खानापूर्ति में जुटा परिवहन विभाग, लगा रहा है यूपी सरकार को करोड़ों का चूना

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
Captureलखनऊ। प्रदेश में बेहतर और आरामदायक सफर के लिए यूपीएसआरटीसी ने बड़े जोश में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के हाथों स्कैनिया बसों का उद्घाटन तो करवा दिया। लेकिन रोजाना इन बसों के संचालन में काफी दिक्कतें आ रही हैं जिससे सवाल ये उठ खड़ा होता है कि इतनी हड़बड़ी क्यों थी इन बसों को सडक़ों पर उतारने की। ऐसे में आज परिवहन के कई बड़े अधिकारियों ने मीडियाकर्मियों के साथ इस बस का लखनऊ की सडक़ों पर ट्रायल किया ताकि वो ये जान सकें कि आखिर कमी कहां है।
वहीं परिवहन विभाग की कई नयी योजनायें जो शुरू तो की गयी और यहां तक कि मुख्यमंत्री द्वारा उनका उद्घाटन भी करवा लिया पर वो सारी योजनायें फ्लॉप होती हुयी दिख रही हैं चाहें वो साइकिल योजना हो या वाटर एटीएम या स्कैनिया बस सब की हालत खस्ता है। ज़ाहिर है परिवहन विभाग यूपी सरकार को करोड़ों रुपयों का चूना लगा रहा है। ऐसे में आखिर जवाबदेही किसकी है ये बड़ा सवाल है। 4पीएम ने इस मामले को प्रमुखता से छापा था। अब अपनी कमी छुपाने के लिए परिवहन विभाग अलग अलग पैंतरे आजमा रहा है।
चमचमाती इस बस के आगे बड़ी से बड़ी लग्जरी गाड़ी फेल है और होगी भी क्यों नहीं जब बस की कीमत ही 1 करोड़ है। लेकिन अब ये बस यूपी रोडवेज के गले की हड्डी बन गया है और इतनी महंगी बस में रोजाना कोई ना कोई खराबी निकल कर सामने आ रही है और लगातार मीडिया में ये रिपोर्टस आ रही हैं आखिर यूपीएसआरटीसी को मुख्यमंत्री के हाथों हरी झंडी दिखाने की इतनी हड़बड़ी क्या थी इसलिए आज स्कैनिया बस का लकनऊ की सडक़ों पर ट्रायल किया गया।
रोजाना इन बसों में कोई ना कोई खराबी की शिकायत आ रही है। कभी डीजल टैंक में एयर लॉक की शिकायत तो वहीं ड्राइवर्स भी इस बस को चलाने में अक्षम नजर आ रहे हैं और कई सिस्टम अभी तक इन बसों में नहीं लगाए गए हैं। जैसे इन बसों की लांचिंग से पहले ये कहा जा रहा था कि ये बसें एफएमएस तकनीक से लैस होंंगी जिसमें ड्राइवर की हरकत पर नजर रखा जा सकता है। जबकि हमारी टीम ने ये पता किया है अभी तक अलग-अलग रुटों पर दौडा़ई जा रहीं इन तीनों बसों में से किसी में भी एफएमएस सिस्टम नहीं इंस्टॉल किया गया। हम आपको बता दें कि एफएमएस एक सेंसटिव सिस्टम है जिसमें शराब पीकर गाड़ी ड्राइवर नहीं चला सकेंगे और बस में लगा सेंसर ड्राइवर की सांसों से जान जाएगा कि ये इसने शराब पी है। लेकिन जब ये सवाल स्कैनिया कंपनी के सेल्स हेड से पूछा गया, तो उनका कहना था कि हमारे देश में ये सिस्टम अनिवार्य नहीं है, इसलिए नहीं लगाया गया।
वहीं जब इस बस की खूबी बताने के लिए मीडिया से मुखातिब हुए यूपीएसआरटीसी के चीफ मैनेजर ऑफिसर ऑपरेशंस एचएस गाबा का कहना है कि ये बसें इसलिए लाईं जा रही हैं कि ये उच्च तकनीक से लैस हैं और इतने बड़े प्रदेश में एसी बसों की भारी किल्लत है। लेकिन सवाल यही है कि तमाम खूबियों के दावे करने वाले यूपीएसआरटीसी अब इन बसों को दुरुस्त करने में जुट गई है और अभी तक 33 बसों का ऑर्डर भी दिया जा चुका है। लेकिन सवाल यही है कि बिना कमी जांचे इन बसों को सडक़ों पर उतारकर यूपीएसआरटीसी यात्रियों की सुरक्षा के साथ भी खिलवाड़ कर रही है।

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