चार साल बाद भी नहीं सुलझीं यह घटनायें

– गणेश जी वर्मा
लखनऊ। राजधानी के अपराधी बेखौफ होकर अपराधों को अंजाम देते चले जा रहे हैं। जबकि पुलिस सिर्फ घटनाओं का पर्दाफाश करने के लिए आश्वासन देते हुए नजर आ रही है। यदि यह कहा जाए कि राजधानी पुलिस झूठ बोलने या अपनी जुबान से स्वयं ही अपनी बड़ाई करने में माहिर है तो गलत नहीं होगा। हालात यह हंै कि विगत वर्षों हुई कुछ घटनाएं अब राजधानी पुलिस के लिए चुनौती बनी हुई है। लेकिन पुलिस के कानों में जूं तक नहीं रेंग रहीं हैं। पुलिस की इस कार्य प्रणाली से जहां पीडि़तों के अंदर से पुलिस का विश्वास उठता जा रहा है वहीं पुलिस की कार्य प्रणाली भी संदेह के घेरे में है। चार वर्ष बाद भी हालत यह है कि पुलिस पीडि़त परिजनों को सिर्फ आश्वासन देते हुए नजर आ रही है।
केस नम्बर एक
हुसैनगंज कोतवाली क्षेत्र में 12 जून वर्ष 2011 की शाम शहर के प्रतिष्ठित चश्मा व्यवसाई गुलाब टेक चंदानी अमीनाबाद से दुकान बंद करने के बाद अपने स्कूटर पर सवार होकर चारबाग स्थित खम्मन पीर बाबा की मजार शरीफ पर दर्शन करने गए थे। लगभग दस बजे रात को दर्शन करने के बाद स्कूटर से वापस घर जा रहे थे तभी स्टेशन रोड पर बाइक सवार बेखौफ बदमाशों ने ओवर टेक कर गुलाब टेक चंदानी को रोक लिया। जब तक गुलाब कुछ समझ पाते कि इससे पहले असलहों से लैस बदमाशों ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर उनकी हत्या कर दी। इस हाई प्रोफाइल हत्याकांड के मामले में पुलिस अधिकारियों ने पुलिस की टीमें गठित कर लखनऊ समेत आसपास के जिलों में रवाना किया। लेकिन तीन वर्ष तक पुलिस कातिलों का सुराग लगाना तो दूर हत्या करने के कारण का भी पता नहीं लगा पाई।
केस नम्बर दो
चिनहट कोतवाली क्षेत्र में 18 दिसंबर 2010 को कमता स्थित शिवाजी नगर निवासी बीसीए के छात्र बलराज सिंह वर्मा उर्फ पिंटू की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस घटना को पुलिस ने हत्या की घटना से ही इंकार करते हुए कहा कि छात्र ने स्वयं को गोली मारकर आत्महत्या कर ली है। लेकिन दूसरे दिन पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में पुलिस की झूठी कहानी की पोल खुल गई थी। रिपोर्ट से पता चला कि छात्र की गोली मारकर हत्या की गई है। जहां हरकत में आई पुलिस ने संदेह के आधार पर चिनहट कस्बे से कई युवकों को हिरासत में लेकर कई दिनों तक लंबी पूछताछ की लेकिन पुलिस को कुछ हासिल नहीं हुआ। सूत्रों की मानें तो छात्र हत्याकांड में किसी करीबी का ही हाथ है। लेकिन पुलिस उन हत्यारों तक पहुंचने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही है। जिसके कारण आज भी मामला अधर में लटका हुआ है।
केस नम्बर तीन
गुड़म्बा थाना क्षेत्र के कल्याणपुर निवासी राजकीय जुबली इंटर कॉलेज से सेवानिवृत्त श्याम सुंदर यादव को उनके ही घर में गला रेतकर हत्यारों ने हत्या कर दी थी। इस मामले में पुलिस ने करीब एक दर्जन से अधिक लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की, लेकिन आज तक इस वारदात का राजफाश नहीं हो सका। और पुलिस अपनी पूरी कवायद ठंडे बस्ते में डालकर शांत बैठ गई। सबसे बड़ी बात यह है कि इस मामले में शिक्षक के ऊपर आपत्तिजनक टिप्पणी भी हुई थी।
केस नम्बर चार
गोमतीनगर थाना क्षेत्र में आठ जुलाई 2013 को थाने से चंद कदमों की दूरी पर स्थित फुटपाथ पर अपनी मां की गोद में सो रही चार साल की मासूम बच्ची को अगवा कर कातिलों ने बेरहमी से कत्ल कर दिया था। शव पर चाकूओं के निशान कुछ ऐसे थे कि उसे गिना नहीं जा सकता था। हत्यारों ने शव को मिठाईवाला चौराहे के पास फेंक दिया था। इस मामले में भी जांच के बाद पुलिस नाकाम रही। पुलिस अभी तक यह पता नहीं कर पाई कि हत्या का कारण क्या है।
केस नम्बर पांच
गोमतीनगर थाना क्षेत्र में 25 फरवरी 2013 को ग्वारी गांव निवासी सतीश की गोली मारकर हत्या कर दी गई। बदमाशों ने घटना को उस समय अंजाम दिया जब सतीश अपनी पत्नी अंजली के साथ बाइक से घर लौट रहे थे। पुलिस इस मामले में कई लोगों से पूछताछ कर के और जल्द पर्दाफाश का दावा भी किया। लेकिन आज तक मामला अधर में है। इस मामले में भी पुलिस यह बताने में असमर्थ है कि हत्या का कारण क्या था।
केस नम्बर छह
हजरतगंज कोतवाली क्षेत्र में 27 जनवारी 2014 को बालू अड्डा निवासी सब्जी विक्रेता शकील के ढाई वर्षीय बच्चे अफजल को अगवा कर बदमाशों ने बेरहमी से हत्या करने के बाद शव को घर से चंद कदमों की दूरी पर कूड़े के ढेर में फेंककर फरार हो गए। पुलिस की तमाम कवायद के बाद भी अभी तक कातिल हाथ नहीं आये। पुलिस ने तमाम तरह की जांच करने का आश्वासन देकर जल्द पर्दाफाश करने का दावा किया। लेकिन हकीकत कुछ और है। इस मामले में भी पुलिस यह स्पष्ट नहीं कर पाई कि हत्या का कारण क्या है।
केस नम्बर सात
वजीरगंज कोतवाली क्षेत्र के रिवर बैंक कॉलोनी निवासी प्रोफेसर और पेट्रोल पम्प मालिक एमवी त्रिवेदी को बाइक सवार बेखौफ बदमाशों ने दिनदहाड़े उनके घर की दहलीज पर गोली मारकर हत्या कर दी। इतना ही नहीं उनके पास मौजूद 13 लाख रुपये लूटकर फरार हो गये। पुलिस ने चिंह्ति अपराधियों के साथ जेल में बंद अपराधियों से भी पूछताछ की लेकिन कोई कामयाबी नहीं मिली। पुलिस टीम बदमाशों की तलाश में लखनऊ के अलावा सीमावर्ती जिलों में डेरा डालकर खाक छानमारी लेकिन नतीजा हासिल होने के बजाए सिफर ही रहा। कई एसएसपी बदलने के बाद भी इस मामले का पर्दाफाश अभी तक नहीं हो पाया।
अब छुट्टियों में भी होने लगी सियासत
लखनऊ। यूपी में सियासत तो हर छोटी मोटी बात पर की जाती है। इसके लिए कोई मुद्दा छोटा या बड़ा नहीं होता है। मुद्दा कोई भी हो सियासत से उसे तूल देने में देर नहीं की जाती है। हद तब हो गयी जब इन्होंने बच्चों तक को नहीं बख्शा और बच्चों को लू धूप के थपेड़ों के बीच स्कूल जाना पड़ रहा था।
यूपी में घोषित होने वाली छुट्टïी की भरपाई मासूम बच्चों को भीषण गर्मी में स्कूल जाकर करनी पड़ रही थी। पिछले एक हफ्ते से मौसम मे आए बदलाव की वजह से पारा 43 डिग्री पार कर गया है, लेकिन अभी स्कूूलों में गर्मी की छुट्टïी घोषित नहीं की गई थी। ऐसे में बच्चों को स्कूल जाने के लिए बाध्य हैं। अवकाश के नजरिए से देखें तो पिछले एक दशक के अंदर सियासत के कारण काफी छुट्टïीयां घोषित की जा चुकी है। अवकाशों के चलते बच्चे भले ही आम दिनों में मौज करते हों पर इसकी भरपाई उन्हें गर्मी की चिलचिलाती धूप में स्कूल जा कर करना पड़ रहा था। वहीं दूसरी ओर स्कूलों का कहना है कि यदी हम जल्द स्कूल बंद कर देते हैं तो बच्चों का कोर्स पिछड़ जाएगा। वोट बैंक की पॉलिटिक्स में तो इतनी छुट्टिïयां घोषित कर दी जाती हैं बल्कि छुट्टिïयों के बजाए उन्हें इन सबको स्कूलों में सेलिब्रेट करवाना चाहिए। इससे बच्चों को दो फायदे होंगे एक तो बच्चों की पढ़ाई बाधित नहीं होगी दूसरे उन्हें अपने पूर्वजों एवं देश के इतिहास की जानकारी भी होगी। मौसम की स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री ने बच्चों को छुट्टियां का उपहार दिया है।

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