चिकित्सकों की लापरवाही से जननी सुरक्षा योजना पर संकट

Capture4पीएम न्यूज़ नेटवर्क

लखनऊ। प्रदेश सरकार एक तरफ मातृ एवं नवजात के मृत्यु दर को कम करने में कोई कोर कसर नही छोड़ रही है, वहीं दूसरी तरफ चिकित्सकों की लापरवाही सरकार की कोशिशों पर बट्टा लगा रही है। सबसे बुरा हाल राजधानी के सरकारी अस्पतालों का हैं। जहां आये दिन चिकित्सकों की लापरवाही के चलते प्रसूता तथा नवजात के मौत के मामले सामने आ रहे हैं और अस्पताल प्रशासन लापरवाह चिकित्सकों पर कागजी कार्रवाई का भरोसा दे पीडि़तों के जख्म पर महरम लगाने का काम कर रहे हैं। सख्त कार्यवाही न होने के कारण लापरवाह चिकित्सक मौज में हैं और प्रसूता तथा नवजात दम तोड़ रहे हैं। आलम तब है जब सरकार जननी सुरक्षा योजना के तहत एक सुरक्षित मातृत्व कार्यक्रम चला रही है, जिसका उद्देश्य गर्भवती महिलाओं के संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देते हुए मातृ एवं नवजात मृत्यु दर को कम
करना है।
17 जनवरी को केजीएमयू के क्वीनमैरी अस्पताल में इलाज के अभाव में एक गर्भवती ने दम तोड़ दिया, जिसके बाद मृतका के परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा काटा। परिजनों का आरोप था कि इमरजेंसी कक्ष में डॉक्टर नहीं होने के कारण लगभग दो घंटे तक मरीज को भर्ती नहीं किया गया। वह इमरजेंसी के बाहर स्ट्रेचर पर इलाज के अभाव में तड़पती रही। डॉक्टर के आने के बाद उसे भर्ती करके लेबर रुम में भेज दिया गया। इस दौरान लेबर रुम में उसकी बहन रुपा उसके साथ रुकी थी। रूपा ने बताया कि डॉक्टर के कहने पर बाहर से कई दवाएं और इंजेक्शन लाकर दिए थे। मगर उसे मरीजों को नहीं दिया गया था। इस मामले में क्वीनमेरी अस्पताल की डॉ. विनीता दास ने कहा है कि मामले की जांच कर उचित कार्रवाई होगी। राजधानी का ये कोई पहला ममाला नही है जिस पर जांच का मरहम लगाने की बात की जा रही है। ऐसे कई मामले है जिनमें मौत पर जांच की चादर डाली जा चुकी है।

केस एक
दो जनवरी को लोहिया अस्पताल में चिकित्सकों की लापरवाही के चलते बाराबंकी के टिकैतनगर निवासी कोमल शर्मा (22) की मौत हो गयी थी। परिजनों ने चिकित्सकों पर आरोप लगाते हुए कहा था कि प्रसूता तड़पती रही और वो ओपीडी से लेकर इमरजेंसी वार्ड में मौजूद डाक्टर के कई बार चक्कर लगा चुके थे। भर्ती करने के 6 घंटे बीतने के बाद रात ग्यारह बजे प्रसूता को ओटी में ले जाया गया था, जहां आपरेशन के बाद नवजात का जन्म हुआ था। प्रसव के कुछ देर बाद कोमल को इमरजेंसी वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया था। जहां प्रसूता को लगातार रक्तस्राव हो रहा था, लेकिन इमरजेन्सी में मौजूद डाक्टर ने इस बात को नजर अंदाज कर दिया था। बाद में कोमल शर्मा को वेंटीलेटर पर ले जाया गया था जहां उनकी मौैत हो गयी थी।

केस दो
मोहनलाल गंज सीएचसी में सर्जरी के बाद 11 जनवरी को नवजात तथा उसकी मां दोनों की मौत हो गयी थी। जिसमें डाक्टरों की लापरवाही सामने आयी थी। सीएचसी में बेहोशी के चिकित्सक नही थे। इसके लिए बेहोशी के ऑनकॉल चिकित्सक डॉ. जीएस. बाजपेयी का इंतजार करना पड़ा था। सूत्रों की माने तो आक्सीजन मिलने में देरी के चलते नवजात तथा उसकी मां दोनों की मौैत हो गयी थी।

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