ग्रीस संकट का भारत पर असर…

भारतीय अर्थव्यवस्था ग्रीस को लेकर केंद्रित नहीं है लेकिन अगर ग्रीस कर्ज अदायगी में डिफाल्ट करता है और यह स्थिति यूरोप में संकट के तौर पर उभर कर आती है तो भारत में भी बाकी दुनिया की तरह संकट का प्रभाव महसूस किया जा सकता है।

sanjay sharma editor5आज पूरी दुनिया की नजर ग्रीस पर टिकी है। यूरोजोन समूह में शामिल ग्रीस द्वारा आईएमएफ से मिले कर्ज 1.6 बिलियन यूरो की किश्त नहीं चुकाई गई तो उसे डिफॉल्टर घोषित कर दिया जाएगा। आशंका जताई जा रही है कि पूरी दुनिया पर इसका विपरीत असर पड़ सकता है। माना जा रहा है कि इसके बाद ग्रीस के जीवन स्तर में गिरावट आ जाएगी, बैंकिंग व्यवस्था धराशायी होने की आशंका बढ़ेगी, बचत थम जाएगी, कंपनियां दिवालिया हो जाएंगी और आयात लागत बढ़ जाएगी। ग्रीस के इस संकट का असर दुनिया भर के शेयर बाजारों पर देखने को मिल रहा है। भारतीय शेयर बाजार का सेंसेक्स भी भारी गिरावट के साथ खुला था। वहीं चीन और जापान के शेयर बाजारों में भी गिरावट देखी गई।

हालांकि भारतीय अर्थव्यवस्था का ग्रीस से बहुत अधिक ताल्लुक नहीं है लेकिन फिर भी बाजार ऐसी परिस्थितियों से एकदम अछूते नहीं रहेंगे। सोमवार को इसका असर देखने को भी मिला था। भारतीय बाजार भी प्रभावित हुआ था। पिछले करीब ढाई सप्ताह में यह एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट है।

अमेरिका, जर्मनी और बेल्जियम में भी भय का माहौल है। इस बीच, भारत सरकार ने कहा है कि इस संकट का सीधे तौर पर देश की अर्थव्यवस्था पर कोई असर नहीं पड़ेगा, लेकिन उद्योग जगत के जानकारों का मानना है कि इससे यूरोपीय देशों को इंजीनियरिंग और सॉफ्टवेयर निर्यात प्रभावित हो सकता है। यूरो क्षेत्र के जीडीपी में ग्रीस का योगदान बमुश्किल दो फीसदी है और भारत का कोई सीधा जोखिम उससे जुड़ा नहीं है, लेकिन जिन भारतीय कंपनियों का ताल्लुक यूरो से है, उनके राजस्व पर मौद्रिक अस्थिरता असर डाल सकती है।
उद्योग चैंबर एसोचैम का कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था ग्रीस को लेकर केंद्रित नहीं है लेकिन अगर ग्रीस कर्ज अदायगी में डिफाल्ट करता है और यह स्थिति यूरोप में संकट के तौर पर उभर कर आती है तो भारत में भी बाकी दुनिया की तरह संकट का प्रभाव महसूस किया जा सकता है। एसोचैम के अनुसार 355 अरब डॉलर से अधिक विदेशी मुद्रा भंडार के साथ सबसे तेज गति से विकास करने की संभावनाओं के साथ भारत ग्रीस संकट से उपजे किसी भी दबाव का सामना करने में सक्षम है। हालांकि चिंताजनक बात यह है कि भारत के वस्तुओं के निर्यात की स्थिति इस वर्ष मजबूत नहीं दिख रही है और अगर यूरोप में संकट पैदा होता है तो निर्यात संभावनाओं के मोर्चे पर स्थिति और खराब होगी।

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