऑपरेशन थियेटर बनाने में हुई धांधलियों की जांच के आदेशड्ढ

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खुलनी शुरू हुई निर्माण निगम के एमडी गोयल के भ्रष्टïाचार की कहानी

डी कुमार कंपनी को आपरेशन थियेटर बनाने का दिया गया काम

 संजय शर्मा
लखनऊ। आखिर निर्माण निगम के भ्रष्टïाचार की परते खुलने का समय आ ही गया। निर्माण निगम ने मरीजों के इलाज के लिए बनाए जा रहे ऑपरेशन थियेटरों के निर्माण में भारी गोलमाल करके इसकी गुणवत्ता में समझौता किया था। इससे हजारों मरीजों की जान को खतरा हो सकता था। इस संबंध में 4 पीएम ने विस्तार से खबर छापी थी। मुख्य सचिव ने इसका संज्ञान लेते हुए प्रमुख सचिव लोक निर्माण को इसकी जांच के आदेश दे दिए हैं। अगर यह जांच ईमानदारी से हो गई तो आरके गोयल को अपनी कुर्सी और अपनी बेशुमार दौलत बचाने में पसीने आ जायेंगे।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की इच्छा थी कि प्रदेशवासियों को अच्छे इलाज के लिए जर्मन तकनीकी के ऑपरेशन थियेटर बनाकर दिए जाए, जिससे मरीजों की जान को खतरा न हो सके। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को कड़े शब्दों में चेतावनी दी थी कि ये कार्य जल्दी पूरा हो और निर्माण कार्य में गुणवत्ता बनाई रखी जाए। सीएम की इच्छा थी कि इस तरह के मार्डन ऑपरेशन थियेटर बनने से मरीजों को राहत मिलेगी और उन्हें अपने इलाज के लिए दर-दर नहीं भटकना पड़ेगा।
मगर भ्रष्टïाचार की नई-नई गाथाएं लिखने में माहिर निर्माण निगम के एमडी आरके गोयल ने मुख्यमंत्री के सपनों को भी धता बता दी। आरके गोयल चाहते थे कि ये काम उनके चहेते डी कुमार को मिल जाए। मगर देश की जानी-मानी कंपनियां भी इस ऑपरेशन थियेटर को बनाना चाहती थी। दिल्ली से आए कई प्रतिष्ठिïत कंपनियों ने भी इच्छा जाहिर की, कि यह काम उनको मिल जाए। एक प्रतिष्ठिïति फर्म पेस इंस्टॉलेशन प्रा.लि. के लोगो को भी बाहर कर दिया गया, जबकि इस फर्म की छवि काफी अच्छी है।
दरअसल आरके गोयल हर हालत में यह काम डी कुमार या उनके परिजनों को ही देना चाहते थे। दरअसल 125 करोड़ के इस काम में 40 परसेंट का कमीशन अर्थात लगभग 50 करोड़ रुपये तभी मिल सकते थे जब किसी ऐसी कंपनी को काम मिले जो गुणवत्ता से समझौता कर सके और गोयल साहब की जेब भर सके।
आखिर में टेंडर की शर्तों में बदलाव किया गया और ये शर्तें इस प्रकार बनाई गई कि यह काम डी कुमार के स्वामित्व वाली कंपनी को ही मिल सके। बाद में हुआ भी यही। यह काम प्रेनिट वल्र्ड नाम की कंपनी को दिया गया, जो डी कुमार के बेटे की है।
इस संबंध में कई लोगों ने अपना विरोध भी प्रदर्शित किया मगर उनकी बात अनसुनी कर दी गई। ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि आरके गोयल किसी भी कीमत पर यह काम डी कुमार की कंपनी को ही देना चाहते थे। इस कंपनी को गोरखपुर और इलाहाबाद में माड्यूलर ऑपरेशन थियेटर बनाने का काम दे दिया गया।
जब कंपनी ने देखा इस काम को करने पर तथा इतनी कमीशन देने पर ज्यादा मुनाफा नहीं होगा और तो और फंसने का डर बना रहेगा तो यह भी तय किया गया कि इसकी जांच वही लोग करें जो लोग उनको बचा सकें। नियमानुसार ऑपरेशन थियेटरों के निर्माण की गुणवत्ता जांचने तथा जो उपकरण लगाए जा रहे हैं, वह ऑपरेशन करने के दौरान उपयोगी होंगे या नहीं यह जांचने के लिए पीजीआई के डॉक्टरों की एक टीम बनाई जानी चाहिए थी। पूर्व में इस तरह के ऑपरेशन थियेटर के निर्माणों की गुणवत्ता जांचने के लिए पीजीआई के डाक्टरों को रखा भी गया था, मगर इन आपरेशन थियेटरों के निर्माण में पीजीआई के डॉक्टरों को दूर रखा गया, जिससे कहीं मामले की
पोल न खुल जाए और कहीं हकीकत सामने न आ जाए।
अगर पीजीआई के डाक्टर इस कमेटी में होते तो वह तत्काल इस बात पर आपत्ति करते कि विदेशी ऑपरेशन थियेटरों में फरीदाबाद में बनी चीजे क्यों लगाई जा रही हैं। एक साजिश के तहत वरिष्ठï डाक्टरों को इससे दूर रखा गया।
दरअसल निर्माण निगम के एमडी आरके गोयल इस तरह के भ्रष्टïाचार के मास्टर मांइड माने जाते रहे हैं। ठेकेदार बताते हैं कि वह खुले आम कहते हैं कि वह जितना कमीशन लेते हैं उसका 60 परसेंट ऊपर दे देते हैं। भ्रष्टïाचार के इतने हुनर
दिखाने के कारण ही कई सीनियर लोगों को दर किनार करके उनको निर्माण निगम का एमडी बना दिया गया। हालांकि प्रिनिट वल्र्ड के अधिवक्ता अंकुर गोयल ने अपने मुवक्किल पर लगे इन आरोपों का खंडन किया है।

एमडी गोयल के करीबी डी कुमार का है जलवा

डी कुमार की न केवल स्वास्थ्य महकमे में बल्कि राजनैतिक रसूखों में भी खासी पहुंच है। करोड़ों की संपत्ति का यह मालिक आरके गोयल का बेहद करीबी है। यही कारण है कि डी कुमार को सैकड़ों करोड़ के ठेके दिलवाने के लिए निर्माण निगम के एमडी आरके गोयल ने दिन-रात एक कर दिए। आरके गोयल चाहते थे कि प्रदेश के मेडिकल कालेजों में जो भी ठेका निकले वह सिर्फ डी कुमार या फिर उनके परिवार की ही किसी कंपनी को मिले। बताया जाता है कि डी कुमार का कई राज्यों में और विदेशों में भी कारोबार फैला हुआ है। सूत्रों का कहना है कि आरके गोयल ने डी कुमार के जरिए विदेशों में भी अपनी काली कमाई का बड़ा हिस्सा निवेश किया है। हालांकि इन आरोपो की पुष्टिï अभी नहीं हो सकी है। अगर प्रवर्तन निदेशालय या आयकर विभाग से इस मामले की जांच हो गई तो कई बड़े राज सामने आ जायेंगे।।

मरीजों की जान पर महल बनाना शर्मनाक

भ्रष्टïाचार मुक्ति मोर्चा ने मुख्य सचिव को खत लिखकर कहा है कि एक तरफ सीएम मरीजों की जान बचाने के लिए सैकड़ों करोड़ रुपये के मार्डन अॅापरेशन थियेटर बनवा रहे हैं तो दूसरी ओर इनके निर्माण में निर्माण निगम के एमडी आर के गोयल ने भ्रष्टïाचार के सारे रिकार्ड तोड़ दिए हैं। इस खत में लिखा है कि गरीबों की लाश पर महल बनाने वाले लोग यह भूल जाते हैं कि ईश्वर सब देख रहा है। इन आपरेशन थियेटरों में इतनी खराब चीजें लगाई जा रही हैं, जिससे मरीजों की जान कभी भी खतरे में पड़ सकती हैं। खत में लिखा है कि जिस तरह गोयल ने सैकड़ों करोड़ की दौलत इक_ïी की है उससे साफ होता है कि इस भ्रष्टïाचारी अफसर पर किसी बड़े आदमी का हाथ है। आखिर सच्चाई सामने आना ही चाहिये।

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