गलतियों से सबक नहीं लेती भाजपा…

भाजपा के लिये ठीक यही होगा कि लोकसभा चुनाव में चली ‘मोदी लहर’ को भूल जाये। क्योंकि अभी हाल ही में कुछ प्रदेशों में हुये चुनाव परिणामों ने यह सिद्ध कर दिया है कि अब ‘मोदी लहर’ के सहारे चुनाव वैतरणी नहीं पार हो सकती। पीएम मोदी के यूपी में बार-बार आने व अन्य केंद्रीय नेताओं के प्रदेश में प्रवास से ऐसा ही प्रतीत होता है कि भाजपा खेमा अब भी मोदी लहर के सहारे है और अपनी गलतियां दोहरा रही है।

sanjay sharma editor5गत दिनों बिहार विधानसभा चुनाव में मिली हार से भाजपा कोई सबक नहीं ले पाई है या यह कहें कि लेना ही नहीं चाहती, तो गलत नहीं होगा। जो गलतियां भाजपा ने बिहार व उससे पूर्व दिल्ली में की थी, वही गलती उत्तर प्रदेश में भी दोहरा रही है। उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव में महज एक साल का वक्त बचा है, ऐसे में प्रदेश में चुनावी माहौल बना हुआ है। अमूमन सारी राजनीतिक पार्टियां चुनावी रणनीति बनाने में जुटी हैं। भाजपा भी मिशन 2017 की तैयारी में जुटी हुई है। इसलिए प्रदेश में दिल्ली से दिग्गज नेताओं का आना-जाना लगा हुआ है। भाजपा उत्तर प्रदेश में अभी प्रदेश स्तर पर पार्टी को मजबूत नहीं कर पाई है और ‘बाहरी’ नेताओं के हाथों में यूपी की कमान देने की चर्चाएं जोरों पर हैं। इससे यही आशंका जन्म ले रही है कि कहीं भाजपा फिर वही गलतियां न करे जो बिहार व दिल्ली के चुनाव के दौरान कर चुकी है। कहना गलत न होगा कि अगर ऐसा होता है तो भाजपा को फिर वही झटका लग सकता है जो मोदी लहर समाप्त होने के बाद लगना शुरू हुआ।
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के लखनऊ आने और बैठकें करने का पार्टी कार्यकर्ताओं में सकरात्मक संदेश जायेगा या नकारात्मक, यह कहना अभी से ठीक नहीं होगा। लेकिन यह तय है कि किसी भी संगठन के जमीनी स्तर के कार्यकर्ता अगर खुद को उपेक्षित महसूस करते हैं, तो संगठन को उसको परिणाम भुगतना पड़ता है। शायद यही वजह रही कि हाल ही में यूपी के पंचायत चुनाव और गुजरात, छत्तीसगढ़ में हुए निकाय चुनावों में भाजपा को हार का मुंह देखना पड़ा। गत दिनों हुये बिहार व दिल्ली विधानसभा चुनावों में क्षेत्रीय नेताओं व कार्यकर्ताओं की कुंठा का परिणाम भी भाजपा देख चुकी है।
भाजपा के लिये ठीक यही होगा कि लोकसभा चुनाव में चली ‘मोदी लहर’ को भूल जाये, क्योंकि अभी हाल ही में कुछ प्रदेशों में हुये चुनाव परिणामों ने यह सिद्ध कर दिया है कि अब ‘मोदी लहर’ के सहारे चुनाव वैतरणी नहीं पार हो सकती। पीएम मोदी के यूपी में बार-बार आने व अन्य केंद्रीय नेताओं के प्रदेश में प्रवास से ऐसा ही प्रतीत होता है कि भाजपा खेमा अब भी मोदी लहर के सहारे है और अपनी गलतियां दोहरा रही है। प्रदेश स्तर, जिले स्तर व बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं को अगर राष्टï्रीय स्तर के नेताओं का सही निर्देशन मिले तभी संगठन प्रभावी परिणाम हासिल कर सकता है, न कि बड़े नेताओं द्वारा क्षेत्रीय नेताओं के कार्य में अतिक्रमण से। अच्छा होगा कि पार्टी वास्तविकता से रूबरू हो और कार्यकर्ताओं को हतोत्साहित न होने दे। तभी वास्तविक परिणाम संभव हैं।

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