चार माह से बिना वेतन गुजारा कर रहे कर्मचारी

निगम के अफसरों के लिए सिरदर्द बना शासन का फार्मूला

capture4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। चार महीने से वेतन-पेंशन के बिना गुजारा कर रहे जल निगम कर्मचारियों को राहत देने के लिए शासन ने जो फार्मूला पेश किया है, उसे देख निगम के अफसरों से लेकर कर्मचारियों तक ने अपने सिर पकड़ लिए हैं। वेतन-पेंशन व जीपीएफ की देनदारी 862 करोड़ रुपये से ज्यादा है, लेकिन सिर्फ 300 करोड़ मिलेंगे। यह धनराशि भी दो महीनों की 150-150 करोड़ की किश्तों में दी जाएगी।
उप्र जल निगम कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष अजय पाल सिंह सोमवंशी ने बताया कि 300 करोड़ रुपये के इस ऋण से निगम का संकट खत्म होना दूर की कौड़ी है। इससे एक महीने की भी राहत नहीं मिलेगी। इन किश्तों से या तो चार महीने का बकाया वेतन और पेंशन दिया जा सकता है या सिर्फ सेवानिवृत्त कार्मिकों के जीपीएफ की अदायगी की जा सकती है। दोनों काम नहीं हो सकते। दूसरी बात यह कि चार महीने के बकाया वेतन-पेंशन को दिसंबर व जनवरी में मिलने वाले ऋण की किश्तों से अदा करने में फरवरी का महीना शुरू हो जाएगा। तब तक फिर दिसंबर और जनवरी का वेतन-पेंशन बकाया हो चुका होगा।
भर्ती फिर भी जारी
कर्मचारी नेताओं का कहना है कि शासन के आदेश के बाद भी जल निगम में भर्तियां धड़ल्ले से जारी हैं। अवर व सहायक अभियंता तथा लिपिकों के सभी रिक्त पद भरे जा रहे हैं। सोमवंशी का कहना है कि प्रतिमाह 70 करोड़ रुपये के खर्च के सामने आय औसतन 35 करोड़ है जबकि इन भर्तियों से छह करोड़ प्रतिमाह का बोझ बढ़ाया जा रहा है। सोमवंशी के मुताबिक तंगहाल निगम में 2013 से 2015 के बीच करीब 1300 अवर व सहायक अभियंताओं की नियुक्ति कर पहले ही 10 करोड़ रुपये प्रतिमाह का वित्तीय भार बढ़ाया जा चुका है।

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