खिलाडिय़ों के साथ ‘खेल’

पहलवान नरसिंह के पास ओलंपिक खिलाड़ी का वैध मान्यता कार्ड भी था लेकिन वाडा के एक फैसले ने नरसिंह ही नहीं बल्कि देश की सवा सौ करोड़ जनता के अरमानों पर पानी फेर दिया। सबसे बड़ी बात यह है कि खेलों में हमेशा क्रिकेट को महत्व देने वाले लोग भी नरसिंह के मामले में दु:ख जाहिर कर रहे हैं।

sanjay sharma editor5भारतीय पहलवान नरसिंह यादव को रियो ओलंपिक में कुश्ती प्रतियोगिता में हिस्सा लेने से रोक दिया गया। डोपिंग विवाद के चलते वाडा ने उनके खेलने पर रोक लगा दी। नरसिंह भारत में डोपिंग विवाद में घिर गए थे। उनका डोप टेस्ट पॉजिटिव आया था लेकिन बाद में नाडा ने खेलने की अनुमति दी थी। इसलिए उनको रियो भेज दिया गया। इसके बाद अचानक रियो में वाडा ने उनके खेलने पर रोक लगा दी। हालांकि यह निर्णय आने से कुछ घंटों पहले यह खबर भी चली थी कि नरसिंह को क्लिन चिट मिल गई लेकिन देर रात उन पर चार साल तक खेलने पर प्रतिबंध लगाये जाने का फैसला आ गया। इस तरह विश्वस्तर पर अपने बेहतरीन खेल का सपना देखने वाले नरसिंह के अरमानों पर पानी फिर गया। यदि यह कहा जाये कि उनके साथ न सिर्फ किस्मत बल्कि ‘अपनों’ ने भी ‘खेल’ खेला है, तो गलत नहीं होगा। ये अलग बात है कि उसके पुख्ता सबूत न तो नरसिंह के पास हैं और न ही खेल प्रेमियों के पास। इसलिए वाडा का निर्णय सबने स्वीकार कर लिया।
रियो ओलंपिक में नरसिंह के नहीं खेलने पर भारत की पदक की उम्मीदों को गहरा झटका लगा है। इससे पहले भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) ने कहा था कि वह डोपिंग विवाद में फंसे पहलवान नरसिंह यादव के साथ मजबूती से खड़ा है। डब्ल्यूएफआई के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह ने भी कहा कि नरसिंह के पास ओलंपिक में खेलने का पूरा मौका है। उनके पास ओलंपिक खिलाड़ी का वैध मान्यता कार्ड भी था लेकिन वाडा के एक फैसले ने नरसिंह ही नहीं बल्कि देश की सवा सौ करोड़ जनता के अरमानों पर पानी फेर दिया। सबसे बड़ी बात यह है कि खेलों में हमेशा क्रिकेट को महत्व देने वाले लोग भी नरसिंह के मामले में दु:ख जाहिर कर रहे हैं। जबकि देश में क्रिकेट की तरह, हॉकी, कुश्ती, बैडमिंटन, जिम्नास्ट, तैराकी और अन्य खेलों से जुड़े खिलाडिय़ों को पर्याप्त सुविधाएं दी जातीं, तो शायद ओलंपिक में खेलने वाली टीमों को मिलने वाले पदकों की संख्या में भारत का स्थान सबसे नीचे नहीं होता, बल्कि हमारे खिलाड़ी भी टॉप टेन में आते ।
हम ओलंपिक में पदक हासिल करने वालों को पुरस्कृत करने में जितना रुचि लेते हैं, यदि खिलाड़ी को तैयार करने में भी उतनी रुचि लें, खिलाडिय़ों को सुविधाएं और संसाधन मुहैया करायें, तो शायद ओलंपिक में भारत की तरफ से पदक विजेताओं का टोटा खत्म हो जायेगा। हमारे खिलाड़ी भी अमेरिका और चीन की तरह दहाई के अंकों में मेडल ले आयेंगे। इसलिए सबसे पहले सरकारों और खेल संघ के पदाधिकारियों को खिलाडिय़ों के साथ खेल खेलना बंद करना होगा।

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