घाव पर मरहम

फैसले आने के बाद इस तबाही में जिन लोगों ने अपनों को खोया था उनके घाव हरे हो गए। 2006 में ब्लास्ट शाम 6 बजकर 24 मिनट पर हुए जो 11 मिनट तक लगातार चलते रहे। हमले का वक्त शाम को चुना गया क्योंकि आमतौर पर शाम को ही मुंबई के लोकल ट्रेन में लाखों लोग दफ्तर से घर वापस आते हैं।

sanjay sharma editor5एक बार फिर मुंबई बम धमाकों की याद ताजा हो गई। 11 जुलाई 2006 को मुंबई में 7 सिलसिलेवार धमाके हुए थे, इस हमले में 188 लोग मारे गये थे और 824 लोग घायल हुए थे। बम धमाके से पूरी मुंबई दहल गई थी। पूरी फिजा में थी सिर्फ चीख पुकार। कल मकोका कोर्ट ने नौ साल बाद इस पर फैसला सुनाया। मुंबई की विशेष अदालत ने 2006 में मुंबई ट्रेन ब्लास्ट मामले में पांच लोगों को फांसी की सजा सुनाई है। अदालत ने सात अन्य को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इस फैसले से निश्चित ही कुछ लोगों के घाव पर मरहम लगा है।
हालांकि बचाव पक्ष के वकील ने कहा है कि वो फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट जाएंगे। अभियोग पक्ष ने पिछले हफ्ते 12 में से आठ दोषियों के लिए मौत की सजा और बाकी चार को आजीवन कारवास दिए जाने की पैरवी की थी। विशेष न्यायाधीश यतिन डी शिंदे ने पिछले सप्ताह सजा पर दलीलों को लेकर सुनवाई पूरी की थी। विशेष मकोका अदालत ने 23 सितंबर को मामले में सजा पर अपना आदेश 30 सितंबर के लिए सुरक्षित रख लिया था। भारत के अब तक के सबसे बड़े आतंकी घटनाओं में से एक मुंबई बम धमाके ने हजारों परिवार को तबाह कर दिया था। फैसले आने के बाद इस तबाही में जिन लोगों ने अपनों को खोया था उनके घाव हरे हो गए। 2006 में ब्लास्ट शाम 6 बजकर 24 मिनट पर हुए जो 11 मिनट तक लगातार चलते रहे। हमले का वक्त शाम को चुना गया क्योंकि आमतौर पर शाम को ही मुंबई के लोकल ट्रेन में लाखों लोग दफ्तर से घर वापस आते हैं। यह घटना बहुत बड़ी थी। विस्फोट खार रोड सांताक्रूज, जोगेश्वरी-माहिम जंक्शन, मीरा रोड-भयंदर, माटुंगा -माहिम और बोरेवाली जंक्शन के बीच हुई। इस हमले में प्रेशर कुकर बम और आरडीएक्स का इस्तेमाल किया गया था। सभी हमलावार आतंकी संगठन ‘सिमी’ से जुड़े हुए थे। हमारे देश की सबसे बड़ी विडंबना है कि न्याय बहुत देर में मिलता है। मकोका कोर्ट को अपना फैसला सुनाने में 9 वर्ष का समय लग गया। विपक्षी पक्ष का वकील हाईकोर्ट में अपील की बात कह रहे हैं। अब वहां कितना वक्त लगेगा, यह तो वक्त बताएगा।
पिछले दिनों 1993 में हुए मुंबई बम धमाके का फैसला 22 साल बाद आया। देश में कोर्ट का फैसला आने में बहुत वक्त लग जाता है। एटीएस के मुताबिक मुंबई बम धमाका का खास मकसद गुजरात दंगे का बदला लेना और खास कम्युनिटी को निशाना बनाना था। इस मामले में कुल 30 लोग पर आरोप है, जिसमें 17 भारतीय व 13 पाकिस्तानी हैं। अब तक जहां 17 में चार भारतीय दोषियों की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है, वहीं पाकिस्तानियों के खिलाफ भी कुछ ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है। ऐसे में बडा सवाल यह है कि उन 13 पाकिस्तानियों व चार देश में पले-बढ़े देश के दुश्मनों की सजा कैसे तय होगी। इनके खिलाफ कार्रवाई कैसे होगी?ï]

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