गरिमा ने बचाई पुलिस की ‘गरिमा’

मडिय़ावं थाना क्षेत्र में दिनदहाड़े छात्रा के अपहरण के प्रयास का मामला

Captureगणेश जी वर्मा
लखनऊ। यदि एक मिनट की देर होती तो शायद लखनऊ पुलिस के अध्याय में सोमवार को एक और छात्रा के अपहरण का मामला जुड़ जाता। पुलिस को बहादुर छात्रा व उसकी सहेली गरिमा का शुक्रिया अदा करना चाहिये कि एक बड़ी घटना को अंजाम देने में अपराधी विफल हुये तो लखनऊ पुलिस की भी फजीहत होने से बच गई। यदि यह कहा जाये कि सडक़ पर निकलने वाली छात्रायें या महिलायें अपनी सुरक्षा को लेकर खुद सक्षम हों तो शायद लखनऊ पुलिस की इसी तरह से गरिमा बचाने के लिये मौके पर कोई न कोई गरिमा पहुंच ही जायेगी।
राजधानी पुलिस कितनी गम्भीर है इसका अंदाजा तो जानकीपुरम में पड़ी डकैती, आये दिन महिलाओं संग छेडख़ानी व ऐसी कई अन्य घटनाओं से ही लगाया जा सकता है। हर घटना में देर से पहुंचने वाली पुलिस से राह चलती छात्राओं और महिलाओं को कैसे सुरक्षा मिलेगी यह एक प्रश्न है। फिलहाल दूसरे दिन भी पुलिस को अपहरणकर्ताओं के बारे में कोई सुराग नहीं मिला है। वहीं दूसरी तरफ छात्राएं अंशिका के साथ हुई घटना को लेकर दहशत में हैं।
बता दें कि मडिय़ावं थाना क्षेत्र के भरत नगर निवासी शशिकांत पांडेय बसपा कार्यकर्ता हैं। शशिकांत की सबसे छोटी बेटी अंशिका (15) सेंट एंटोनी स्कूल में कक्षा 11 की छात्रा है। सुबह लगभग सात बजे वह साइकिल पर सवार होकर स्कूल जा रही थी। तभी रास्ते में भगौती गेस्ट हाउस और पेप्सी गोडाउन के बीच में बिना नम्बर की भूरे रंग की कार पर सवार दो बदमाशों ने अंशिका से उसके घर के पास स्थित योगिता मांटेसरी स्कूल का पता पूछा। अंशिका स्कूल का पता बताने लगी। इसी बीच कार की पीछे वाली सीट पर अधेड़ उम्र का बैठा हुआ व्यक्ति जो माथे पर सफेद रंग का टीका लगाये हुये था, उसने छात्रा को कार के अंदर खींच लिया। अंशिका जब तक कुछ समझ पाती बदमाश ने एक बोतल निकाल कर उसकी आंखों में कुछ डालने का प्रयास करने लगा। अंशिका को लगा कि अब उसका बचना मुश्किल है तो उसने साहस दिखाते हुये बदमाश के हाथ पर दांत से काट लिया। अचानक हुये इस हमले से बदमाश की पकड़ ढीली हुई तो अंशिका कार से बाहर निकल गई। इससे तिलमिलाये बदमाश ने अंशिका के ऊपर चाकू जैसी किसी वस्तु से वार कर दिया। इसी बीच प्रतिदिन थोड़ी दूर पर अपनी सहेली का इंतजार कर रही गरिमा देर होने के कारण वापस अंशिका के घर की तरफ आने लगी। जहां उसने देखा कि अंशिका की साइकिल नीचे गिरी पड़ी है और कार में बैठे हुये बदमाश से अंशिका की झड़प हो रही है। यह नजारा देखकर गरिमा ने बहादुरी दिखाई और शोर मचाने लगी। गरिमा के शोर मचाने से बदमाशों के हौसले पस्त हुये और वह भाग खड़े हुये। यदि एक मिनट की देर होती तो शायद लखनऊ पुलिस की किरकिरी होने से कोई नहीं बचा पाता। यह तो कहिये कि गरिमा ने उचित समय पर पहुंचकर लखनऊ पुलिस की गरिमा रख ली।

…कहीं फिरौती के लिये तो नहीं होना था अपहरण
अंशिका का अपहरण कहीं फिरौती के लिये तो नहीं हो रहा था। अंशिका के पिता ने बताया कि उनकी किसी से दुश्मनी नहीं है। दो माह पूर्व भी उसी जगह पर अंशिका को एक कार ने टक्कर मारी थी। लेकिन वह एक सामान्य घटना थी। जिस प्रकार से बदमाश गली में अपहरण का प्रयास कर रहे थे उससे साबित हो रहा है कि बदमाशों ने रेकी की थी। जिस दौरान घटना हो रही थी उस दौरान गरिमा के अलावा कोई और उस रास्ते से नहीं गुजरा। आशंका जताई जा रही है कि कुछ बदमाश गली के दोनों तरफ खड़े होंगे जो उस रास्ते से गुजरने वाले राहगीरों को कोई न कोई बहाना करके रोकने में लगे होंगे।

Pin It