घातक बना प्रदूषण…

एक अध्ययन में पाया गया है कि सडक़ से आधा किमी के दायरे में रहने वाले लोगों के लिए प्रदूषण से होने वाली बीमारियों का खतरा चार गुना ज्यादा है। दिल्ली सहित देश के तमाम शहरों की आबादी इसी दायरे में रहती है। यह समस्या बहुत ही घातक मोड़ पर पहुंच चुकी है।

sanjay sharma editor5जिस तरह से देश में प्रदूषण बढ़ रहा है वह चिंता का विषय है। देश की हवा इतनी जहरीली हो गई है कि यह मौत का एक बड़ा कारण बनती जा रही है। सबसे बुरी स्थिति देश की राजधानी दिल्ली की है। वायु प्रदूषण के चलते दिल्ली की आबोहवा जानलेवा साबित हो रही है। छोटे-छोटे बच्चे दमा जैसी बीमारी से ग्रसित हो रहे हैं। कुल मिलाकर दिल्ली की स्थिति बहुत खराब है। धुंध के चलते पिछले दिनों केजरीवाल सरकार ने दो दिन स्कूल भी बंद करने का आदेश दिया था। पिछले साल दिल्ली दुनिया की सबसे प्रदूषित शहर में शुमार था तो इस बार भी दुनिया की सबसे प्रदूषित शहर में शामिल हुआ, लेकिन इस बार भारत के दिल्ली समेत 13 अन्य शहर भी शामिल हुए हैं। प्रदेश की राजधानी लखनऊ और कानपुर भी इस सूची में शामिल है।
डब्लूएचओ की रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि इन शहरों में सबसे ज्यादा प्रदूषण होने की वजह से कैंसर तथा दमा जैसी खतरनाक बीमारियों का खतरा बहुत बढ़ गया है। इन शहरों में प्रदूषण मानक से बहुत ऊपर पहुंच चुका है। आज प्रदूषण की इस स्थिति के जिम्मेदार सरकार के साथ-साथ हम खुद भी हैं। बढ़ते उद्योग धंधों और जंगलों की अधाधुंध कटाई की वजह से ही प्रदूषण का स्तर बढ़ता जा रहा है। पहले हवा में सिर्फ धूल के कण होते थे, जिनका स्वास्थ्य पर ज्यादा असर नहीं पड़ता था। लेकिन जैसे-जैसे शहरों का औद्योगीकरण हुआ, धूल के साथ फैक्ट्रियों के जहरीले धुएं के कण भी हवा में घुलते चले गए। आज हालत यह है कि इनकी मात्रा हमारे आस-पास के वातावरण में इतनी फैल गई है कि इनसे लोगों को गंभीर बीमारियां हो रही हैं।
बढ़ते वायु प्रदूषण ने शहरी जीवन को पूरी तरह से अपने आगोश में ले लिया है। वायु प्रदूषण से सबसे ज्यादा सांस की बीमारियां हो रही हैं। सांस लेने के साथ ही हवा में फैले जहरीले कण हमारे फेफड़ों तक पहुंच रहे हैं। इन कणों में खतरनाक रासायनिक, लोहे के कण शामिल हैं, जो फेफड़ों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इससे दमा जैसी बीमारियों का होना अब शहरों में आम बात हो गई है। बाद में ये बीमारी कैंसर जैसे घातक रोग में बदल जा रही है। चौंकाने वाले आंकड़े बताते हैं कि हमारे सभी महानगर, चाहे वह राजधानी दिल्ली हो या कोलकाता, तेज रफ्तार जिंदगी का पर्याय बना मुंबई हो अथवा उद्योग नगरी कानपुर, प्रदूषण की समस्या से सभी जूझ रहे हैं। एक अध्ययन में पाया गया है कि सडक़ से आधा किमी के दायरे में रहने वाले लोगों के लिए प्रदूषण से होने वाली बीमारियों का खतरा चार गुना ज्यादा है। दिल्ली सहित देश के तमाम शहरों की आबादी इसी दायरे में रहती है। यह समस्या बहुत ही घातक मोड़ पर पहुंच चुकी है। जल्द ही इसका समाधान नहीं ढूंढा गया तो आगे चलकर स्थिति और विकराल रूप ले लेगी।

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