गोमती नदी में फिर धड़ल्ले से शुरू हुआ अवैध खनन

गायत्री का मंत्री पद क्या बचा हौसले बुलंद हो गए खनन माफियाओं के

प्रदेश सरकार के बदनाम मंत्री गायत्री के गुर्गे नहीं बख्श रहे हैं गोमती नदी कोसीएम दिन-रात एक करके चाहते हैं गोमती को सुधारना मगर उनका मंत्री फेर रहा उनके अरमानों पर पानी

L1 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। 20 अक्टूबर की बात है जब गोमती नदी के किनारे रात-रात भर सैकड़ों ट्रक मिट्टïी और बालू का अवैध खनन कर रहे थे। यह लोग खुले आम कह रहे थे कि वह मंत्री गायत्री प्रजापति के आदमी हैं लिहाजा किसी की हिम्मत नहीं थी कि वह इस अवैध खनन को रोक सके। 4पीएम ने फोटो सहित इस अवैध खनन की खबर छापी तो हडक़ंप मचा और जिलाधिकारी राजशेखर ने हिम्मत दिखाते हुए एक टीम गठित कर दी और इस टीम ने थाना गोसाईगंज और गोमती नगर में एफआईआर दर्ज कराकर कई गाडिय़ां भी सीज कर दी। उस समय गायत्री के मंत्रिमंडल से हटने की बात चल रही थी। लिहाजा डीएम के निर्णय के बाद यह अवैध खनन रुक गया। मगर गायत्री अपनी कुर्सी बचाने में कामयाब हो गए और शायद यह गोमती नदी के लिए दुर्भाग्य का दिन था। तीन हफ्ते बाद गोमती में फिर अवैध खनन उसी स्पीड से शुरू हो गया। इन अवैध खनन माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्होंने बीती रात लगभग 11 बजे उसी स्थान पर दर्जनों गाडिय़ों के साथ फिर अवैध खनन शुरू कर दिया। हालांकि दिन निकलते ही यह लोग जेसीबी मशीन और गाड़ी लेकर इस स्थान से चले गए। जाहिर है कि मंत्री पद बचाने के बाद गायत्री के गुर्गे तीन हफ्ते में हुए अपने नुकसान को पूरा करना चाहते हैं।

गायत्री और गुरदीप की हो ईडी से जांच
भाजपा प्रवक्ता आईपी सिंह ने कहा है कि खनन मंत्री गायत्री प्रजापति डेढ़ लाख हजार करोड़ के खनन कारोबार को अपनी निजी दुकान की तरह चला रहे हैं और प्रमुख सचिव गुरदीप सिंह के साथ वह भी हजारों करोड़ के मालिक हो चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अवैध खनन का पैसा अनाप-शनाप तरीके से बांटकर गायत्री ने अपनी कुर्सी बचाई है और जो पैसा कुर्सी बचाने में खर्च हुआ वह अब गोमती नदी के किनारे खनन से पूरा किया जा रहा है।

सरकार को बदनाम कर दिया गायत्री ने
यूपी सरकार के ऊपर अगर कोई सबसे बड़ा दाग है तो वह गायत्री प्रजापति के कारनामे हैं। समाजवादी पार्टी के कई नेता मानते हैं कि सीएम कई बार गायत्री को हटाने का मन बना चुके थे। मगर गायत्री जानते हैं कि सपा के कुछ और ताकतवर केन्द्रों को साधकर वह अपनी कुर्सी बचा सकते हैं। लिहाजा सरकार की कितनी भी बदनामी हो मगर गायत्री की कुर्सी अपनी जगह बरकरार रहती है। यह बात दीगर है कि गायत्री के इन कारनामों से सरकार की खासी फजीहत हो रही है।

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