गांवों में एंबुलेंस सेवा के बारे में लोगों को जागरूक करने की जरूरत

  • जिले के कई गांवों में मरीजों ने नहीं लिया एंबुलेंस सेवा का लाभ

Capture4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। मरीजों की लाइफ लाइन बनीं 108 एंबुलेंस सेवा का ग्रामीण रूट अभी कमजोर है। प्रदेश भर में दूर दराज के ग्रामीण अंचलों में लोगों को एंबुलेंस सेवा के बारे में जानकारी ही नहीं है। इस कारण लोगों ने सरकार की महत्वाकांक्षी योजना का लाभ नहीं लिया। ऐसे में लोगों को जागरूक करने की जरूरत है।
प्रदेश भर के मरीजों को इमरजेंसी सेवा उपलब्ध कराने वाली संस्था जीवीके के पदाधिकारियों ने राजधानी में 102 और 108 नंबर की इमरजेंसी एंबुलेंस सेवा की उपलब्धियों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि संस्था की तरफ से दी जाने वाली 108 एंबुलेंस सेवा का 57,62,455 लोग ले चुके हैं। इसके अलावा नेशनल एंबुलेंस सर्विस 102 का लाभ 10170819 लोग ले चुके हैं। इन सबके बावजूद प्रदेश के दूर-दराज इलाकों और ग्रामीण क्षेत्रों में बहुत से लोगों ने एंबुलेंस सेवा का लाभ नहीं लिया। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह इमरजेंसी एंबुलेंस सेवा के बारे में लोगों को जानकारी न होना है। इसलिए ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर लोगों के बीच 102 और 108 नंबर इमरजेंसी एंबुलेंस सेवा के बारे में प्रचार -प्रसार करने की जरूरत है। आंकड़ों पर गौर करें तो राज्य के 611 गांवों को चिन्हित किया गया है, जिनमें रहने वाले लोगों ने इमरजेंसी एंबुलेंस सेवा के लिए एक भी काल नहीं किया। इसमें लखनऊ के 31 गांव शामिल हैं। जिले में इमरजेंसी सेवा के लिए एक भी काल नहीं करने वाले गांवों में डिगुरिया, भजमरमऊ, भोकमऊ, भुजासा, चक बीबीपुर, चक पृथ्वीपुर, चकगंजगिरी, दसदोई और फिरोजपुर समेत कुल 31 गांव शामिल हैं।

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