गरीबों की झोपडिय़ों पर आग का सितम

  • खुले आसमान के नीचे जिन्दगी गुजारने को मजबूर सैकड़ों परिवार
  • गरीबों के आशियानों की आग से सुरक्षा प्रशासन के लिए बनी चुनौती

Capture4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। राजधानी में घास-पूस की झोपडिय़ों में रहने वाले गरीबों पर आग का भयंकर सितम बरस रहा है। शहर के वीआईपी क्षेत्रों और कालोनियों के आस-पास बनी झोपड़ी में रहने वाले सैकड़ों परिवारों का आशियाना आग की चपेट में आकर खाक हो चुका है। इस कारण सैकड़ों गरीब परिवार भयंकर धूप और गर्मी में खुले आसमान के नीचे जिन्दगी गुजारने को मजबूर हैं। झोपड़ी में रहने वाले लोगों के चेहरे और आंखों में आग का जबरदस्त खौफ नजर आ रहा है। इन सबके बावजूद प्रशासनिक अधिकारी झोपड़ी में रहने वाले लोगों की आग से सुरक्षा के प्रति गंभीर नहीं हैं।
जिले में पिछले पन्द्रह दिनों में शहरी क्षेत्र के अंतर्गत एक के बाद एक भयंकर अग्निकांड की घटनाएं हुई हैं। चिलचिलाती धूप और गर्मी के बावजूद अग्निकांड में फंसे लोगों को सही सलामत निकालना भी बड़ा ही जोखिमभरा काम है। इसके बावजूद फायर ब्रिगेड के जवान जान पर खेलकर लोगों की जान और घरेलू सामान बचाने के लिए जूझते रहते हैं लेकिन झोपड़ी में रहने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन की तरफ से कोई भी प्रयास नहीं किया जा रहा है। आंकड़ों पर ध्यान दें तो पिछले दो सप्ताह में शहर के अंदर अग्निकांड की शिकार होने वाली अधिकांश झोपड़ पट्टियां वीआईपी कालोनियों और क्षेत्रों के आस-पास बनी थीं। इनमें से बहुत सी झोपड़ पट्टियां अवैध रूप से बनी थीं, जिनका लेखा-जोखा रखने वाला और झोपड़ पट्टियों में रहने वालों का हाल-चाल जानने वाला कोई नहीं था। जबकि आग लगने के बाद झोपड़ी में रहने वाले परिवारों के लिए सिर पर छत और खाने का इंतजाम करना प्रशासनिक अधिकारियों की चिंता का विषय बन चुका है। वहीं रिहायशी इलाकों में अवैध रूप से बनी झोपड़ पट्टियों में लग रही आग से वीआईपी लोग भी खुद को असुरक्षित महसूस करने लगे हैं। उन्हें झोपड़पट्टी में लगी आग वीआईपी मकानों तक पहुंचने का डर सताने लगा है। इसलिए वीआईपी मोहल्लों में रहने वाले लोगों ने अपने आस-पास बनी अवैध झोपड़पट्टियों को खाली करवाने की मांग शुरू कर दी है। उनका कहना है कि क्षेत्र में अवैध रूप से बनी झोपडिय़ां कभी भी बड़े खतरे का कारण बन सकती हैं। इसलिए झोपड़पट्टी में रहने वाले लोगों को कहीं दूसरी जगह विस्थापित किया जाए। इन सबके बावजूद प्रशासन मामले को गंभीरता से लेकर कार्रवाई नहीं कर रहा है।
चूल्हे व छोटे सिलेण्डर से भी आग लगने का खतरा
गोमतीनगर पुलिस और अग्निशमन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार हाल ही में खरगापुर क्रासिंग के पास झोपडिय़ों में लगी आग चूल्हे में खाना बनाते समय उठी चिंगारी की वजह से लगी थी। इसके अलावा झोपड़ पट्टी के पास मार्केट से लाए गये अवैध छोटे सिलेंडर की वजह से आग ने भयावह रूप धारण कर लिया। सिलेंडर में मौजूद एलपीजी गैस तपिश की वजह से आग का गोला बन गई। इसके बाद भयंकर आग की लपटें निकलने लगीं। जिनको बुझाने में अग्निशमन विभाग के जवानों से पसीने छूट गये। इसलिए घरों में चूल्हे और सिलेंडर का इस्तेमाल भी सावधानीपूर्वक करना चाहिए।
हाईटेंशन वायर भी साबित हो रहे जानलेवा
गर्मी के मौसम की शुरुआत के साथ ही गेहूं की फसलों में लगने वाली आग की प्रमुख वजह बिजली के तारों में शार्ट सर्किट रही है। इस कारण कई-कई एकड़ गेहूं की फसलें जलकर राख हो गईं। ऐसे में हाईटेंशन लाइन के तारों से निकलने वाली चिंगारी से फसलों और घरों की सुरक्षा भी बड़ी चुनौती है। आलम ये है कि शहरी और ग्रामीण दोनों ही क्षेत्रों में हाईटेंशन लाइन के तारों का जाल बिछा हुआ है, जो गर्मी में आग लगने का प्रमुख कारण बन सकता है। उदाहरण के तौर पर विकास नगर में मिनी स्टेडियम के पास व इंजीनियरिंग कॉलेज के पीछे बसी झोपडिय़ों के ऊपर से हाईटेंशन लाइन गुजरती है। इससे बार-बार चिंगारी निकलती रहती है। इस कारण झोपडिय़ों में रहने वाले लोग खौफ में जी रहे हैं। इन्हें हर पल अपने आशियाने में आग लगने का डर सताता रहता है।

एक हफ्ते में दो सौ झोपडिय़ां जलकर राख

गोमतीनगर के खरगापुर रेलवे क्रासिंग व उजरियांव गांव, डालीबाग के बालू अड्डा स्थित विधायक निवास समेत दर्जन भर से अधिक जगहों पर आग लग चुकी है। इन घटनाओं में करीब दो से ढाई सौ गरीबों की झोपडिय़ां जलकर राख हो गईं। झोपड़ पट्टियों में रखे कबाड़ और अन्य घरेलू सामान की वजह से आग ने विकराल रूप धारण कर लिया था, जिसकी वजह से आग पर काबू पाने के लिए अग्निशमन विभाग के जवानों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। आंकड़ों पर गौर करें तो 30 अप्रैल को विधायक निवास के पास झोपड़ पट्टियों में भयंकर आग लगी थी। इस दौरान झोपड़ पट्टियों के आस-पास मौजूद फर्नीचर की दुकानें व गोदाम भी जलकर राख हो गए थे। इस वजह से झोपड़ पट्टियों के आस-पास रहने वाले लोगों में आग का भयंकर खौफ दिखाई देने लगा है। वहीं प्रशासन के सामने पीडि़तों को राहत सामग्री उपलब्ध कराना और गरीब परिवार के आवास का इंतजाम बड़ी चुनौती बन गया है।

आग में घी का काम करता है कबाड़

शहरी क्षेत्र के अंतर्गत विभिन्न क्षेत्रों में झोपड़पट्टियों में रहने वाले लोग कूड़ा और कबाड़ बीनकर अपना गुजारा करते हैं। इसलिए अधिकांश झोपड़ पट्टियों के अंदर और बाहर कूड़े का ढेर पड़ा रहता है। इसमें कागज, प्लास्टिक की बोतल और पालीथीन समेत कई अन्य सामान होते हैं। जो हल्की की चिंगारी के संपर्क में आते ही भयावह रूप ले लेता है। इसकी वजह से आग पर काबू कर पाना मुश्किल होता है। ऐसे में प्रशासन को झोपड़ पट्टियों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा के साथ ही आग लगने के कारणों का निराकरण करने के भी पुख्ता इंतजाम करने की जरूरत है।

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