गोपनीयता बनाये रखने में सहयोग जरूरी

“देश की जनता मुंबई अटैक का जख्म अब तक नहीं भूली है। इस वारदात को आतंकियों ने बहुत ही घिनौने तरीके से अंजाम दिया था। होटल ताज और नारीमन प्वाइंट में फंसे सैकड़ों लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने और आतंकियों का खात्मा करने में दुनिया की सबसे बेहतर ट्रेनिंग लेने वाले ब्लैक कमांडो को तीन दिन लगा था। दरअसल आतंकियों के साथ मुठभेड़ की लाइव कवरेज, सटीक वीडियो और जानकारी देने की चैनल्स के बीच होड़ मची हुई थी।”

sanjay sharma editor5जम्मू कश्मीर में आतंकवादियों के हमले के बाद केन्द्र सरकार पाकिस्तान को करार जवाब देने की योजना तैयार कर रही है। प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और रक्षामंत्री के बयानों से लगता है कि सरकार उरी में आतंकी हमला करने वालों को सबक सिखाने की पृष्ठभूमि तैयार करने में जुट गई है। तीनों सेनाओं को सरकार की तरफ से इशारा कर दिया गया है लेकिन सरकार की तरफ से आतंकी हमले को लेकर जितनी भी बैठकें की जा रही हैं, उनकी प्रमुख बातों को आम जनता तक पहुंचाने की होड़ में जुटे लोग गोपनीयता को तार-तार कर रहे हैं। जो सरकार की नीतियों और सेना की जवाबी कार्रवाई को अप्रत्यक्ष रूप से दुश्मनों तक पहुंचाने में सहायक साबित हो सकती हैं। इसलिए सरकार और सेना के योजनाओं की गोपनीयता में सहयोग करना जरूरी है।
देश की जनता मुंबई अटैक का जख्म अब तक नहीं भूली है। इस वारदात को आतंकियों ने बहुत ही घिनौने तरीके से अंजाम दिया था। होटल ताज और नारीमन प्वाइंट में फंसे सैकड़ों लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने और आतंकियों का खात्मा करने में दुनिया की सबसे बेहतर ट्रेनिंग लेने वाले ब्लैक कमांडो को तीन दिन लगा था। दरअसल आतंकियों के साथ मुठभेड़ की लाइव कवरेज, सटीक वीडियो और जानकारी देने की चैनल्स के बीच होड़ मची हुई थी। यह सूचना क्रांति के दौर में त्वरित सूचनाओं के आदान प्रदान का निश्चित तौर पर बेहतरीन नमूना था। लेकिन सेना की पूरी कार्रवाई टेलीविजन चैनल्स पर लाइव दिखाने की वजह से आतंकियों को सेना के हर मूवमेंट की जानकारी मिलती रही। इसकी जानकारी होते ही सरकार की अपील पर चैनल्स ने घटना को कुछ समय बाद प्रसारित करने का निर्णय लिया लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। चूंकि इंटरनेट की दुनिया में सब कुछ एक क्लिक में उपलब्ध है। आम जनता हो या आतंकी मोबाइल, टेलीविजन और सोशल साइट्स के माध्मय से गोपनीय घटनाओं की जानकारी भी आसानी से हासिल कर सकते हैं। इसलिए सरकार और सेना की योजनाओं का चैनल्स, न्यूज पोर्टल और सोशल साइट्स पर खुलासा खतरनाक साबित हो सकता है।
इसलिए सेना की तरफ से पाक और आतंकियों को जवाबी कार्रवाई करने की क्या योजनाएं बनाई जा रही हैं। सेना किन-किन संभावित जगहों से हमले कर सकती है। सेना के पास कौन-कौन से हथियार मौजूद हैं। इसकी जानकारी सार्वजनिक करने से बचना होगा। यदि ऐसा हुआ, तो निश्चित तौर पर शेर की मांद में लालची लोगों का समर्थन पाकर घुसे आतंकी ढेर होंगे। उनको अपनी मांद में वापस लौटना पड़ेगा।

Pin It