गृहमंत्री का पाक दौरा और सुरक्षा की चुनौती

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तरफ से भी पाकिस्तान के साथ संबंध मधुर बनाने की तमाम कोशिशें की जा चुकी हैं। उन्होंने सबसे पहले अपने शपथ ग्रहण समारोह में नवाज शरीफ को बुलाया। इसके बाद अचानक पाकिस्तान पहुंचकर नवाज शरीफ को जन्मदिन की बधाई दी और उनकी मां के पैर छूकर पूरी दुनिया को भाई-चारे का संदेश देने की कोशिश की लेकिन पाकिस्तान के साथ संबंध सुधारने का प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का दांव हमेशा उल्टा ही पड़ता जा रहा है। 

sanjay sharma editor5पाकिस्तान के इस्लामाबाद में होने वाले दो दिवसीय सार्क सम्मेलन में भारत के गृहमंत्री राजनाथ सिंह शिरकत करने जा रहे हैं। उनके पाक दौरे का आतंकी सरगना हाफिज सईद ने विरोध किया है। इसलिए भारतीय खुफिया एजेंसियां गृहमंत्री की सुरक्षा को लेकर काफी चौकन्ना हो गई हैं। जबकि पाकिस्तान के सामने राजनाथ सिंह की सुरक्षा बड़ी चुनौती बन गई है।
भारत और पाकिस्तान के रिश्तों पर दुनिया भर के मुल्कों की निगाह टिकी हुई है। विश्व का सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका भी भारत और पाकिस्तान के रिश्तों के बीच मध्यस्थता करने की तमाम कोशिशें करता नजर आ रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तरफ से भी पाकिस्तान के साथ संबंध मधुर बनाने की तमाम कोशिशें की जा चुकी हैं। उन्होंने सबसे पहले अपने शपथ ग्रहण समारोह में नवाज शरीफ को बुलाया। इसके बाद अचानक पाकिस्तान पहुंचकर नवाज शरीफ को जन्मदिन की बधाई दी और उनकी मां के पैर छूकर पूरी दुनिया को भाई-चारे का संदेश देने की कोशिश की लेकिन पाकिस्तान के साथ संबंध सुधारने का प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का दांव हमेशा उल्टा ही पड़ता जा रहा है। हाल ही में कश्मीर में बुरहान मलिक की हत्या के बाद कश्मीर में तनाव और उस घटना के विरोध में पाकिस्तान में ब्लैक डे मनाये जाने का वाकया सबसे जेहन में ताजा है। कश्मीर में चल रहे अंतर्विरोध का सामना करने में केन्द्र सरकार को कितनी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इस बात की सच्चाई किसी से छिपी नहीं है। ऐसे में गृह मंत्री का पाकिस्तान के इस्लामाबाद में आयोजि सार्क सम्मेलन में भाग लेने का फैसला सबसे अधिक चर्चा में है। इतना तो तय है कि सार्क सम्मेलन में दोनों देशों के प्रतिनिधियों का आमना-सामना जरूर होगा। उस वक्त दोनों देशों के प्रतिनिधियों का रिएक्शन क्या होगा। इस बात पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं। इसके अलावा पाकिस्तान में गृहमंत्री को भारत के राष्ट्रपति की तरह की खास सुरक्षा का मुद्दा भी छाया रहेगा।
सवाल उठता है कि सार्क देशों के बीच व्यापारिक और वाणिज्यिक संबंधों को बेहतर करने की उम्मीद से आयोजित सम्मेलन में क्या भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद भी छाये रहेंगे। यदि पाकिस्तान ने सम्मेलन में किसी विवादित मुद्दे को उठाया, तो उस पर गृहमंत्री का जवाब दोनों देशों के संबंधों की दिशा को तय करेगा। वहीं गृहमंत्री को आतंकी संगठनों की तरफ से कोई नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई, तो दोनों देशों के रिश्तों में तल्खी और बढ़ेगी। जो कि दोनों देशों की जनता के लिए हितकर नहीं होगी। इसलिए दोनों देशों के प्रतिनिधियों को सम्मेलन में वर्तमान और भविष्य को ध्यान में रखकर बर्ताव करना होगा।

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