क्वीनमेरी में मानवीय संवेदनाएं भी तोड़ देती हैं दम मरीज व परिजनों के साथ होता है ऐसा व्यवहार

अस्पताल की कमियां उजागर करने से बौखलाये सीएमएस ने मीडिया की इंट्री पर लगाया प्रतिबंध
तीमारदारों को रोजाना गेट पर तैनात गार्डों की बदसलूकी का होना पड़ता है शिकार

captureवीरेन्द्र पांडेय
लखनऊ। केजीएमयू के बाल महिला चिकित्सालय क्वीनमेरी में चिकित्सक, पैरामेडिकल स्टाफ और गार्ड गर्भवती महिलाओं तथा उनके परिजनों के साथ पशुवत व्यवहार करने से बाज नहीं आ रहे हैं। इन्हीं हरकतों की वजह से दिन ब दिन अस्पताल की साख गिरती जा रही है। इसके बावजूद अस्पताल प्रशासन अपने स्टाफ के लोगों का व्यवहार सुधारने के बजाय मरीजों और तीमारदारों को होने वाली समस्या सामने लाने वाली मीडिया पर भड़ास निकालने में जुट गया है। क्वीनमेरी में मीडियाकर्मियों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। अब क्वीनमेरी में गार्ड की अनुमति के बिना मरीज और परिजन का घुसना मुमकिन नहीं है, जबकि कई बार मरीज की काउंसिलिंग करने वाले डॉक्टर ही आकस्मिक स्थिति में परिजनों को अन्दर बुलाते हैं। उसके बाद भी मेन गेट पर खड़े गार्ड परिजनों को दुत्कार देते हैं।
हरदोई निवासी आशुतोष की पत्नी शालिनी मंगलवार को लेबर रूम में एडमिट थी। अचानक उनकी तबीयत बिगडऩे पर वहां पर मौजूद डॉक्टरों ने आशुतोष को बुलाना शुरू कर दिया। चिकित्सकों ने कई बार माइक से परिजनों को अंदर पहुंचने के लिए अलाउंसमेंट भी कराया, लेकिन जब आशुतोष अस्पताल के मेन गेट पर पहुंचे तो वहां मौजूद गार्ड ने डांट फटकार कर उन्हें भगा दिया। जब आशुतोष ने दोबारा गार्ड के पास जाकर कहा कि उन्हें डॉक्टर ने अंदर बुलाया है। इस बात का अलाउंसमेंट भी किया गया है, तो गार्ड ने कहा कि अंदर से शालिनी नहीं रागिनी के पति को बुलाया जा रहा है। जबकि ठीक उसी समय माइक पर आशुतोष का नाम लेकर बुलाया जा रहा था, लेकिन गार्ड उनको अंदर जाने से रोक रहा था। इस पर वहां मौजूद कुछ अन्य लोगों ने गार्ड को बहुत समझाया तब जाकर गार्ड ने आशुतोष को अंदर जाने दिया। इसी तरह सीतापुर निवासी सूरज अपनी पत्नी का ब्लड टेस्ट करवाने के लिए क्वीनमेरी अस्पताल से ट्रामा सेंटर तक भटक रहे थे। इस चक्कर में उन्हें तीन बार अस्पताल के अन्दर जाना पड़ा तो गेट पर तैनात गार्ड से उनका विवाद हो गया। गार्ड ने उन्हें बार-बार अंदर बाहर जाने पर नाराजगी जाहिर की और गाली देकर भगा दिया। जबकि सूरज गेट पर तैनात गार्ड से बार-बार कह रहे थे कि उनकी पत्नी की जो जांच करवानी है, वह अंदर नहीं होती है। इसलिए ब्लड सैम्पल लेकर बाहर जाना पड़ रहा है। इतना ही नहीं ट्रामा सेंटर की पैथालॉजी में कई तरह के पर्चों की डिमांड की जाती है, इसकी सही जानकारी न होने की वजह से बार-बार पर्ची के लिए क्वीनमेरी आना पड़ता है। इसलिए ऐसी समस्या हो रही है, लेकिन गार्ड ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया और उनके साथ गाली गलौज भी की। दरअसल आशुतोष और सूरज का मामला तो बानगी भर है, इस तरह के दर्जनों मामले क्वीनमेरी में रोजाना आते हैं। जिनकी वजह से अस्पताल की साख गिरती जा रही है।

दर्द से तड़पती महिला के पति को चिकित्सकों ने भगाया

बाराबंकी के सूरत गंज निवासी दिनेश अपनी गर्भवती पत्नी की हालत बिगडऩे पर पहले सूरतगंज के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र लेकर गये थे। वहां चिकित्सकों ने महिला की जांच करने के बाद जिला अस्पताल रेफर कर दिया। जिला अस्पताल के चिकित्सकों ने मरीज की हालत देखकर तत्काल क्वीनमेरी अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। आखिरकार दोपहर बाद दिनेश अपनी पत्नी को लेकर क्वीन मेरी अस्पताल पहुंचे। जहां गेट पर मौजूद गार्ड ने गर्भवती महिला को तो अन्दर जाने दिया लेकिन दिनेश से कहा कि तुम जाकर बाहर बैठो। इधर अस्पताल में अर्ध बेहोशी की हालत में पड़ी गायत्री दर्द से तड़प रही थी। उसको देखने और हाल पूछने वाला कोई नहीं था। करीब आधे घंटे तक गायत्री वहीं फर्श पर पड़ी दर्द से चीखती चिल्लाती रही लेकिन इलाज नहीं मिला। वहीं गायत्री के पति दिनेश का आरोप है कि अस्पताल में अंदर जाने के लिए इंसान की हैसियत देखी जाती है। हम लोग गरीब हैं, गार्ड  को अंदर जाने का सुविधा शुल्क नहीं दे सकते हैं। इसलिए दुत्कार कर भगाया जा रहा है। जबकि वीआईपी लोगों को बिना पूछे इंट्री मिल जाती है।

अस्पताल में बंदरों का भी आतंक
क्वीन मेरी अस्पताल में गेट से लेकर अस्पताल के अन्दर तक बंदरों का आतंक फैला हुआ है। यह समस्या कई महीने से लगातार बनी हुई है। आलम ये है कि जनरल वार्ड से लेकर लेबर रूम तक बंदर टहलते रहते हैं। बंदरों के वार्ड में घूमने और मरीजों के साथ मारपीट की घटनाएं आम हो चुकी हैं। इस बारे में अस्पताल प्रशासन के अधिकारियों से कई बार शिकायत की जा चुकी है लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों को कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। जबकि अस्पताल में भर्ती प्रसूताओं में भय का माहौल पैदा हो गया है, क्योंकि बंदरों की आवाजाही की वजह से नवजात व प्रसूताओं को नुकसान पहुंच सकता है।

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