गृहमंत्री से शिकायत तो चौकी इंचार्ज मुख्य सचिव से शिकायत तो थाने का चार्ज

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
Captureलखनऊ। अधिकारियों की लापरवाही कहें या फिर मेहरबानी। जिस दारोगा की शिकायत गृहमंत्री राजनाथ सिंह से की जा रही है उसी दारोगा को चौकी का चार्ज दे दिया जाता है। हद तो तब हो जाती है जब उस दारोगा की शिकायत मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव गृह से पीडि़त करते हैं तो अगले ही दिन उसे थाने का चार्ज दे दिया जाता है। एक तरफ पुलिसिंग को सही करने के लिए जहां डीजीपी जिले की क्राइम बैठक कर दारोगाओं को पेंच कसते हैं तो दूसरी तरफ कोर्ट द्वारा तीन-तीन बार जारी गैर जमानती वारंट के बाद दारोगा जयशंकर सिंह को शाहजहांपुर जीआरपी थाने का चार्ज दे दिया जाता है। ऐसे में यदि यह कहा जाये कि यूपी पुलिस के अधिकारियों के पास दिखाने और खाने वाले दांत अलग-अलग होते हैं तो गलत नहीं होगा।
बता दें कि राजधानी के कई थानों पर थानाध्यक्ष रहे जयशंकर सिंह के खिलाफ उनकी पत्नी मीनाक्षी सिंह ने महानगर कोतवाली में कई धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया है। इस मामले में न्याय के लिए मीनाक्षी सिंह अपने पिता आरके सिंह, अपनी मां और अपनी मासूम बेटी ऐश्वर्या के साथ गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात कर 17 अगस्त 2014 को न्याय की गुहार लगाती है। जहां गृहमंत्री के सहायक निजी सचिव केपी सिंह ने महानिदेशक, उत्तर प्रदेश पुलिस को 27 अगस्त 2014 को पत्र लिखकर कार्रवाई करने के लिए कहा। लेकिन अधिकारियों ने अपनी मेहरबानी दिखाते हुए जयशंकर सिंह को 22 दिसम्बर 2014 को जीआरपी में शाहजहांपुर जनपद के रौजा चौकी का इंचार्ज बना देते हैं। वहीं दूसरी तरफ दारोगा के ऊपर कार्रवाई करने को लेकर मीनाक्षी अपने परिजनों के साथ 29 अपै्रल 2015 को सचिवालय में मुख्य सचिव आलोक रंजन और प्रमुख सचिव गृह देवाशीष पंडा से मिलती है। दोनों अधिकारी कार्रवाई करने के साथ ही मीनाक्षी को न्याय का आश्वासन देते हैं। लेकिन मीनाक्षी के मुताबिक अगले दिन ही दारोगा जयशंकर सिंह को शाहजहांपुर थाने का चार्ज दे दिया जाता है। सवाल उठता है कि अधिकारियों के पास हाथी के दांत है क्या। दिखाने वाले अलग और खाने वाले अलग। फिलहाल दारोगा के ऊपर यदि अधिकारियों की मेहरबानियां बरस रही है तो स्वाभाविक है कि अधिकारी की मिलीभगत है।
बेटी पैदा होने पर दस लाख रुपये की मांग 

महानगर वायरलेस विभाग में तैनात आरके सिंह ने अपनी पुत्री मीनाक्षी सिंह की शादी 21 जून 2010 को तत्कालीन एसएसपी राजीव कृष्ण के पीआरओ रहे जयशंकर सिंह के साथ की थी। शादी के कुछ माह तक सब कुछ ठीक ठाक रहा लेकिन समय व्यतीत होने के बाद जयशंकर और उनके परिजन मीनाक्षी को ससुराल में प्रताडि़त करने लगे। मीनाक्षी ने नौ मई 2011 को एक बच्ची को जन्म दिया। बच्ची पैदा हुई तो जयशंकर और उसके परिजनों ने मीनाक्षी से दस लाख रुपए की मांग करने लगे। इतना ही नहीं जयशंकर ने अपने चालक द्वारा मीनाक्षी को जबरन उसके घर भेजवा दिया। जहां मीनाक्षी ने इस मामले में महानगर कोतवाली में 19 जुलाई 2012 को धारा 498ए, 323, 506 और 3/4 डीपीएक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराया। मुकदमें की जांच कर रही महिला सब इंस्पेक्टर शिवा शुक्ला ने जयशंकर के खिलाफ आरोप सही पाते हुए कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी। मामला कोर्ट में चला गया। जहां पेशी पर कोर्ट दोनों पक्षों की दलील सुनती रही। लेकिन कई बार के गैर हाजिर होने पर एसीजेएम ने पहली बार चार मार्च 2013 को, दूसरी बार 12 मार्च 2014 को तथा तीसरी बार अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नीतीश कुमार राय ने 19 दिसम्बर 2014 को गैर जमानती वारंट जारी किया था।

 

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