चारबाग के स्टैंड बने चोरों के गोदाम

स्टैंड पर खड़ी मोटरसाइकिलों से चोरी हो जाते हैं पार्ट्ïस
जीआरपी पुलिस की नाक के नीचे से होती हैं चोरियां

१११ हिना खान
Captureलखनऊ। राजधानी में मोटर साइकिल चोर हमेशा से पुलिस पर हावी रहे हैं। पुलिस जब तक चार मोटर साइकिलें बरामद करती है तब तक चोर, चालीस उठा चुके होते हैं। अधिकांश चोरी की मोटरसाइकिलें शहर से रातों रात नेपाल और बिहार भेज दी जाती हैं, बाकी बची शहर में बने बाइक स्टैण्डों पर खड़ी कर दी जाती हैं। चारबाग रेलवे स्टैण्ड भी चोरों के लिए सुरक्षित पनाहगार साबित हो रहा है। चोरी की बाइकें तो खड़ी होती ही हैं साथ ही बाइक के पार्ट्ïस भी धड़ल्ले से चोरी हो रहे हैं। सालों से यहां लावारिश पड़ी मोटरसाइकिलों को पुलिस मालिक तक पहुंचाने की भी जरूरत नहीं समझती, जिसका नतीजा है कि मोटरसाइकिलें कबाड़ में तब्दील हो गई हैं, जबकि बगल में जीआरपी थाना है, फिर भी इस तरफ किसी का ध्यान नहीं जाता।
बताते चलें कि स्टेशन के सर्कुलेटिंग एरिया में जीआरपी का थाना है, जहां पुलिस की लंबी-चौड़ी फौज के साथ इंस्पेक्टर भी बैठते हैं। थाने के आस-पास में मोटरसाइकिलों के तीन स्टैण्ड हैं, जहां बेखौफ चोर लंबे समय से चोरी की मोटरसाइकिलों को रखकर उसे अपने गोदाम की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। जब चोरी का मामला ठंडा हो जाता है तब वाहनों के फर्जी कागजात बनवाने के साथ ही उसे अपने गोदाम से निकालकर दूसरे जिलों या प्रदेश के लोगों को बेच देते हैं। कई मामलों में यह भी होता है कि चोर पुलिस के हत्थे चढ़ जाते हैं। कुछ दिनों की जेल भी हो जाती है। जेल से छूटने के बाद डर की वजह से स्टैण्ड से बाइक लेने नहीं जाते। वहीं दूसरी ओर काफी समय से खड़े इन वाहनों को देख स्टेशन के आस-पास के स्मैकिये इन बाइकों को अपना निशाना बना रहे हैं। ये मोटरसाइकिलों के पाट्र्स निकाल कर बेच देते हैं और इन्हें कोई रोकने-टोकने वाला नहीं है। इतना ही नहीं जो लोग नियमित ट्रेन से सफर करते हैं, वह लोग भी स्टैण्ड में बाइक खड़ी करते हैं। उनकी मोटरसाइकिलों केे पाट्ïर्स बदल दिए जाते हैं। कई सालों से यहां चोरी की मोटरसाइकिलें खड़ी हैं, जो देख-रेख के आभाव में कबाड़ में तब्दील हो चुकी हैं।
जीआरपी के रिकार्ड के मुताबिक तीन स्टैण्डों में 131 लावारिस बाइक व स्कूटर खड़े हैं। हालत यह है कि शायद ही किसी वाहन के पार्ट्स पूरे हों। लगभग सभी के कार्बाेरेटर, बैटरी समेत कई छोटे-मोटे पार्ट्स चोरी हो चुके हैं। वहीं दूसरी ओर ऐसे वाहनों की गिनती भी कम नही हैं जिसके इंजन के पार्ट्स समेत पहिया व हैंडिंल तक गायब हो गई हैं। यह सब कुछ चल रहा है पुलिस की नाक के नीचे लेकिन पुलिस है उसे तो जैसे कुछ दिखाई ही नहीं दे रहा। स्टैण्ड संचालक भी सिर्फ पैसा कमाने में लगे हैं। उन्हें इससे मतलब नहीं है कि चोर वाहन खड़ा कर रहे हैं या मालिक। जबकि होना तो यह चाहिए कि स्टैण्ड संचालक वाहनों की इंट्री और एक्जिट गेट पर सीसीटीवी कैमरे लगवायें जिससे कम से कम यह तो पता चले कि चोरी के वाहनों को कौन लोग स्टैण्ड तक पहुंचा रहे।
इस संबंध में सर्कुलेटिंग एरिया इंचार्ज चन्द्रहास मिश्रा कहते हैं कि जीआरपी ने अपने क्षेत्र में कुल 29 सीसीटीवी कैमरे लगवाये हैं। स्टैण्डों के आसपास भी कैमरा लगाने पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अधिकतर लावारिस वाहनों के नम्बर फर्जी हैं, जिसके चलते उनके मालिकों का पता नहीं चल पा रहा है। ऐसी स्थिति में उन्हें अब नीलाम करने की तैयारी की जा रही है। पुलिस इन वाहनों को कब नीलाम करेगी यह तो वक्त बताएगा, पर स्टैण्ड में चोरी के वाहनों के आने का सिलसिला बंद नहीं हो रहा है।

साइकिल चोरों का भी अड्डा है स्टेशन का स्टैंड
लखनऊ। ऐसा नहीं है कि चारबाग रेलवे स्टैण्ड पर सिर्फ मोटर साइकिल, स्कूटर ही चोरी के आते हैं। साइकिल स्टैण्ड में भी चोरी की साइकिलें भरी पड़ी हैं। सैकड़ों लावारिश साइकिलें कबाड़ में तब्दील हो चुकी हैं। कितनी लावारिश साइकिलें स्टैण्ड में हैं यह पुलिस को नहीं पता, पर सालों से पड़े-पड़ेे कबाड़ का बड़ा ढेर बन गया है। लावरिस साइकिलों के बारे में न तो स्टैण्ड संचालक थाने पर सूचित करते हैं और न ही पुलिस कभी इस ओर ध्यान देना जरूरी समझती हैं।

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