चली जाती जान तो कौन होता जिम्मेदार

ये ट्रैफिक व्यवस्था जानलेवा है डीएम साहब…आप की सुस्ती मरीजों को मार डालेगी

Capture4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और राज्यपाल भले ही अपनी जिम्मेदारियों को लेकर सजग हैं, लेकिन शुक्रवार को पुलिस लाइन के बीटिंग द रिट्रीट में पहुंचने को लेकर उनकी फ्लीट की वजह से राजधानी के सबसे व्यस्त कहे जाने वाले हजरतगंज चौराहे का ट्रैफिक लगातार 15 मिनट तक रुका रहा। इसकी वजह से दो मरीजों की जान जा सकती थी। दोनों ही मरीज दो अलग-अलग एम्बुलेंस से जा रहे थे और हूटर बजाने के बाद भी, उन्हें रोके रखा गया। ट्रैफिक पुलिस की लापरवाही की वजह से इस दौरान कई पुलिसकर्मियों से यात्रियों की नोकझोंक भी होती रही, लेकिन किसी ने भी एम्बुलेंस की ओर ध्यान नहीं दिया।
मामला शुक्रवार का है। पुलिस लाइन में बीटिंग द रिट्रीट का आयोजन किया जा रहा था। बीटिंग द रिट्रीट के साथ ही गणतंत्र दिवस समारोह का औपचारिक समापन होता है। इस कार्यक्रम में राज्यपाल राम नाईक और सीएम अखिलेश यादव दोनों को पहुंचना था। करीब चार बजकर 30 मिनट पर मुख्यमंत्री का प्लीट हजरतगंज से गुजरा। इसके पांच मिनट पहले ही ट्रैफिक को रोक लिया गया था। चार बजकर 25 मिनट से रूका ट्रैफिक सीएम के जाने के बाद जैसे ही जाने को हुआ, फौरन निर्देश मिला की राज्यपाल महोदय भी आ रहे हैं। निर्देश मिलते ही ट्रैफिक को वीआईपी के आने का इशारा करते हुए नहीं जाने दिया गया। राज्यपाल के आने में देर होने लगी और इसके बाद उनका इंतजार भी होने लगा। ट्रैफिक चार बजकर 25 मिनट से 40 मिनट तक लगातार रुका रहा। इसके बाद राज्यपाल का काफिला निकला। इन 15 मिनट के दौरान दो एम्बुलेंस की गाडिय़ां ट्रैफिक के रेले में खो गईं। वह हूटर बजाती रहीं, लेकिन वीआईपी गाडिय़ों के आगे किसी ने इन एम्बुलेंस की ओर ध्यान नहीं दिया।
ट्रैफिक रुकने की वजह से हजरतगंज से लेकर सिकंदराबाद, उधर दूसरी ओर बर्लिंगटन चौराहे तक जाम लग गया। हाईकोर्ट की ओर भी जिधर सीएम और गवर्नर को जाना था उधर भी दूसरी लाइन पर परिवर्तन चौक तक जाम लगा रहा।

कोसते रहे परिजन

हालांकि एम्बुलेंस के तीमारदार बिना किसी का नाम लिए वीआईपी सिस्टम को कोसते रहे। यह शुक्र रहा कि इस दौरान कोई हादसा नहीं हुआ नहीं तो मरीज की जान भी जा सकती थी।

क्या कहते हैं ट्रैफिक में फंसे लोग
ट्रैफिक में फंसे लोगों का कहना था कि जिलाधिकारी को इंतजाम करना चाहिए कि ट्रैफिक व्यवस्था कैसी होगी। पिछले एक महीने से इतने डायवर्जन किए गए हैं कि राजधानी में चलना भी दूभर हो गया है। यदि ऐसा ही रहा तो इस ट्रैफिक जाम में फंसकर लोग एम्बुलेंस में ही दम तोड़ देंगे।

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