खतरों के खिलाड़ी

“हेलमेट न लगाने के बहाने लोगों ने अपनी-अपनी सुविधा के अनुसार ढूंढ लिए हैं। जबकि हर व्यक्ति अच्छी तरह जानता है कि हेलमेट पहनने से न सिर्फ चेहरे और आंखों की सुरक्षा होती है बल्कि वाहन चलाते समय आपने हेलमेट लगाया है, तो दुर्घटना में आपका मष्तिष्क भी सुरक्षित रहता है। टी.वी, रेडियो, सिनेमाहाल और अखबारों के माध्यम से लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है लेकिन लोगों में हेलमेट लगाने की आदत डेवलप नहीं हो पा रही है।”
sanjay sharma editor5उत्तर प्रदेश में दोपहिया वाहनों पर चालक के साथ पिछली सीट पर बैठे व्यक्ति के लिए हेलमेट लगाना अनिवार्य कर दिया है। इस प्रस्ताव को कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद परिवहन और पुलिस विभाग के अधिकारी सक्रिय हो जायेंगे लेकिन क्या वाहन चालक सरकार के नये नियम को स्वीकार करेंगे। इसका जबाब प्रदेश सरकार, परिवहन विभाग और आम जनता सभी भलीभांति जानते हैं।
देश में दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट पहनने की अनिवार्यता का कानून पहले से लागू है। इस नियम का उल्लंघन करने वालों से जुर्माना भी वसूला जाता है। इसके बावजूद किसी भी प्रदेश की सरकार और संबंधित विभाग शत प्रतिशत दो पहिया वाहन चालकों को हेलमेट पहनकर गाड़ी चलवाने में कामयाब नहीं हो पाई। जहां तक उत्तर प्रदेश में दोपहिया वाहन चलाते समय चालक और पीछे बठने वाले व्यक्ति के हेलमेट पहनने की अनिवार्यता की बात है, तो उस नियम को प्रदेश में लागू करवा पाना सरकार और सरकारी विभागों के लिए बहुत ही मुश्किल काम है। परिवहन और पुलिस विभाग अब तक यूपी में दोपहिया गाड़ी चलाने वालों को हेलमेट पहनने की आदत नहीं डलवा पाया है। बाइक, स्कूटी, स्कूटर और बुलेट चलाने वाला व्यक्ति अच्छी तरह जानता है कि किसी चौराहे पर बिना हेलमेट गाड़ी चलाते पकड़े जाने पर क्या करना है। इसी वजह से अपने शर्ट की ऊपर वाली जेब में बचाव का सामान यानी सुविधा शुल्क और यदि पुलिस वाला नहीं माना, तो पैंट की जेब या पर्स में जुर्माने की रकम साथ रखता है। लेकिन हेलमेट लगाने से परहेज करता है। हर व्यक्ति के पास हेलमेट नहीं पहनने अलग-अलग बहाने होते हैं। जिन लोगों को हमेशा खुली हवा में रहने की आदत है, उन्हें हेलमेट के अंदर घुटन महसूस होती है। इसलिए हेलमेट नहीं पहनते हैं। अधिकांश युवाओं का मानना है कि हेलमेट लगाने से उनका लुक खराब हो जाता है। इस वजह से वे हेलमेट नहीं लगाते हैं। मतलब साफ है कि हेलमेट न लगाने के बहाने लोगों ने अपनी-अपनी सुविधा के अनुसार ढूंढ लिए हैं। जबकि हर व्यक्ति अच्छी तरह जानता है कि हेलमेट पहनने से न सिर्फ चेहरे और आंखों की सुरक्षा होती है बल्कि वाहन चलाते समय आपने हेलमेट लगाया है, तो दुर्घटना में आपका मष्तिष्क भी सुरक्षित रहता है। टी.वी, रेडियो, सिनेमाहाल और अखबारों के माध्यम से लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है लेकिन लोगों में हेलमेट लगाने की आदत डेवलप नहीं हो पा रही है। जो बाइक चलाने वाला अपने लिए हेलमेट नहीं ले पा रहा है, वह गाड़ी के पीछे बैठने वाले व्यक्ति के लिए हेलमेट खरीदेगा, यह बिल्कुल ही उम्मीद से परे है।
दरअसल हेलमेट पहनने की अनिवार्यता हो या अन्य ट्रैफिक नियमों का पालन, जब तक कानून कठोर नहीं होंगे, उन्हें कड़ाई से लागू नहीं किया जायेगा, जनता स्वयं अपनी सुरक्षा को लेकर सचेत नहीं होगी। तब तक खुलेआम ट्रैफिक नियमों और कानूनों की धज्जियां उड़ती रहेंगी। असुरक्षित वाहन चलाने वाले काल के गाल में समाते रहेंगे।

 

Pin It