खास उद्योगपति के लिए मोदी सरकार में आये- अच्छे दिन

त्रिदीब रमण

कुछ तो कारण हैं जो राहुल गांधी एक बदले अवतार में सामने आए हैं, और अब उनकी कही गई बातों के मायने और संदर्भ पहले से कहीं ज्यादा सारगर्भित हैं। सो, जब राहुल गांधी कहते हैं कि गुजरात के एक खास उद्योगपति के लिए अच्छे दिन आ गए हैं तो उसका एक व्यापक फलक है।

सूत्र बताते हैं कि प्रधानमंत्री जब भी विदेश यात्रा को जाते हैं, तो वे जिस भी होटल में रुकते हैं वहां इस उद्योगपति के लिए एक कमरा पहले से आरक्षित होता है, कमरे की बुकिंग भी पी.एम.ओ. द्वारा करवाई जाती है।
अब मामला चाहे पैरिस के प्लाजा एथेना होटल का हो, बर्लिन के एडलॉन, न्यूयॉर्क के न्यूयॉर्क पैलेस या फिर सिडनी या टोक्यो के होटलों का, हर जगह इस उद्योगपति को प्रधानमंत्री के साथ रुकने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। यहां तक कि प्रधानमंत्री के सम्मान में दिए गए हर स्टेट डिनर में भी इस उद्योगपति की मौजूदगी देखी गई।
पैरिस के होटल प्लाजा एथेना का नजारा तो सबसे अलग था, हालांकि फ्रांस की यात्रा पी.एम. की सबसे व्यस्ततम यात्राओं में से एक थी, फिर भी उस यात्रा में प्रधानमंत्री ने प्लाजा एथेना में कोई अढ़ाई घंटे इस उद्योगपति के साथ बिताए, न सिर्फ उनके साथ डिनर किया, बल्कि मन की बातें भी शेयर कीं, सूत्र बताते हैं कि जब प्रधानमंत्री अपने इस उद्योगपति मित्र के साथ डिनर कर रहे थे, तब तक नीचे होटल की लॉबी में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल, विदेश सचिव एस. जयशंकर और फ्रांस में भारत के राजदूत अपनी बारी का इंतजार करते देखे गए।
प्रधानमंत्री की न्यूयॉर्क यात्रा के दौरान भी कई बार कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। सत्ता के कंगूरे पर अच्छे दिनों की यह कौन सी आहट सुनाई दे रही है भई? क्या अरुण शौरी की ताजा खिसियाहट इन्हीं बातों से जुड़ी है?
मुस्लिम राग अलापने के लिए मशहूर मुलायम परिवार की हिंदू कर्म कांडों में आस्था बढ़ती ही जा रही है। हालिया दिनों में मुलायम और अखिलेश ने हिंदू पुजारियों व धर्म गुरुओं के लिए अपने घर और दिल के दरवाजे खोल दिए हैं और आए दिन कोई न कोई पूजा-पर्व या अनुष्ठान चलता ही रहता है। इस परम्परा की शुरूआत तब हो गई थी जब अखिलेश 2012 में यू.पी. के सी.एम. बने तो उस समय पंचक था, इसकी शुद्धि के लिए 47 पंडितों से इसकी पूजा करवाई गई। इसके बाद मुलायम परिवार के एक उद्योगपति मित्र के उनके गोमती नगर स्थित आवास पर एक बड़ा अनुष्ठान संपन्न हुआ, सूत्र बताते हैं कि इसकी पूर्णाहुति पर अखिलेश और डिम्पल भी शामिल हुए। अनुष्ठान में सहभागी बने तमाम पंडितों को उन उद्योगपति की ओर से और अखिलेश-डिम्पल की ओर से 51-51 हजार रुपयों की दक्षिणा दी गई, अनुष्ठान में शामिल होने वाले पंडितों के मोबाइल फोन बाहर ही रखवा लिए जाते थे।
इस बार जब सपा सुप्रीमो मुलायम अचानक से बीमार पड़ गए तो इस परिप्रेक्ष्य में बड़ी धूमधाम से श्रवण यात्रा का आयोजन हुआ। श्रद्धालुओं को लखनऊ से ऋ षिकेश-हरिद्वार की मुफ्त यात्रा करवाई गई, उनके लिए ठहरने से लेकर खाने-पीने तक के पुख्ता इंतजाम किए गए। ट्रेन के पांच कोच इनके लिए खास तौर पर आरक्षित किए गए, श्रद्धालुओं को खाने-पीने के सामान से भरा एक बैग भी खास तौर से भेंट किया गया। स्वयं मुख्यमंत्री इन्हें लखनऊ स्टेशन विदा करने पहुंचे, तमाम अखबारों में यात्रा से संबंधित बड़े-बड़े विज्ञापन दिए गए। ज्यों-ज्यों 2017 की चुनाव की घड़ी करीब आ रही है मुलायम-अखिलेश दरबार में हिंदू पंडितों व धर्म गुरुओं का महत्व निरंतर बढ़ता जा रहा है।
संसद के मौजूदा बजट सत्र के बाद कुछ बड़े फेरबदल की सरगोशियां सुनी जा सकेंगी, सबसे ज्यादा शोर तो मोदी मंत्रिमंडल में एक बड़े फेरबदल का है, इसी वक्त विभिन्न प्रांतों में 9 राज्यपालों की नियुक्ति होनी है, राज्यपाल पद के आकांक्षियों में बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और दिल्ली के वरिष्ठ भाजपा नेता शामिल हैं। उत्तर प्रदेश से लालजी टंडन, मध्य प्रदेश से नजमा हेपतुल्ला, दिल्ली से विजय कुमार मल्होत्रा, बिहार से सी.पी. ठाकुर जैसे नेताओं के नाम इस दौड़ में हैं। पर पिछले दिनों प्रधानमंत्री से मिलकर कथित तौर पर ठाकुर ने राज्यपाल बनने में अनिच्छा जताई है, वैसे भी ठाकुर की राज्यसभा की मियाद अभी अढ़ाई वर्ष बाकी है। आसन्न बिहार विधानसभा चुनाव के आलोक में डा. ठाकुर संगठन में अपनी कोई महती भूमिका चाहते हैं, स्वयं पार्टी अध्यक्ष अमित शाह इन संभावनाओं को टटोल रहे हैं कि अगर डा. ठाकुर को बिहार भाजपा का अध्यक्ष बनाया जाता है तो क्या इससे राज्य की अगड़ी जातियां भाजपा के पक्ष में लामबंद हो सकती हैं? क्योंकि बिहार के मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष मंगल पांडे का कार्यकाल पिछले 18 अप्रैल को ही समाप्त हो गया था और वैसे भी यह बेहद आम धारणा है कि पांडे अब तक बिहार भाजपा के सबसे प्रभावशाली नेता सुशील मोदी के रबर स्टैंप की तरह काम करते आए हैं। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी खुद को बदलने के प्रयासों में जुट गई हैं, इन तमाम कयासों के बीच कि मंत्रिमंडल के संभावित फेरबदल में उनका मंत्रालय बदला जा सकता है, स्मृति एक तरह से डैमेज कंट्रोल उपक्रम साध रही हैं, अब वह बारी-बारी से समाचार पत्रों के संपादकों और न्यूज चैनल प्रमुखों से मिल रही हैं और उन्हें यह समझाने की कोशिश कर रही हैं कि सभी पत्र-पत्रिकाओं व न्यूज चैनल को सरकार व मंत्री की आलोचना का हक है।

Pin It