गुंडे बन गये हैं लखनऊ के पुलिस वाले, थाने में पीट-पीट कर मार दिया पत्रकार को

सरोजनी नगर थाने बुलाया गया था पत्रकार राजीव चतुर्वेदी को

T1कुछ घंटे बाद पुलिस ने कहा कि मर गए पत्रकार राजीव चतुर्वेदी

मोबाइल की डिटेल मिटाई पुलिस ने, जिससे न मिले कोई सबूत

लगातार बढ़ रही है लखनऊ पुलिस की गुंडागर्दी, किसी को भी धमका रहे हैं पुलिसकर्मी

विपक्ष ने बोला हल्ला, कहा हो पत्रकार के मौत की सीबीआई जांच

प्रमोद अधिकारी
लखनऊ। सरोजनी नगर थानाध्यक्ष ने पत्रकार राजीव चतुर्वेदी को थाने में बुलाया था। उनके एक परिचित का राजीव से पैसे के लेन-देन को लेकर विवाद था। ड्राईवर ने राजीव को थाने के बाहर छोड़ा और इंतजार करने लगा। मगर कुछ घंटों बाद ही हालात बदल गए। लॉकअप में पिटाई से राजीव चतुर्वेदी की मौत हो गई। आनन-फानन में थाने के पीछे के गेट से पुलिस उनको अस्पताल ले गई, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। सूचना मिलते ही भाजपा सांसद कौशल किशोर थाने पहुंचे और वहां उनकी पुलिस से तीखी झड़प हुई। रात में ही सीएम के संज्ञान में मामला आने पर एसएसपी ने एसपी क्राइम को जांच सौंप दी है। पुलिस अब कहानी बना रही है कि राजीव थाने के बाहर बीमारी के कारण गिर पड़े थे, जिससे उनकी मौत हो गई। विपक्ष ने पत्रकार राजीव की मौत को लेकर हंगामा शुरू कर दिया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत बाजपेयी आज चार बजे प्रमुख सचिव गृह से मिलेंगे और घटना की सीबीआई जांच की मांग करेंगे।
सरोजनीनगर थाने गये पूर्व पत्रकार व ब्लॉगर राजीव चतुर्वेदी की संदिग्ध मौत की गुत्थी उलझती जा रही है। एक तरफ राजीव की मौत के मामले में उनके परिचित पुलिस कस्टडी में मौत होने की आशंका जता रहे हैं, जबकि पुलिस इस घटना को स्वाभाविक मौत बताकर पल्ला झाडऩे की कोशिश में लगी हुई है। फिलहाल पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की असल वजह ज्ञात हो सकेगी।
मूलरूप से इटावा के रहने वाले पूर्व पत्रकार व ब्लॉगर राजीव चतुर्वेदी कृष्णलोक कालोनी के बगल में अपने निजी मकान में रहते थे। बताया जा रहा है कि मौजूदा वक्त राजीव आधार गु्रप प्रोजेक्ट इंडिया लिमिटेड नाम से एक फैक्ट्री चला रहे थे। मंगलवार को करीब दो बजे वह अपने चालक सलाही के साथ सरोजनीनगर थाना गये थे। चालक सलाही के मुताबिक राजीव थाने के भीतर जा रहे थे। उसने उन्हें थानाध्यक्ष के कमरे के भीतर तक जाते हुए देखा। उसके बाद से वह बाहर कार में ही बैैठा रहा।

पुलिस मृत हालत में लेकर आई थी सीएचसी
सलाही की मानें तो काफी देर तक जब राजीव चतुर्वेदी बाहर नहीं आये तो उन्होंने राजीव का फोन मिलाया लेकिन फोन नहीं मिला। सलाही को पता चला कि राजीव की तबियत बिगडऩे पर उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है। इस पर सलाही जब सीएचसी पहुंचा तो पता चला कि राजीव की मौत हो चुकी है। डॉॅक्टरों का कहना है कि पुलिस वाले ही राजीव को मृत हालत में सीएचसी लेकर आए थे।
चालक सलाही के मुताबिक राजीव हमेशा स्पोर्ट शू पहनते थे, लेकिन उनके जूते, बेल्ट और चश्मा गायब है। आशंका जताई जा रही है कि राजीव को हवालात में बंद किया गया था। चूंकि आरोपी को जब हवालात में बंद किया जाता है तो उसके जूते, बेल्ट व अन्य सामान को जमा कर लिया जाता है। यही नहीं, मोबाइल की सारी कॉल हिस्ट्री भी मिटी हुई हैै। आरोप है कि पुलिस ने खुद को बचाने के फेर में राजीव के मोबाइल की हिस्ट्री मिटा दी है, जिससे यह बात पता न चल सके कि राजीव को फोन करके थाने बुलाया गया था।

दर्ज हुई थी एफआईआर
बागपत के अग्रवाल मंडी के रहने वाले कारोबारी बिहारीलाल गुप्ता ने पुलिस को जानकारी दी थी कि ठेके के नाम पर राजीव ने उनसे 25 लाख रुपये लिये थे। लेकिन काम नहीं हुआ। इस पर पुलिस ने 31 अक्टूबर को उनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली थी। इसके अलावा कई लोगों ने राजीव पर ठगी करने का आरोप लगाया था। वहीं एसएसपी राजेश पाण्डेय का कहना है कि इस मामले की जांच एएसपी क्राइम को सौंपी गई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की असल वजह ज्ञात हो सकेगी। उनका कहना है कि पड़ताल में सामने आया है कि राजीव पर ठगी के कई आरोप थे, जिसमें लखनऊ, कानपुर और नोएडा के लोग शामिल है। प्रथम दृष्टया यह बात सामने आ रही है कि राजीव स्वंय थाने की तरफ आये थे। उन्हें किसी भी पुलिस कर्मी ने नहीं बुलाया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही असल वजह ज्ञात हो सकेगी।

पत्नी और बेटा भी पहुंचा
राजीव के कई साल पहले पत्नी अपर्णा से संबंध खत्म हो गये थे। वह अकेले ही अपने निजी मकान में रहते थे। उनकी मौत की खबर सुनते ही अपर्णा जो कि बरेली में एसबीआई बैंक में मैनेजर हैं को पता चला तो वह अपने 15 वर्षीय बेटे अत्री चतुर्वेदी के साथ राजधानी पहुंची। इस मामले में अपर्णा ने भी पुलिस की भूमिका की जांच की मांग की है।

दोपहर 12 बजे तक नहीं पहुंचे पंचनामे के दस्तावेज
शव के पोस्टमार्टम के लिए पंचनामे के दस्तावेज होना जरूरी होते हैं। डॉॅक्टर दस्तावेज लेने के बाद ही पोस्टमार्टम करते हैं। मोर्चरी पर मौजूद राजीव के परिचितों का आरोप था कि करीब 12 बजे तक सरोजनीनगर पुलिस ने दस्तावेज ही नहीं पहुंचवाये, जिससे पोस्टमार्टम होने में काफी वक्त बीत गया। कई बार एसओ को भी फोन करके कहा गया लेकिन एसओ ने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया।

थाने में जिस तरह पत्रकार की हत्या की गई वह बेहद शर्मनाक है। मैं आज चार बजे प्रमुख सचिव गृह से मिलने जा रहा हूं। अब समय आ गया है कि उत्तर प्रदेश में जितने भी पत्रकारों की हत्या हुई है उन सबकी सीबीआई जांच होनी चाहिए। सरकार जिस तरह पत्रकारों के दमन में लगी है, उससे साफ है कि प्रदेश में चौथे स्तम्भ का गला घोटा जा रहा है, जिससे सच सामने न आ पाए।
-लक्ष्मीकांत बाजपेयी,प्रदेश अध्यक्ष, बीजेपी

सरोजनी नगर थाने में पत्रकार राजीव चतुर्वेदी की मौत दिल को दहलाने वाली घटना है। अगर थाने में इस तरह पत्रकारों की हत्या कर दी जाएगी तो फिर कानून का राज कहां रह जाएगा। सरकार को चाहिए कि अविलम्ब हाईकोर्ट के मौजूदा जज से इस घटना की जांच कराई जाए, जिससे सच सामने आ सके। पत्रकारों पर हमले लोकतंत्र की हत्या है।
-नसीब पठान, एमएलसी, कांग्रेस

उत्तर प्रदेश सरकार में कानून का राज खत्म हो गया है और जंगलराज चल रहा है। जिस तरह पत्रकार की हत्या की गई वह इस बात का सबूत है कि जो भी सच लिखने की हिम्मत करेगा उसे इसी तरह मार दिया जाएगा। यूपी में पहले भी कई पत्रकारों की इसी तरह हत्या की गई है। पूरे मामले की सीबीआई जांच होनी चाहिए, जिससे सच सामने आ सके।
-ब्रजेश पाठक, पूर्व सांसद, बसपा

राजीव चतुर्वेदी की मौत संदेह पैदा करती है। सरकार की जिम्मेदारी है कि जो लोग पत्रकारिता और लेखन कार्य से जुड़े हैं उनकी पूरी सुरक्षा की जाए। राजीव की मौत की न्यायिक जांच होनी चाहिए, जिससे पत्रकारों में आतंक का माहौल पैदा न हो। सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पत्रकार भयमुक्त होकर अपना काम कर सके।
प्रांशु मिश्रा, अध्यक्ष राज्य मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति

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