खानापूर्ति साबित हो रही एफएसडीए की कार्रवाई

तीन महीने पूर्व प्रयोगशाला भेजे गये नमूनों की जांच रिपोर्ट आने का इंतजार

नये वित्तीय वर्ष में 79 नमूनों को जांच के लिए भेजा गया प्रयोगशाला

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
Captureलखनऊ। जिले में खाद्य पदार्थों में मिलावट को लेकर की जा रही कार्रवाई का मिलावट खोरों पर कोई असर नहीं दिख रहा है। खाद्य सुरक्षा ईकाई दुकानों और प्रतिष्ठानों पर छापेमारी कर नमूने लेती है, जिसे जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जाता है, लेकिन प्रयोगशाला से नमूनों की जांच रिपोर्ट आने के लिए महीनों इंतजार करना पड़ता है। इस वजह से मिलावट खोरों के खिलाफ चलाया जा रहा अभियान खानापूर्ति साबित हो रहा है।
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) अनुभाग की खाद्य सुरक्षा ईकाई खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वालों की शिकायतों के आधार पर खाने वाले सामान का नमूना इकट्ठा करती है। इसको 24 घंटे के अंदर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजना होता है। इसमें अतिमहत्वपूर्ण मामलों की जांच रिपोर्ट सप्ताह भर के अंदर और सामान्य नमूनों की जांच रिपोर्ट 21 दिन में आनेे का नियम है। इसके बावजूद खाद्य पदार्थों में मिलावट की जांच करने वाली प्रयोगशाला से जांच रिपोर्ट आने में दो से तीन महीने का समय लग जाता है। इतना ही नहीं खाद्य पदार्थों में मिलावट संबंधी जांच रिपोर्ट मिलने और नमूने फेल होने के मामलों की कोर्ट में सुनवाई का काम भी लंबित पड़ा हुआ है। लखनऊ में एडीएम पूर्वी की अदालत में पेश 75 से अधिक मामलों की सुनवाई लंबित है। इस कारण खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वालों के खिलाफ कोई भी कार्रवाई प्रभावी साबित नहीं हो पा रही है।
एफएसडीए से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल, मई और जून महीने में टीम ने कुल 329 स्थानों का निरीक्षण किया था। टीम ने 46 प्रतिष्ठानों में छापेमारी की थी। जांच के लिए 115 नमूने भरे थे। इसके साथ ही जुलाई महीने में करीब 10 नमूने भरकर जांच के लिए भेजे गए हैं। इसमें मात्र 46 नमूनों की जांच रिपोर्ट आई है, जिसमें 21 नमूने फेल पाये गये हैं। इस तरह कुल 79 नमूनों की जांच रिपोर्ट आने का इंतजार है। जबकि तीन महीने का समय बीतने के बाद भी प्रयोगशाला से नमूनों की जांच रिपोर्ट नहीं आई है।

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