घाघरा का कहर, दर्जनों गांव जलमग्न

एल्गिन ब्रिज-चरसड़ी तटबंध में घाघरा का कटान जारी

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
Captureलखनऊ । बाराबंकी से होकर गुजरने वाली घाघरा नदी का रौद्र रूप किनारे बसे गांवों के लोग तो हर साल देखते आए हैं। हर साल मंत्री, विभिन्न दलों के नेता और अधिकारी बाढ़ पीडि़तों की दुर्दशा के गवाह बनते आए हैं, लेकिन यह विडंबना ही है कि इसका स्थायी समाधान आज तक नहीं निकल पाया। एक बार फिर लोग तबाही के मुहाने पर खड़े हैं।
मानसूनी बारिश और नेपाल द्वारा लाखों क्यूसेक पानी छोडऩे से घाघरा नदी पूरे उफान पर है। इस वजह से बाराबंकी में दर्जनों गांव जलमग्न हो गए हैं। सैकड़ों परिवार बेघर हो चुके हैं। लोग जान बचाने के लिए ऊंचे स्थानों पर चले गए हैं। रात खुले में बिताने को मजबूर हैं।
नदी किनारे बसे गांवों के लोग एक बार फिर तबाही के मुहाने पर खड़े हैं। अधिकारी और नेता सिर्फ दौराकर वादों की झड़ी लगा रहे हैं। बाढ़ पीडि़त जान बचाने के लिए ऊंचे सुरक्षित स्थानों पर तो आ गए, लेकिन दिन धूप में बैठकर और रात कीड़े-मकोड़ों के डर के साए में बिता रहे हैं। खाने के भी लाले पड़े हुए हैं। हालात यह है कि लोग बच्चों को तीन दिन पुराना और बासी रोटी खिलाने को मजबूर हैं।

जारी है कटाव
एल्गिन ब्रिज-चरसड़ी तटबंध में घाघरा का कटान जारी है। बांध की कटान को रोकने की नाकाम कोशिश की जा रही है। बंधे को काटकर ही कटान को रोकने का प्रयास किया जा रहा है। पानी की तेज धारा मिट्टी को अपने साथ बहाकर ले जाती है। किनारे स्थित कई लोगों के खेत कटकर नदी में समा रहे हैं।

सीएम से करेंगे शिकायत
बाढ़ की चपेट में आने से दर्जनों गांवों के स्कूल भी प्रभावित हुए हैं। बाढ़ पीडि़तों का हाल जानने के लिए शुक्रवार को राज्य के बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री योगेश प्रताप सिंह पहुंचे। पीडि़तों का हाल देखकर मंत्री जी भी नाराज दिखे। मंत्री ने कहा कि बाढ़ आपदा प्रबंधन के लिए सरकार ने करोड़ों रुपए दिए हैं, लेकिन उसका इस्तेमाल नहीं हुआ है। उन्होंने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री और सिचाई मंत्री से करने की बात कही।

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