गर्मी से बेहाल लोगों को न छॉव न पानी

लोगों को उम्मीद थी कि कुछ महीनों बाद ही चुनाव होने जा रहे हैं ऐसे में उनको ठंडा पानी पिलाने के लिए कुछ राजनेता तो कम से कम आगे आएंगे और उन्हें राहत देंगे। लोगों ने देखा भी यही था कि चुनाव के समय लोग राहत देने के लिए प्याऊ बनाते थे या फिर उन्हें छॉव देने के लिए कुछ व्यवस्था करते थे। यह सारी कवायद इसी बात को लेकर होती थी कि चुनाव के समय लोगों को यह संदेश जा सके कि वह वास्तव में लोगों के प्रति बहुत संवेदनशील है।

sanjay sharma editor5आसमान से आग बरस रही है और जमीन पर लोग बेहाल हैं। कोई समझ नहीं पा रहा कि इस मुसीबत की घड़ी में वह राहत की सांस कहां से महसूस करे। लखनऊ में भी लगातार तापमान बढ़ रहा है और लोग परेशान हैं। गर्मी के साथ-साथ लगता है मानो लोगों की संवेदनशीलता भी कम होती जा रही है क्योंकि किसी को भी इतना समय नहीं है कि वह इस बात पर विचार कर सके कि लोगों को ठंडा पानी और राहत की कोई कोशिश अपने स्तर पर कर सके। कई-कई किलोमीटर दूर तक कहीं पर भी लोगों को न तो छॉव नजर आती है और न ही पीने के पानी का इंतजाम।
लोगों को उम्मीद थी कि कुछ महीनों बाद ही चुनाव होने जा रहे हैं ऐसे में उनको ठंडा पानी पिलाने के लिए कुछ राजनेता तो कम से कम आगे आएंगे और उन्हें राहत देंगे। लोगों ने देखा भी यही था कि चुनाव के समय लोग राहत देने के लिए प्याऊ बनाते थे या फिर उन्हें छॉव देने के लिए कुछ व्यवस्था करते थे। यह सारी कवायद इसी बात को लेकर होती थी कि चुनाव के समय लोगों को यह संदेश जा सके कि वह वास्तव में लोगों के प्रति बहुत संवेदनशील है।
मगर राजनेता ठहरे अपना मतलब खत्म हुआ तो उन्हें किसी की याद कहा आती। अगर चुनाव न हो तो वह किसी का दु:ख दर्द नहीं पूछे, मगर सवाल यह भी है कि हम सिर्फ राजनेताओं पर ही आश्रित क्यों रहें। समाज के जागरूक लोग भी आखिर इस बात का ध्यान क्यों नहीं रखते कि समाज के प्रति उनकी भी कुछ जिम्मेदारी है। अगर वह इस बात का ध्यान रख लेते तो भीषण गर्मी में पानी के लिए तड़प रहे लोगों को कुछ तो राहत मिल जाती।
हम और आप मिलकर भी यह पुण्य का काम तो कर ही सकते हैं। न सिर्फ आदमी बल्कि पशु-पक्षी भी पानी के कारण बेहाल हैं। हम सब उनकी थोड़ी मदद तो कर ही सकते हैं। अगर मिट्टïी के प्याले में अपनी छत पर थोड़ा पानी रख देंगे तो हमारा यह छोटा सा प्रयास कई पक्षियों की जान बचाने के काम आ सकता है। अगर हम अपने घर या दफ्तर के बाहर एक बड़ा घड़ा पानी रख देंगे तो राह चलते न जाने कितने लोग हमको दुआ देंगे। प्यासे आदमी को पानी पिलाने से बेहतर भला और क्या हो सकता है।
तो आइए एक छोटी सी कोशिश हम और आप मिलकर करें कि हम इस गर्मी में कुछ लोगों की प्यास बुझा पायेंगे।

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