क्रिसमस और नये साल के जश्न पर नोटबंदी ने लगाया ‘ब्रेक’

  • टूर एंड ट्रेवल्स की कंपनियों को पहुंच रहा नुकसान, नहीं हो रही कोई बुकिंग
  • शहर के लोगों की एडवांस बुकिंग हो रही कैंसिल

ऐश्वर्या गुप्ता
लखनऊ । सर्दी का मौसम शुरू हो चुका है और जल्द नया साल और क्रिसमस जैसे पार्टी अकेजन आने वाले हैं। जिसके लिए लोग हर साल महीने भर पहले से तैयारी कर लेते हैं। शहर के लोग हर साल अक्सर इस मौसम में या तो पार्टी के लिए कोई जगह पहले से बुक करवा लेते हैं या फिर लोग बाहर जाकर नया साल मनाने की सोचते हैं। नया साल परिवार और दोस्तों के साथ बाहर जाने का मौका भी होता है और दस्तूर भी। शादियों का सीजन तो चल ही रहा है। ऐसे मौसम में लोग हनीमून जैसे पैकेज भी बुक करवाते हैं। मगर इस बार नोटबंदी की वजह से ऐसे हालात बने हुए हैं, जिसकी वजह से लोगों के प्लान्स फ्लॉप हो रहे हैं । नोटबंदी ने नए साल के स्वागत का उत्साह ठंडा कर दिया है और न ही नई शादी को एंज्वॉय करने की हसरत है। शहर में ऐसी कई ट्रेवल एजेंसी भी हैं, जो इस वक्त थोड़े निराश हैं।

सब पर लग रहा ब्रेक

अलीगंज स्थित साईं नाथ टूर ट्रेवल्स एजेंसी के मालिक सुनील अग्रवाल ने सरकार के फैसले का स्वागत किया, लेकिन वीरान होते पर्यटन उद्योग पर निराशा भी जताई है। सुनील बताते हैं कि नवंबर के शुरू से ही नए साल के जश्न की तैयारी के लिए बुकिंग शुरू होती थी। हर साल बाहर न्यू ईयर मनाने वालों की संख्या बढ़ती थी। इस बार भी सीजन काफी बेहतर रहने की उम्मीद थी, जिसकी तैयारी हमने पूरी कर रखी थी। लेकिन नोटबंदी के निर्णय ने सब बेकार कर दिया। अब गिनती के ही लोग बुकिंग करा रहे हैं। पिछले एक हफ्ते से कोई नई बुकिंग नहीं हुई है।

सब के हाथ में हैं पुराने नोट

आशियाना स्थित गायत्री ट्रेवल्स पर भी ऐसी ही हालत बनी हुई है। मालिक अमित बताते हैं कि नोटबंदी से कारोबार 20 से 30 फीसदी ही रह गया है। लोग चलन से बाहर हो चुके नोट लेकर अभी भी बुकिंग कराने आ जाते हैं और वे नोट हम अब ले भी नहीं सकते। सरकार के निर्णय का असर सबसे अधिक मिडिल क्लास पर पड़ा है, क्योंकि पिछले कुछ सालों में मिडिल क्लास भी साल में एक बार परिवार के साथ घूमने जाता था। लेकिन नोटबंदी के बाद फिलहाल तो यह सब बेकार हो गया है।

अब सिर्फ इंतजार कर सकते हैं

जानकीपुरम स्थित ड्रीम ट्रिप फार यू ट्रेवल्स एजेंसी के मालिक धीरज के मुताबिक पर्यटन उद्योग पर इसका खासा प्रभाव पड़ा है। धीरज ने बताया कि शहर के लोगों की लाइफ स्टाइल में काफी बदलाव हो रहा है। शहर में टूर और ट्रेवल्स का व्यवसाय का आकार भी बढ़ रहा है। इस बार काफी उम्मीद थी, लेकिन नोटबंदी के असर ने सब समेट दिया। विदेश तो क्या, देश में भी कोई नई बुकिंग नहीं हो सकी है। ट्रेवलिंग का शौक रखने वालों की विदेश में पहली पसंद सर्दियों में दुबई, मारीशस, हांगकांग, सिंगापुर, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, मालदीव, साउथ अफ्रीका, थाईलैंड जैसी जगह होती हंै। इसके अलावा लोग भारत में कई हिल स्टेशन और बीच पर नया साल मनाना पसंद करते हैं। नोटबंदी के चलते लोग गोवा और शिमला-मनाली जैसी जगह को भी बाय-बाय बोल रहे हैं।

हम हमेशा नये साल पर कहीं न कहीं घूमने जाते थे। पूरा साल इस इंतजार में बीतता था कि कहीं न कहीं नये साल पर घूमने जायेंगे। मगर फिलहाल इस बार वो इंतजार और बढ़ गया है क्योंकि हमारी पहली प्राथमिकता घर चलाना है। नोटबंदी से पहले परिवार के साथ दुबई जाने की तैयारी की थी, लेकिन अब तो नोटबंदी फैसले के बाद नया साल घर पर ही मनाने की तैयारी है।
– अखिल वर्मा, अलीगंज

मेरी शादी इसी साल हुई है, शादी के तुरंत बाद किसी काम की वजह से घूमने नहीं जा पाये थे। इसीलिए सोचा था कि नये साल पर घूमने जायेंगे। हमने मनाली घूमकर आने का मन बनाया था और टिकट भी बुक करवा ली थी। लेकिन नोटबंदी के बाद मनाली घूमने वाली बात मन में ही रह गई। फिर कभी मौका मिला तो देखेंगे।
– शुभम श्रीवास्तव, विकासनगर

मां और परिवार के साथ धार्मिक यात्रा पर जाकर साल की शुरुआत करना चाहती थी। दस दिन की छुटटी के लिए ऑफिस में एप्लीकेशन भी दे दी थी। लेकिन अब नहीं जा पा रहे हैं मगर कोई बात नहीं एक तरह से इसमें हमारा ही फायदा है। नोटबंदी के चलते कम से कम भ्रष्टाचार भी खत्म हो सकता है। जो हर आम इंसान के लिए कहीं न कहीं लाभदायक है।
– नेहा मेहरोत्रा, चांदगंज

हर साल दोस्तों के साथ न्यू ईयर घर के बाहर ही मनाता हूं। इस बार भी गोवा जाने का प्लान था। लेकिन अब नोटबंदी के बाद गोवा जाना संभव नहीं लग रहा। काफी समय से प्लान बनाया हुआ था कि हर हाल में गोवा जाकर रहेंगे लेकिन गोवा तो दूर अब तो यूपी में ही कहीं घूम ले तो बड़ी बात है।
– शौर्य त्रिपाठी, महानगर

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