चिडिय़ाघर में बचे हैं केवल जेब्रा के पैरों के निशान

Capture4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। चिडिय़ाघर में बच्चों के पसंदीदा जानवरों में से एक जेब्रा अब अतीत का हिस्सा बन गया है। यहां आने वाले बच्चे अब जेब्रा नहीं देख सकेंगे क्योंकि चिडिय़ाघर में रहने वाले नर और मादा जेब्रा की मौत हो चुकी है। इनके बाड़े में मात्र दोनों के पैरों के निशान रह गये हैं। जू प्रशासन और पशु प्रेमी मादा जेब्रा संस्कृति की मौत का गम भूल भी नहीं पाये थे कि अचानक से संस्कृति के साथी बंकित की भी मौत हो गई। वह 20 नवंबर को संस्कृति की मौत होने के बाद से ही सदमे में चल रहा था। यहां तक की खाना-पीना भी छोड़ दिया था और सारा दिन अपने बाड़े में इधर-उधर बेचैन होकर भागता और खुद को चोट पहुंचाता रहता था।
इस स्थिति से निपटने के लिए बरेली से चार चिकित्सकों की टीम को भी बुलाया गया था लेकिन बंकित की स्थिति में बिल्कुल भी सुधार नहीं हुआ। आखिरकार शुक्रवार को बंकित ने भी दम तोड़ दिया। इस खबर के फैलते ही जेब्रा प्रेमियों को काफी दुख हुआ है। जेब्रा के शव का पोस्टमार्टम डॉ. अशोक कश्यप, डॉ. उत्कर्ष शुक्ला और डॉ. विकास सिंह के पैनल ने किया। इसमें मौत की मुख्य वजह कार्डियो फेल्योर बताई जा रही है। टीम ने अस्पताल परिसर में ही उसका शवदाह कर दिया। बंकित की मौत के बाद अब प्रदेश में सिर्फ एक ही जेब्रा मादा ऐश्वर्य रह गई है, जो कि इस वक्त कानपुर चिडिय़ाघर में है। गौरतलब हो कि वर्ष 2013 में 8 साल के बंकित को लखनऊ चिडिय़ाघर में लाया गया था। चिडिय़ाघर में जिन जानवरों के बाड़े के सामने सबसे अधिक भीड़ जुटती थी, उनमें जेब्रा का बाड़ा भी शामिल था। यह जानवर बच्चे बहुत अधिक पसंद करते थे। संस्कृति और बंकित की मौत के बाद लखनऊ के चिडिय़ाघर में अब केबल जेब्रा के पैरों के निशान रह गये हैं। इस बाड़े में दोबारा जेब्रा कब आयेगा। इस संबंध में कुछ भी कहा नहीं जा सकता है।

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