खबर छपने पर भी नहीं है अफसरों को होश कूड़े के ढेर पर जानवरों के बीच बाबा साहेब

4पीएम ने 18 दिसम्बर को इस खबर को प्रमुखता से किया था प्रकाशित
एसएनए परिसर में कूड़े की ढेर में पड़ी हैं अनेक महापुरुषों की मूर्तियां

F14पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। महात्मा गांधी, गौतम बुद्ध, बाबा साहब भीमराव अंबेडकर जैसे महापुरुष देश के गौरव है। इनके कार्यों के बारे में हम बच्चों को बताते नहीं थकते। युवाओं को इनके बारे में बताकर प्रेरणा लेने की कवायद की जाती है, लेकिन अगर यही महापुरुषों की मूर्तियां कूड़े की ढेर में पड़ी हों और उसमें जानवर अपना भोजन तलाशते हों तो यह उन महापुरुषों का कितना बड़ा अपमान है, इसे बताने की जरूरत नहीं है। जिन महापुरुषों के नाम पर देश के राष्टï्रीय और क्षेत्रीय राजनैतिक दल अपनी रोटी सेंकते हो, वहां इन महापुरुषों की इतनी उपेक्षा समझ से परे हैं। जी हां! राजधानी के संगीत नाटक अकादमी परिसर में भारत के अनेक महापुरुषों की मूर्तियां कूड़े की ढेर में पड़ी हुई हैं। करोड़ों रुपए की मूर्तियों को कोई पूछने वाला नहीं है।
एसएनए परिसर में लंबे अरसे से अनेक महापुरुषों की करोड़ों की महंगे पत्थरों की मूर्तियां पड़ी हुई है। दिन-प्रतिदिन यहां मूर्तियों की संख्या बढ़ रही है और उसके साथ ही गंदगी भी बढ़ती जा रही है। ऐसा नहीं है कि इन मूर्तियों पर आला अधिकारियों की निगाह नहीं पड़ती। एसएनए में प्रतिदिन अति विशिष्टï लोगों का आना-जाना लगा रहता है। इन विशिष्टï लोगों की नजर मूर्तियों पर पड़ती है लेकिन इनकी दुर्दशा देखकर उन्हें रत्ती भर भी अफसोस नहीं होता। शायद इसीलिए देखकर आराम से चले जाते हैं। कई महानुभाव तो ऐसे भी है जो पान की पीक भी मार देते हैं। इतना ही नहीं एसएनए परिसर में होने वाले कार्यक्रम के बाद निकलने वाला जूठा और कचरा भी यहां फेंक दिया जाता है जिसमें जानवर अपना भोजन तलाशते हैं। इन मूर्तियों की दुर्दशा पर एसएनए का कहना है कि पहली बात इन मूर्तियों से एसएनए का कोई लेना-देना नहीं है। ये मूर्तियां सांस्कृतिक विभाग मंत्रालय की हैं। कुछ सालों पहले राजकीय निर्माण निगम की एक यूनिट यहां पर मूर्ति निर्माण का काम कर रही थी। जो मूर्ति टूट गई थी या कुछ उसमें समस्या आ गई थी तो उसे परिसर में डंप कर दिया गया। एसएनए के पूर्व सचिव ने कई बार इसे हटाने के लिए सांस्कृतिक मंत्रालय को पत्र लिखा लेकिन उन लोगों ने कोई जवाब नहीं दिया। वर्तमान सचिव ने फिर से इसे हटाने के लिए पत्र लिखा तो सांस्कृतिक मंत्रालय ने हटाने के लिए कहा है। देखना है कब तक कार्रवाई होती है।

ये मूर्तियां किसी न किसी के आदेश पर ही निर्मित हुई हैं। यह चिन्हित स्थलों पर लगनी चाहिए थी। यदि नहीं लगीं तो उनके रख-रखाव का समुचित प्रबंध होना चाहिए। इस तरह महापुरुषों की मूर्तियां कूड़े के ढेर में फेंका जाना निंदनीय है। इस तरह के मामलों पर प्रदेश सरकार को भी ध्यान देने की जरूरत है।

-विजय बहादुर पाठक, प्रवक्ता भाजपा

महापुरुषों की मूर्तियों का कूड़े के ढेर में फेंका जाना अत्यंत निंदनीय है। महापुरुषों का अपमान करने का अधिकार न तो किसी सरकार के पास है और न ही किसी पार्टी के पास। इसलिए मामले को गंभीरता से लेकर प्रदेश सरकार को तत्काल मूर्तियों के रखरखाव का समुचित प्रबंध करना चाहिए।
-सत्यदेव त्रिपाठी, वरिष्ठ कांग्रेसी नेता

सपा सरकार गुंडे और माफियाओं पर मेहरबान है। इनका महापुरुषों, देश के संविधान और नीतियों से कोई लेना देना नहीं है। सपा सरकार में शामिल लोग मात्र सत्ता का दुरुपयोग कर रहे हैं। इसी वजह से महापुरुषों की मूर्तियां धूल फांक रही हैं और सरकार तमाशा देख रही है।
-स्वामी प्रसाद मौर्या, बसपा नेता

सबसे ज्यादा सांसद देने वाले यूपी के बेहाल किसानों पर तरस नहीं खा रही मोदी सरकार

केन्द्र ने मध्य प्रदेश और महाराष्टï्र को सूखा राहत के लिये दिये 5083 करोड़
यूपी के 50 जिले सूखे और बुंदेलखंड अकाल की चपेट में

लखनऊ। इसे राजनीति का काला चेहरा ही कहेंगे कि अकाल के कारण बुंदेलखंड में लोग घास की रोटियां खाने को मजबूर हैं लेकिन केंद्र का ध्यान इस ओर नहीं जा रहा। ध्यान जायेगा भी क्यों? चुनाव तो अगले साल है, इसलिए पैकेज भी अगले साल ही मिलेगा ताकि केंद्र सरकार उस समय अपनी राजनीति चमका सके और राहत पैकेज का फायदा उसे राजनीतिक रूप में मिल सके।
गौरतलब है कि बीते दिनों केंद्र की बीजेपी सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित क्षेत्रों में राहत के लिए राहत फंड का ऐलान किया। सरकार ने सूखा प्रभावित मध्य प्रदेश के लिए 2022 करोड़ और महाराष्ट्र को 3100 करोड़ रुपये देने की घोषणा की।लेकिन इन सब के बीच कृषि मंत्रालय को उत्तर प्रदेश के 50 जिलों और बुंदेलखंड की याद नहीं आयी। इसका नतीजा है कि बुंदेलखंड को जल्द राहत मिलने की उम्मीद नहीं दिख रही। पिछले दिनों उत्तर प्रदेश सरकार ने भी मोदी सरकार से वर्ष 2015-16 के लिए सूखे से निपटने के लिए लगभग 2000 करोड़ रूपए की सहायता राशि मांगी थी, जिस पर केंद्र ने कोई सुनवाई नहीं की। शायद यह इसलिये कि इस राज्य में भाजपा की सरकार नहीं है। ऐसा अक्सर देखने को मिला है कि राहत पैकेज के नाम पर केंद्र सरकारें राजनीति करती आयी हैं। अभी हाल ही में पीएम मोदी ने बिहार चुनाव में एक रैली के दौरान 1.25 लाख करोड़ का स्पेशल पैकेज बांटते दिखायी दिये थे, जिसकी उस समय काफी आलोचना हुई थी कि इस तरह से किसी रैली में स्पेशल पैकेज देना कहां तक जायज है। यह उस किसान का अपमान है जो अपने खून-पसीने से देश की जनता का पेट भरता है। लेकिन राजनैतिक दलों को इससे कोई सरोकार नहीं है। अपने फायदे के लिए वह किसी को भी निशाना बना सकते हैं।

Pin It