गंदी राजनीति, गंदे नेता

  • गाली के बदले गाली की राजनीति 
  • गिरता जा रहा राजनीति का स्तर
  • मजबूरी में दयाशंकर के परिवार के साथ खड़ी हुई बीजेपी
  • दलित वोटरों के चक्कर में सवर्ण वोटरों को खोने के डर ने भाजपा की बढ़ाई कंपकपी
  • दयाशंकर के परिवार को मिली गालियों के विरोध में पूरे यूपी में आज भाजपा का प्रदर्शन
  • दयाशंकर के परिवार के समर्थन में लखनऊ पहुंचे प्रमोद महाजन के बेटे राहुल महाजन

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क

23 JULY PAGE11लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी के हजारों कार्यकर्ताओं का हुजूम आज सुबह कैसरबाग स्थित बीजेपी कार्यालय से नारेबाजी करते हुए निकला। इसके बाद हजरतगंज चौराहे पर पहुंचकर कार्यकर्ता उग्र हो गये। इन कार्यकर्ताओं ने भीड़ रोकने के लिए लगी बेरीकेडिंग गिरा दी। पुलिस से बीजेपी कार्यकर्ताओं की झड़प भी हुई। कार्यकर्ताओं की भीड़ को संभालना मुश्किल हो गया। इसलिए पुलिस को भीड़ नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग भी करना पड़ा। प्रदेश भर में आज भाजपा प्रदर्शन कर रही है। उधर बसपा नेताओं के आक्रोश को देखते हुए स्वाती सिंह को सुरक्षा देने के आदेश कर दिए गए हैं।

शुरुआती दौर में भाजपा दयाशंकर के बयान से सकते में आ गई थी। उसे लगा कि इस बयान के बाद उसकी दलितों को अपने पक्ष में लाने की महीनों की मेहनत पर पानी फिर जायेगा। मगर जब बसपा नेताओं ने दयाशंकर की बेटी, पत्नी और मां को अपशब्द कहे तो सोशल मीडिया पर इसका जबरदस्त विरोध हुआ। खासतौर से सवर्ण जाति के लोग इस मुद्दे पर एकजुट हो गए। क्षत्रियों ने इसे स्वाभिमान का मुद्दा बनाया तो अधिवक्ता भी दयाशंकर के पक्ष में आ गए।

जो भाजपा कल तक दयाशंकर को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा रही थी वह परेशान होने की हालत में पहुंच गई। भाजपा का शीर्ष नेतृत्व समझ गया कि दयाशंकर के पक्ष में सवर्ण जाति एकजुट हो रही है और अगर वह दलितों को लुभाने के चक्कर में पड़े तो दलित मिले न मिले पर सवर्ण जाति उनसे अलग होकर सपा या कांग्रेस के पक्ष में जा सकते हैं। यह हालात देखकर तय किया गया कि दयाशंकर के पक्ष में खड़ा हुआ जाए और पूरे प्रदेश में दयाशंकर की पत्नी के पक्ष में माहौल बनाया जाय।
बसपा भी यही चाहती थी कि यह मामला और तूल पकड़े जिससे दलितों में यह संदेश जा सके कि भाजपा दलित विरोधी है। ऐसा होने से जो दलित अब तक बसपा से अलग दिख रहे हैं वह बसपा के पक्ष में आ जायेंगे। इसीलिए मायावती भी इस आंदोलन को धार देने में जुट गई हैं।
उधर भाजपा इस आंदोलन में भी गुटबाजी से नहीं उबर पा रही है। आज लखनऊ में भी पार्टी दो गुटों में बंटी हुई नजर आई। पार्टी के कार्यकर्ताओं ने अलग-अलग स्थानों पर प्रदर्शन किया। प्रमोद महाजन के बेटे राहुल महाजन भी आंदोलन को धार देने के लिए लखनऊ पहुंच गए। उन्होंने कहा कि ऐसा लग रहा है कि हम तालिबानी युग में रह रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह बहन और बेटी के सम्मान में खड़े रहेंगे।

उधर संघ इस घटनाक्रम पर बारीकी से निगाह बनाए हुए है। उसको लग रहा है कि इस आंदोलन से उसका सालों से चल रहे अभियान पर खासा असर पड़ जाएगा। संघ की चिंता यह है कि अगर दलितों में यह संदेश चला गया कि भाजपा सिर्फ सवर्ण जाति की पार्टी है तो आने वाले समय में भाजपा को इसके गंभीर नतीजे भुगतने पड़ सकते हैं। संघ को इस बात की भी चिंता लग रही है कि गुजरात से लेकर यूपी तक के दलितों में यह संदेश लगातार जा रहा है कि भाजपा दलितों के विरोध में काम कर रही है।
उधर बसपा रोहित वेमुला से लेकर गुजरात में दलितों की पिटाई और देश भर में दलितों के उत्पीडऩ के मुद्दे को जोर-शोर से उठाकर भाजपा को दलित विरोधी साबित करने में जुट गई है। हालांकि बसपा को भी इस आंदोलन से यह नुकसान जरूर होगा कि उसके साथ जुड़ रहे सवर्ण मतदाता उससे किनारा कर सकते हैं।

रक्षा बंधन आने वाला है, बीजेपी के लोग बुआ जी से मांग लो माफी: अखिलेश

सीएम अखिलेश यादव ने राजनीति के गिरते स्तर पर कहा कि मंच से ऐसी अभद्र भाषा का प्रयोग हैरान करने वाला है। उन्होंने कहा कि बीएसपी के नेताओं ने ज्यादा गंदी गालियां दीं, जबकि दयाशंकर ने जो बोला वह भी गलत था। उन्होंने दोनों पार्टियों पर चुटकी लेते हुए कहा कि दोनों पार्टियां मजबूती से लड़ें संरेडर न करें। उन्होंने कहा कि रक्षा बंधन आ रहा है। बीजेपी के लोग पहले भी बुआ जी से राखी बंधवाते रहे हैं। इस बार बुआ जी बोलकर फिर राखी बंधवां लें और माफी मांग लें। उन्होंने कहा कि गलती से भी बुआ जी आ गईं तो बाहर चप्पल उतार कर आना पड़ेगा। सीएम ने कहा कि अदब के शहर लखनऊ में बसपा के नेताओं ने जो बोला वह निंदनीय है। हर हालत में महिलाओं का सम्मान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि कानून अपना काम करेगा और जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

दलित वोटों की नाराजगी के चलते गोरखपुर में बसपा के खिलाफ नहीं बोले मोदी

कई महीनों से पीएम नरेन्द्र मोदी और अमित शाह दलितों को अपने पाले में लाने की भरसक कोशिश कर रहे थे। गुजरात में दलितों की पिटाई और यूपी में दयाशंकर के बयान ने भाजपा का पूरा खेल बिगाड़ दिया। पीएम मोदी को एहसास हो गया कि इस नाजुक दौर में मायावती के लिए कुछ भी कहना दलितों को और भडक़ा सकता है। दरअसल दयाशंकर ने बसपा सुप्रीमों के खिलाफ जो भाषा बोली, उसने दलितों के स्वाभिमान को ठेस पहुंचा दी, जो दलित मायावती से नाराज भी थे, वह ऐसी भाषा सुनने के बाद मायावती के पक्ष में नजर आने लगे। यहीं कारण था कि कल गोरखपुर में अपनी रैली में पीएम मोदी मायावती पर हमला करने से बचते नजर आए। वह समझ गए कि अगर उन्होंने मायावती के खिलाफ यहां भी हमला बोला तो यह भाजपा को और नुकसान पहुंचा सकता है।

स्वाति सिंह को टिकट दे सकती है बीजेपी

मायावती के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग करने के मामले में दयाशंकर को छह साल के लिए पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाने वाली बीजेपी उनकी पत्नी स्वाति सिंह के साथ खड़ी है। बीजेपी नेताओं को अच्छी तरह मालूम है कि अपने पति के बचाव में जिस तरह स्वाति सिंह समाज के सामने आईं। विकट परिस्थिति में भी मजबूती से अपनी बात जनता और पुलिस के सामने रखी। बसपा सुप्रीमो मायावती और पार्टी के अन्य बड़े नेताओं के खिलाफ कानूनी लड़ाई लडऩे का जज्बा दिखाया। वह उनके अन्दर छिपे जुझारुपन और कुशल नेतृत्व की झलक दिखाता है। बीजेपी को आने वाले चुनाव में ऐसे ही चेहरों की तलाश है। इसलिए पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्या और यूपी प्रभारी ओम माथुर के निर्देश पर कार्यकर्ताओं का समूह योजना बनाकर स्वाति के साथ खड़ा हुआ है। ऐसा करके बीजेपी सवर्ण वोट बैंक और बसपा से नाराज होने वालों को अपने साथ मिलाने की कोशिश कर रहा है। इसलिए आने वाले चुनाव में स्वाति सिंह को बीजेपी की तरफ से टिकट मिलने की अटकलें लगाई जा रही हैं। यदि बीजेपी कामयाब रही तो स्वाति सिंह बसपा के खिलाफ तुरुप का पत्ता साबित हो सकती हैं।

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