गलतियों से लें सबक

जो व्यक्ति गुजरे समय में की गई गलतियों से सबक लेकर मेहनत और लगन के साथ सकारात्मक दिशा में कार्य करता है, दुनिया उन्हीं को सलाम करती है। बार-बार और जानबूझकर गलती करने वाले लोग धीरे-धीरे गर्त की ओर जाते हैं। सफल व्यक्ति भी अपनी गलतियों को बार-बार दोहराता है तो उसे नायक से खलनायक बनने में देर नहीं लगता।

sanjay sharma editor5हम नए साल में प्रवेश कर चुके हैं। आज पूरे दिन लोगों ने एक-दूसरे को बधाई संदेश दिया और नया वर्ष मंगलमय की कामना की। 2015 बीत चुका है और रह गई हैं बहुत सारी खट्टïी-मीठी यादें। प्रत्येक बीतने वाला वर्ष सभी के लिए यादगार होता है। उस दौर में कुछ न कुछ ऐसा होता है जो हमारी स्मृति में कैद होकर रह जाता है। बीतने वाला साल कुछ न कुछ देकर ही जाता है। नहीं कुछ तो, एक अनुभव तो मिलता ही है। गलतियों से सबक तो अच्छे कार्यों से प्रेरणा। प्रेरणा जहां आदमी को लगातार अच्छे कार्य करने के लिए प्रेरित करती है तो गलतियां सबक का पाठ पढ़ाती हैं कि अब दोबारा गलती नहीं करनी है। यह सभी के लिए लागू होता है। जो व्यक्ति गलतियों से सबक लेकर मेहनत और लगन के साथ सकारात्मक दिशा में कार्य करता है, दुनिया उन्हीं को सलाम करती है। बार-बार और जानबूझकर गलती करने वाले लोग धीरे-धीरे गर्त की ओर जाते हैं। सफल व्यक्ति भी अपनी गलतियों को बार-बार दोहराता है तो उसे नायक से खलनायक बनने में देर नहीं लगता।
उदाहरण के लिए कैलाश सत्यार्थी, सुंदर पिचाई, अजीत डोभाल हैं, जो 2015 के नायक बनकर उभरे। अपने अच्छे कार्यों की वजह से चर्चा में रहे। गूगल के सीईओ का कार्यभार संभालने वाले सुंदर पिचाई का सफर बहुत ही रोचक रहा है। उनकी मेहनत और लगन ने ही उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया। कैलाश सत्यार्थी जिन्होंने पूरी दुनिया में भारत का मान बढ़ाया। शांति के लिए उन्हें नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। श्री सत्यार्थी को यह मुकाम ऐसे ही नहीं मिला है। समाज के लिए कुछ करने का जुनून और उनके अथक प्रयास और लगन ने ही उन्हें दुनिया के लिए प्रेरणास्रोत बना दिया। यह तो हो गई नायकों की बात। कई ऐसे लोग रहे जिन लोगों ने अपनी गलतियों से सबक न लेकर दोबारा गलती की जिसकी वजह से 2015 में खलनायक बनकर उभरे। उदाहरण के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, ललित मोदी, गजेन्द्र चौहान सहित कई ऐसे नाम हैं जिनकी छवि प्रभावित हुई। 2014 के चुनाव में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश में नायक बनकर उभरे थे। जनता ने उन पर विश्वास किया और उन्हें केन्द्र की सत्ता में बिठा दिया। लेकिन मोदी ने चुनावों में जनता से इतने लंबे-चौड़े वादे कर लिए कि उन्हें धरातल पर पूरा कर पाना संभव नहीं था। और उसी का परिणाम है कि भाजपा लगातार हार का सामना कर रही है। इतना ही नहीं यह सब होने के बाद भी मोदी का बड़बोलापन थम नहीं रहा है। आईपीएल के कर्ताधर्ता ललित मोदी की आज क्या हालत है, इससे सभी वाकिफ हैं। ऐसे अनेक उदाहरण हैं। इसलिए जरूरी है कि हम गलतियों से सबक लेकर नए वर्ष में कुछ नया और प्रेरणादायक कार्य करें। उम्मीद के साथ…
नव वर्ष मंगलमय हो

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