ग्राम्य विकास को बर्बाद होते देखकर भी खामोश क्यों हैं विभाग के मंत्री गोप!

Captureप्रदेश भर के खंड विकास अधिकारियों में बेहद गुस्सा है। ग्राम्य विकास ही केन्द्र और प्रदेश की नीतियों को ग्राम्य स्तर पर लागू करने वाला सबसे बड़ा विभाग है। प्रमुख सचिव चंचल तिवारी के शासनादेश के बाद जब प्रदेश भर के बीडीओ आंदोलन पर उतरे तो मुख्य सचिव के निर्देश पर कृषि उत्पादन आयुक्त ने दोनों पक्षों से बात करके तय कर दिया था कि विकास खंड के स्तर पर खंड विकास अधिकारी ही राजपत्रित अधिकारी होता है लिहाजा सभी विभाग उसके अधीन रहेंगे। इस फैसले से पंचायती राज विभाग में हडक़ंप मच गया क्योंकि अगर ऐसा हो जाता तो प्रमुख सचिव पंचायती राज चंचल तिवारी और उनके गुर्गे 14वें वित्त आयोग के हजारों करोड़ रुपए की हेराफेरी नहीं कर पाते। लिहाजा पूरे प्रदेश से वसूली हुई और लखनऊ में पंचायती राज के कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में सफाई कर्मचारियों को यह कहकर लाया गया कि उन्हें ग्राम्य विकास अधिकारी बना दिया जायेगा। प्रदर्शन के बाद पंचायती राज मंत्री और अधिकारियों के बीच वार्ता में तय हुआ कि ग्राम्य विकास मंत्री और पंचायती राज मंत्री बैठक कर इस मसले पर फैसला लेंगे। सूत्रों का कहना है कि भीड़ तो सफाई कर्मचारियों की जुटाई गई, मगर उन्हें ग्राम्य विकास अधिकारी बनाए जाने पर कोई बात नहीं हुई। प्रदेश भर के खंड विकास अधिकारियों को भरोसा था कि ग्राम्य विकास मंत्री जल्दी ही वार्ता करके तय करा देंगे कि खंड विकास स्तर पर बीडीओ के नियत्रंण में एडीओ पंचायत रहेंगे। पूर्व में भी यह व्यवस्था चली आ रही है। मगर कई दिन बीतने के बाद भी ग्राम्य विकास मंत्री इस मुद्दे पर खामोश हैं और उन्होंने पंचायती राज मंत्री से बात करके कोई फैसला नहीं किया। बताया जाता है कि पंचायती राज मंत्री राज किशोर सिंह और ग्राम्य विकास मंत्री अरविन्द सिंह गोप रिश्तेदार भी हैं। ग्राम्य विकास मंत्री की इस खामोशी से प्रदेश भर के खंड विकास अधिकारी बेहद गुस्से में हैं और उनका कहना है कि वे समझ नहीं पा रहे कि उनके मंत्री गोप अपने ही विभाग को कैसे बर्बाद होने दे रहे है।

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